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Kejriwal government will face vote of confidence in Delhi Assembly



Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली में सरकार बनाकर नया इतिहास रचने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार को बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है। कांग्रेस ने एक बार फिर दोहराया है कि वह 'आप' सरकार के समर्थन में वोट देगी। अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है कि सरकार सदन में अपना बहुमत साबित कर देगी। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी ने स्पीकर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। भाजपा अपने सभी 31 विधायकों विश्वास मत के खिलाफ वोट करने के लिए व्हिप जारी किया है।
सूत्रों ने बताया कि 'आप' के विधायक मनीष सिसोदिया आज दोपहर दो बजे सदन में विश्वास प्रस्ताव रखेंगे और इस पर चर्चा के बाद वोटिंग कराई जाएगी। चर्चा में 'आप' के आठ विधायक भाग लेंगे।
उधर, केजरीवाल द्वारा यह कहे जाने पर कि उनके पास वक्त कम बचा है, के अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उन्हें कहीं न कहीं विधानसभा में सरकार की हार का खतरा भी महसूस हो रहा है। आखिर केजरीवाल को इस बात का डर क्यों है, आइए जानते हैं सदन के आंकड़ों के लिहाज से इसका जवाब :-
सदन के आंकड़े
अगर सदन के गणित की बात करें तो अकाली दल के साथ भाजपा के 32 विधायक हैं। इधर आप के 28 विधायक हैं और कांग्रेस के 8 विधायक सरकार को समर्थन कर रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल ने भी आप को समर्थन दिया है। इस प्रकार सदन में सरकार के पक्ष में 37 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 36 विधायकों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस के एक विधायक मतीन अहमद को प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया है। इसके बावजूद सरकार के पक्ष में 36 मत पड़ने चाहिए। यदि ऐसा ही होता है तो सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन कांग्रेस के जयकिशन और आप के दिनेश मोहनिया बुधवार को शपथ लेने सदन में नहीं पहुंचे। जाहिर तौर पर यदि वे बृहस्पतिवार को भी सदन में नहीं पहुंचे तो सत्ता पक्ष की संख्या घटकर 34 रह जाएगी। अगर, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायक भी आप के खिलाफ चले जाते हैं तो सरकार को खतरा है, लेकिन देखने वाली बात यह है कि कांग्रेसी विधायक आलाकमान की ही बात मानेंगे।
उधर, यदि निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन भाजपा के पाले में वोट करते हैं तो विपक्ष के वोट 33 तक पहुंच जाएंगे। ऐसे में यदि सत्ता पक्ष के दो और विधायक सदन की बैठक से अनुपस्थित हो जाते हैं तो सरकार सदन में हार सकती है।
कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने बुधवार को यह बयान दिया कि कांग्रेस तो आप की सरकार को समर्थन देने को तैयार है, लेकिन सत्ताधारी दल को अपने विधायकों की चिंता करनी चाहिए। वर्तमान सियासी माहौल में उनके इस बयान के गंभीर राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार कम वक्त होने की बात कहने से भी अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
Source- News in Hindi

Congress has no other way but to continue the support to Delhi government



Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत का यह बेहद यादगार लम्हा है। बृहस्पतिवार का दिन सूबे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार की किस्मत तय कर देगा। विपक्षी भाजपा चाहती है कि यह सरकार गिर जाए। खुद सत्ताधारी दल के हुक्मरानों को भी (आप के नेता बार-बार कांग्रेस पर आंखें तरेर रहे हैं) सरकार के गिर जाने की परवाह नहीं है। और कांग्रेस की बेबसी देखिए कि वह न चाहते हुए भी इस सरकार को एक प्रकार से अपने कंधों पर ढोने को विवश है। वह बिलकुल नहीं चाहती कि यह सरकार कम से कम इस वक्त गिरे। इस सरकार की जिंदगी वह अपने हिसाब से तय करना चाहती है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को रोजाना 666 लीटर मुफ्त पानी देने का फैसला कर दिया। उन्होंने बिजली की कीमत को आधा करने का वादा भी निभा दिया। निजी बिजली कंपनियों की नाक में नकेल डालने का काम करते हुए उन्होंने इनके खातों की कैग से जांच कराने का आदेश भी जारी कर दिया। राजनीतिक फायदे नुकसान की बात करें तो उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है। उनका यह अनुमान बिलकुल सही लगता है कि यदि अगले कुछ महीनों में दिल्ली विधानसभा के फिर से चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाएगा।
दूसरी ओर सत्ता से चार कदम पीछे रह गई भाजपा भी चुनाव चाहती है। यदि यह सरकार गिर जाती है तो सियासी दृष्टि से भाजपा के रणनीतिकारों का खुश होना लाजिमी है। पार्टी की सोच यह है कि यदि सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आई तो थोड़े दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के भी चुनाव होंगे और पार्टी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की लहर में दिल्ली का चुनाव भी जीत लेगी।
सियासी जानकारों की मानें तो एकमात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो कम से कम इस माहौल में चुनाव बिल्कुल नहीं चाहती। पार्टी के एक विधायक ने कहा कि इस वक्त हमने ऐसा क्या कर दिया है जिसे लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। जाहिर है कि 15 साल की अपनी सत्ता गंवा चुकी पार्टी को फिलहाल चुनाव भारी घाटे का सौदा समझ में आ रहा है। शायद यही वजह है कि वह किसी भी कीमत पर अगले कुछ महीनों तक इस लंगड़ी सरकार की बैसाखी बने रहना चाहती है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि जून-जुलाई की गर्मियों में पानी-बिजली को लेकर मचने वाला हाहाकार केजरीवाल की लोकप्रियता की हवा निकाल देगा और तब हवा कांग्रेस के पक्ष में बहने लगेगी। उस समय न मोदी की लहर का खतरा होगा और न ही केजरीवाल का जादू काम करेगा। अब देखना यह है कि बृहस्पतिवार को सदन में किसकी किस्मत बुलंद होती है।
Source- News in Hindi

Arvind kejriwal will take oath on 28 December



Hindi News: नई दिल्ली [जासं]। दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईमानदार अफसरों का आह्वान करते हुए कहा है कि वह आगे आएं और हमसे संपर्क करें। हमें ईमानदार लोगों की जरूरत है।
केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मेट्रो सेवा का विस्तार होना चाहिए। 'आप' की सरकार बनने के बाद इस काम में तेजी लाई जाएगी। एक सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस का कोई विधायक उनके संपर्क में नहीं है, बस मेरे विधायक ही मेरे संपर्क में हैं। दूसरी, तरफ आज दोपहर एक बजे केजरीवाल के घर पर आप नेताओं की बैठक होनी है, जिसमें विभागों के बंटवारे पर चर्चा की जाएगी।
वहीं, केजरीवाल मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल होने जा रहे मनीष सिसोदिया ने कहा है कि हम किसी के साथ मिलकर सरकार नहीं बना रहे हैं। हमारी अल्पमत सरकार होगी और हम जनता से पूछकर सरकार बनाने जा रहे हैं। एक सवाल के जवाब में सिसोदिया ने कहा कि तेज चलने वाले बिजली मीटरों की जांच होगी। इसके साथ ही कंपनियों के मुनाफे का ऑडिट कराया जाएगा ताकि बिजली का दाम 50 फीसद कम किए जा सके। पानी के मुद्दे पर सिसोदिया ने फिर स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों को 700 लीटर प्रतिदिन पानी खर्च करने के लिए कोई बिल नहीं देना पड़ेगा।
उधर, शपथ ग्रहण में अन्ना हजारे के आने पर सस्पेंस बरकरार है। अन्ना ने कहा कि मेरी सेहत अभी ठीक नहीं है। मैं केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने से खुश हूं। मेरा आशीर्वाद पहले भी था और आगे भी बना रहेगा। गौरतलब है कि केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए अन्ना हजारे, संतोष हेगड़े और किरण बेदी को निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा समारोह में हिस्सा लेने के लिए किसी व्यक्ति विशेष को पार्टी की ओर से न्योता नहीं भेजा जाएगा। इसमें हर आम आदमी आ सकता है।
गौरतलब है कि केजरीवाल शनिवार, 28 दिसंबर को रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। दोपहर 12 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उपराज्यपाल नजीब जंग केजरीवाल व उनके मंत्रिमंडल में शामिल छह मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। एक जनवरी को विधानसभा सत्र आहूत किया गया है और तीन को केजरीवाल सदन का विश्वास हासिल करेंगे।
इससे पहले, गाजियाबाद के कौशांबी स्थित पार्टी मुख्यालय में बुधवार को हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने मंत्री पद को लेकर पार्टी में किसी प्रकार के मतभेद से इन्कार किया। मंगलवार देर शाम आप विधायक विनोद कुमार बिन्नी की नाराजगी से पार्टी में चिंता पैदा हो गई थी। इसके बाद पूरी रात उनकी मान-मनुहार की गई, तब स्थिति सामान्य हुई और बिन्नी ने कहा, पार्टी जो कहेगी-वह करूंगा। केजरीवाल ने कहा कि आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया है। कांग्रेस का समर्थन 18 सूत्रीय एजेंडे पर है जो उसके पास पत्र की शक्ल में भेजा गया था। केजरीवाल ने संकेत दिया कि पदभार संभालने के फौरन बाद पार्टी के मुख्य वादों को पूरा करने के लिए घोषणाएं की जाएंगी। इन वादों में बिजली के बिलों में कटौती और निजी बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट कराने के निर्देश देना शामिल होगा।
सरकार बनाने के लिए जनमत संग्रह कराने के बाद सोमवार को केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने संस्तुति के लिए पत्र राष्ट्रपति को भेज दिया था। बुधवार सुबह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आप की ओर से सरकार बनाने के लिए दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता केजरीवाल दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री होंगे। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 28 सीटें जीतीं और वह आठ विधायकों वाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है। 70 सदस्यों वाली विधानसभा में 36 सदस्यों के समर्थन वाला यह सबसे बड़ा गठबंधन होगा। वैसे निर्दलीय विधायक शोएब इकबाल ने भी केजरीवाल सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की।
Source- News in Hindi

Digvijay singh critisizes Arvind Kejriwal



Hindi News: नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आम आदमी पार्टी [आप] के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना नरेंद्र मोदी से की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले केजरीवाल के बोल बड़े हैं और वे नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले दिग्गी ने केजरीवाल का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा था कि उन्हें यकीन है कि अरविंद अपने किए गए सभी वादे पूरे करेंगे। उन्होंने दिल्ली में सरकार बनाने के फैसले पर अरविंद को बधाई देते हुए कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि केजरीवाल दिल्ली की जनता से किए गए वादों को जरूर पूरा करेंगे।
कांग्रेस महासचिव ने अपने ट्विट में लिखा था कि अरविंद केजरीवाल को मिली सफलता चुनावी राजनीति में भाग लेने वाले राजनेताओं एवं राजनीतिक आलोचकों के लिए एक सीख है। लेकिन अब वे केजरीवाल के विरोध में जुट गए हैं।
Source- News in Hindi

Sonia is not only the mother of Rahul, says Khurshid



Delhi election 2013: नई दिल्ली। कांग्रेस में अब चापलूसी की सियासत चरम पर आ गई है। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हम जिसको अपना अध्यक्ष मानते हैं, पूरी तरह से उसके निर्णयों को स्वीकार करते हैं। हमारी पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी जो निर्णय लेती हैं, वह सर्वमान्य होता है। सलमान खुर्शीद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी सिर्फ राहुल गांधी की मां नहीं हैं, वे हमारी भी मां हैं और पूरे देश की मां हैं।
दरअसल यह बातचीत आम आदमी पार्टी को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश करने के बाद की है। अभी संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से देश में महंगाई बढ़ रही है और लोग कांग्रेस से मुंह मोड़ने लगे हैं।
Source- News in Hindi

President's rule likely in Delhi



Delhi election 2013: जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना लगातार प्रबल होती जा रही है। सबसे बड़े दल भाजपा और संख्या बल के लिहाज से दूसरे नंबर पर आई आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार बनाने से प्रत्यक्ष तौर पर इन्कार कर दिया है। आप ने तो दूसरे विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसका परिणाम यह होने जा रहा है कि नए चुने गए विधायक विधानसभा की सदस्यता की शपथ नहीं ले पाएंगे। उन्हें तनख्वाह व भत्ते तक नहीं मिलेंगे। इस बीच, दिल्ली की चौथी विधानसभा को भंग कर दिया गया है।
राजनिवास में हलचल तेज
दिल्ली के ताजा राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर गेंद अब उपराज्यपाल नजीब जंग के पाले में है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो उपराज्यपाल के निर्देश पर सोमवार को दिल्ली सरकार के कानून विभाग के उच्चाधिकारियों तथा दिल्ली विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है।
इसका लब्बोलुआब यह है कि जैसे ही दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव दिल्ली विधानसभा के लिए चुने गए विधायकों के नाम अधिसूचित करेंगे और संबंधित सूची उपराज्यपाल को सौंपेंगे, उसके बाद राजनिवास पांचवीं विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी कर देगा।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, पहले मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई जाती है और मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद उपराज्यपाल विधानसभा की बैठक बुलाते हैं। फिर अस्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होती है और वही अध्यक्ष सभी चुने गए विधायकों को शपथ दिलाते हैं।
सबसे बड़े दल को पहले मौका
कानूनी जानकारों की मानें तो उपराज्यपाल इस बात के लिए बाध्य नहीं हैं कि वे सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दें। अगर उन्हें ऐसा लगता है कि कोई भी दल स्थायी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है तो वह सीधे राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन अब तक परंपरा यही रही है कि सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया जाता है।
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि उपराज्यपाल पहले सबसे बड़े दल, उसके बाद दूसरे सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं। यदि ये दोनों दल सरकार बनाने से इन्कार कर दें, तब उनके सामने विधानसभा को फौरी तौर पर निलंबित अवस्था में रखकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का विकल्प खुला है।
मुश्किल है बहुमत जुटाना
दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन शर्मा कहते हैं कि दिल्ली की ताजा स्थिति दिलचस्प है। अब तक तो यही देखने में आया है कि राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए हर तरीके का प्रयास करते हैं। लेकिन यहां तो कोई सरकार बनाने को तैयार ही नहीं है। दोनों बड़े दल विपक्ष में बैठने की बात कर रहे हैं।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल जंग राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करने से पहले भाजपा व आप के नेताओं से जरूर बातचीत करेंगे और उसके बाद ही आगे कदम उठाएंगे। लेकिन जिस प्रकार भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन व आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार विपक्ष में बैठने की बातें कर रहे हैं, उसे देखते हुए इस बात की संभावना कम है कि नई सरकार आसानी से बन पाएगी।
भाजपा नहीं उठाएगी खतरा
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि कुछ महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 31 सदस्यों वाली भाजपा चार विधायकों की जुगाड़ के लिए कांग्रेस या आप को तोड़ने की कोशिश नहीं करेगी। इसका राजनीतिक गलत राजनीतिक संदेश जा सकता है। वहीं आप किसी भी स्थिति में कांग्रेस या भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार नहीं है, तो कांग्रेस भी बिना मांगे किसी को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं है।
Source- News in Hindi

28 faces of aam aadami party, who won in delhi



Delhi election: नई दिल्ली। जुमा-जुमा चार दिन पहले अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी को राजनीति के तपे खिलाड़ियों ने 'नौसिखुआ' कह कर खिल्ली उड़ाई थी। लेकिन आठ दिसंबर की सुबह ईवीएम खुलीं तो राजनीति के बड़े-बड़े सूरमा धूल चाटते नजर आए और पार्टी के अनाम से प्रत्याशी, जिन्हें चार आदमियों की भीड़ में भी उन्हें पहचान पाना मुश्किल होता था, शाम ढलते-ढलते नए सितारे बन चुके थे। दिल्ली विधानसभा के इन 28 नए सदस्यों का संक्षिप्त परिचय आप भी जान लीजिए:
संजीव झा, बुराड़ी:
स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त संजीव झा अपने साथियों के साथ पिछले 12 सालों से दिल्ली के पिछड़े इलाकों से आने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संजीव ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर नवपल्लव नाम से एक संस्था की शुरुआत की और लोगों को शिक्षित करने का काम शुरू किया। संजीव इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
हरीश खन्ना, तिमारपुर:
एमए, पीएचडी कर चुके हरीश समाज सेवा में विशेष रुचि होने के कारण लोगों की मदद करते रहे हैं। हरीश दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ चुनाव (डूटा) के चुनावों में आठ बार विजय हासिल कर चुके हैं और वर्तमान में इसके सचिव हैं। जनलोकपाल आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने वाले हरीश गरीबों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
राखी बिड़ला, मंगोलपुरी:
पत्रकारिता व जनसंचार में एमए की शिक्षा प्राप्त राखी एक निजी समाचार चैनल में पत्रकार हैं। राखी इसके अलावा कुछ सामाजिक संस्थाओं के साथ वाल्मीकि समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए भी काम करती हैं। वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखने वाली राखी के पिता लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, लेकिन जनलोकपाल आंदोलन के दौरान उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया।
राजेश गर्ग, रोहिणी:
अपनी साफ और स्वच्छ छवि के लिए जाने जाने वाले राजेश अंडर ग्रेजुएट हैं और सामाजिक आंदोलनों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। जनलोकपाल आंदोलन के दौरान भी उन्होंने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। समाज के कमजोर वर्ग के लिए काम करने की इच्छा ही उन्हें राजनीति में ले आई।
बंदना कुमारी, शालीमार बाग:
स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त बंदना गरीब महिलाओं के अधिकारों के लिए और उन्हें घरेलू अत्याचारों से बचाने के लिए संघर्ष करती रही हैं। बंदना नई पहल नामक एक सामाजिक संस्था की संयोजक भी हैं जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेहतर काम कर रही है। बंदना जनलोकपाल आंदोलन और उसके बाद हुए सामाजिक आंदोलनों में खासी सक्रिय रहीं।
सत्येंद्र कुमार जैन, शकूर बस्ती:
बैचलर ऑफ आर्किटेक्टचर की शिक्षा प्राप्त सत्येंद्र सीपीडब्ल्यूडी में कार्यरत थे लेकिन अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान सत्येंद्र ने नौकरी छोड़ दी और कंसल्टेंसी शुरू की। जनलोकपाल आंदोलन के दौरान बेहद सक्रिय रहे सत्येंद्र ने सामाजिक मुद्दों पर भी संघर्ष किया है। सत्येंद्र स्पर्श नामक संस्था से जु्ड़े हैं जो मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों के लिए काम करती हैं।
Source- News in Hindi

40 foot garland wall also waiting sheila's victory



Delhi election :पूर्वी दिल्ली। आम आदमी पार्टी को कम आंकना कांग्रेस के साथ ही बहुत लोगों को भारी पड़ गया। पिछले पंद्रह साल से दिल्ली की सत्ता पर काबिज शीला दीक्षित की वापसी की आस लगाए, गाजीपुर फूल मंडी के कारोबारियों को तब निराशा का सामना करना पड़ा जब शीला को नवोदित आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने भारी मतों से हरा दिया। दरअसल मंडी के कारोबारियों ने शीला दीक्षित के जीतने पर उपहार के तौर पर देने के लिए 40 फुट का हार तैयार करवाया था लेकिन दिल्ली में कांग्रेस की शर्मनाक हार के चलते कारोबारियों द्वारा बनवाया गया यह हार मंडी में ही पड़ा रह गया।
पिछले पंद्रह साल से लगातार दिल्ली में कांग्रेस को जीत मिलती रही ऐसे में फूल कारोबारियों को उम्मीद थी कि शीला एक बार फिर से दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर चुनी जाएंगी। लिहाजा उन्हें तोहफा देने के मकसद से फूल मंडी के कारोबारियों ने 40 फुट का हार तैयार करवाया गया था जो गुलाब, गुलदावदी और रजनीगंधा आदि फूलों से तैयार किया गया। करीब 25000 रुपये की लागत के इस हार को बनाने में दो दिन लगे और इसके लिए 12 मजदूरों ने काम किया। हालांकि दिल्ली विधान सभा चुनाव के नतीजे सामने आने पर प्रदेश में कांग्रेस की शर्मनाक हार से कारोबारियों को यह हार शीला दीक्षित को भेंट करने का मौका ही नहीं मिला और यह मंडी में ही पड़ा रह गया।
इतना ही नहीं, कारोबारियों को उम्मीद दी थी कि चुनाव जीतने पर कांग्रेस की ओर से उन्हें फूल और मालाओं के बड़े ऑर्डर मिलेंगे। लेकिन स्थिति इसे उलट निकली।
शीला दीक्षित ने पिछले 15 सालों में दिल्ली में अच्छा काम किया इसलिए हमें उम्मीद थी कि इस बार भी जीत उन्हीं की होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही वजह है कि कारोबारियों में थोड़ी निराशा है। ऐसे में हमने शीला जी के लिए जो तोहफा तैयार करवाया था वह दे नहीं पाए।
Source- News in Hindi

Who were in the convoy without her slippers



Hindi News: नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सीमापुरी सीट से जो धर्मेद्र सिंह चुनाव जीते हैं वह मात्र 27 साल के हैं। न नेता रहे हैं और न नेता हैं। राजनीति क्या होती है इसकी जानकारी नहीं है। मगर जनता ने उन्हें सिंहासन पर बैठा दिया है। नंद नगरी चुनाव मतगणना केंद्र पर इस बारे में पता किया गया कि सीमापुरी सीट से कौन जीत रहा है तो कई हट्टे कट्टे लोगों में बैठे एक लड़के की ओर लोगों ने इशारा किया जो हवाई चप्पल पहने बैठा था। आसपास वाले भी प्रत्याशी ही थे सो उन्हें गुस्सा भी आ रहा था। जिस तरीके से दूसरे लोगों ने बताया कि मुझे लगा कि यह प्रत्याशी नहीं किसी प्रत्याशी का पोलिंग एजेंट है। मैंने नजदीक जाकर पूछा कि धर्मेद्र कुमार कौन है तो जवाब मिला कि मैं ही हूं। फिर वह लड़का मतों के जोड़ घटाने में लग गया। हमने पारिवारिक पृष्ठभूमि पूछी तो पता चला कि धर्मेद्र कुमार आम आदमी पार्टी की वही कार्यकर्ता संतोष कोली के छोटे भाई हैं जिनकी कुछ माह पहले गाजियाबाद के वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उस मोटर साइकिल में टक्कर मार दी थी जिस पर वह बैठी थीं। उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार का नंद नगरी में जो काफिला निकला उसमें भी संतोष कोली मौजूद थी। यानी संतोष कोली की हंसते हुए की फोटो कार्यकर्ता हवा में लहरा रहे थे। जो ऐसा लग रहा था कि भाई की जीत पर खुश है। इस काफिला में अनेक ऐसे लोग भी थे जिनके पैर में चप्पल भी नहीं थी मगर जोश था अपने विधायक का स्वागत करने का जो अभी तक नेता भी नहीं बना है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार ने पूछने पर बताया गया है कि मुझे विधायक के तौर पर 80 हजार वेतन मिलेगा। मैं उसे अपने मां बाप को दे दूंगा और उनसे निवेदन करूंगा कि अब वे सिलाई का काम नहीं करें। मैं यही पैसा उनकी सेवा में लगा दूंगा। धर्मेद्र ने कहा कि मैं राजनीति नहीं जानता हूं। यह चुनाव मैं नहीं मेरी बहन संतोष कोली जीती हैं। लोगों ने उसे वोट दिया है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी बहन मेरे बीच है और मुझे आशीर्वाद दे रही है। मैं प्रयास करूंगा कि एक विधायक के रूप में मैं अपनी बहन के सपने को साकार करूं और इलाके के लोगों की सेवा करूं।

Aap leaders meet ends, soniya call meets home



Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता से गदगद आप नेताओं की ताजा बैठक खत्म हो गई। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के घर पर चल रही थी। बैठक समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम किसी पार्टी का न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। अगर दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। मनीष ने बताया कि इस मुद्दे पर आप के विधायक दलों की बैठक शाम को 5.30 बजे भी होगी।
यही नहीं, आप ने अरविंद केजरीवाल की पूर्व सहयोगी किरण बेदी का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। किरण बेदी ने सुझाव देते हुए कहा था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आप और भाजपा को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए, क्योंकि अगर दोबारा चुनाव होता है तो वह जनता के साथ अन्याय होगा। सुशासन 'आप' और भाजपा दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन आप ने किरण बेदी के इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 28 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खात में 32 सीटें आई और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें ही मिल सकी।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है। सोनिया गांधी ने यह बैठक विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई है। इस बैठक में आगे हार के कारणों पर चर्चा के अलावा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।
Source- News in Hindi

Aap leaders meet ends, soniya call meets home



Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता से गदगद आप नेताओं की ताजा बैठक खत्म हो गई। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के घर पर चल रही थी। बैठक समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम किसी पार्टी का न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। अगर दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।
मनीष ने बताया कि इस मुद्दे पर आप के विधायक दलों की बैठक शाम को 5.30 बजे भी होगी। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 28 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खात में 32 सीटें आई और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें ही मिल सकी।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है। सोनिया गांधी ने यह बैठक विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई है। इस बैठक में आगे हार के कारणों पर चर्चा के अलावा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।
Source- News in Hindi
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Delhi Assembly Election 2013: The prospect of President rule in Delhi



Delhi election 2013: नई दिल्ली [अजय पांडेय]। दिल्ली में अब किसकी हुकूमत कायम होगी? कांग्रेस का सफाया हो गया लेकिन अवाम ने न तो भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया और न ही आम आदमी पार्टी के पास सरकार बनाने लायक सीटें हैं। ऐसे में निगाहें अब राजनिवास पर टिक गई हैं। उपराज्यपाल नजीब जंग के फैसले पर बहुत कुछ निर्भर करता है। संविधान विशेषज्ञ वर्तमान परिस्थितियों में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना से भी इन्कार नहीं कर रहे। यदि ऐसी नौबत आई तो यह पहला मौका होगा जब केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर उपराज्यपाल सीधे दिल्ली के शासन की बागडोर संभालेंगे। कुछ समय के इंतजार के बाद भी सरकार गठन की सूरत नहीं बनी तो नए सिरे से भी चुनाव कराने पड़ सकते हैं।
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। सबसे बड़े दल के रूप में उभरे भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर कुल 32 सीटें जीती हैं। उसे बहुमत के लिए चार सीटों की दरकार है। आम आदमी पार्टी के पास 28 सीटें हैं, उसे बहुमत के लिए आठ सीटें चाहिए। आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस यदि आम आदमी पार्टी को समर्थन दे दे, तो अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में नई सरकार बन सकती है। वहीं केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में बैठेंगे। जाहिर तौर पर सरकार गठन को लेकर मामला उलझ गया है।
नई सरकार के गठन को लेकर पूछे जाने पर उपराज्यपाल कार्यालय के उच्चाधिकारियों ने बताया कि अभी तो उन्हें दिल्ली चुनाव कार्यालय द्वारा चुने गए विधायकों को लेकर अधिसूचना जारी किए जाने का इंतजार है। आधिकारिक तौर पर उसके बाद ही उपराज्यपाल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। दिल्ली चुनाव कार्यालय के मुताबिक दिल्ली की चुनाव प्रक्रिया 11 दिसंबर तक पूरी की जानी है।
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि परंपरा के अनुसार उपराज्यपाल को सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए। यदि पार्टी सरकार बनाने को तैयार होती है, तो उसे सदन में विश्वास मत हासिल करने का मौका दिया जाना चाहिए। यदि भाजपा सरकार बनाने से इन्कार करती है, तो दूसरे सबसे बड़े दल आम आदमी पार्टी को उपराज्यपाल सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं। कश्यप ने कहा कि उपराज्यपाल सदन को यह संदेश भी दे सकते हैं कि वह अपने नेता का चयन करे, लेकिन सदन का नेता तभी चुना जा सकता है जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हुआ तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर सकते हैं।
दिल्ली के सियासी जानकारों की मानें तो भाजपा के लिए बहुमत जुटाने के रास्ते में कई मुश्किलें हैं। वह एक निर्दलीय विधायक को तो अपने पाले में ला सकती है, लेकिन जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर जीते शोएब इकबाल शायद ही उसके साथ जाएं। इसी प्रकार कांग्रेस को तोड़े बगैर तीन विधायकों का जुगाड़ नहीं हो सकती। यह विकल्प भी कठिन है। यदि भाजपा आम आदमी पार्टी को तोड़ना चाहे तो उसे कम से कम 10 विधायक तोड़ने होंगे, क्योंकि दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी पर भी दल बदल विरोधी कानून लागू होगा।
Source- News in Hindi

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Delhi election 2013: नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भारी मतों से पराजित किया। वहीं भाजपा के मुख्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कृष्णानगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत हासिल की है। वहीं जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल पांचवीं बार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।
नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र-मतों से विजयी
ं1. अरविंद केजरीवाल-आप-नई दिल्ली-25864
2. डॉ. हर्षवर्धन-भाजपा-नई दिल्ली-43150
3. मनीष सिसोदिया-आप-पटपड़गंज-11476
4. हारुन यूसुफ- कांग्रेस-बल्लीमरान-8093
5. अरविंदर सिंह लवली-कांग्रेस-गांधीनगर-16961
6. जगदीश मुखी-भाजपा-जनकपुरी-2644
7. साहिब सिंह चौहान-भाजपा-घोंडा-11932
8. प्रवेश साहिब सिंह-भाजपा-महरौली-4564
9. शोएब इकबाल-जदयू-मटिया महल-2891
10. जय किशन-कांग्रेस-सुल्तानपुर माजरा-1112
हारने वाले दस बड़े दिग्गज :-
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ.योगानंद शास्त्री के साथ-साथ चार मंत्री भी चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के भाई तथा उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर आजाद सिंह भी चुनाव नहीं जीत सकें।
नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र- कितने मत से पराजित
1. शीला दीक्षित-कांग्रेस- नई दिल्ली-25864 (दूसरे स्थान पर)
2. डॉ. योगानंद शास्त्री-कांग्रेस- महरौली-15987 (तीसरे स्थान पर)
3. अशोक वालिया-कांग्रेस-लक्ष्मीनगर-7752 (दूसरे स्थान पर)
4. किरण वालिया-कांग्रेस-मालवीय नगर- 11758 (तीसरे स्थान पर)
5. रमाकांत गोस्वामी-कांग्रेस-राजेंद्र नगर- 14896 (तीसरे स्थान पर)
6. राजकुमार चौहान-कांग्रेस-मंगोलपुरी- 10585 (दूसरे स्थान पर)
7. चौधरी प्रेम सिंह-कांग्रेस-अंबेडकर नगर- 16486 (तीसरे स्थान पर)
8. हरशरण सिंह बल्ली-कांग्रेस-हरिनगर 15801 (तीसरे स्थान पर)
9. आजाद सिंह-भाजपा-मुंडका-7134 (दूसरे स्थान पर)
10. बरखा शुक्ला सिंह-कांग्रेस-आरके पुरम- 8338 (तीसरे स्थान पर)
राजनीतिज्ञ पुत्रों को करना पड़ा हार का सामना:-
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश साहिब सिंह (भाजपा) महरौली
विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। जबकि अन्य राजनीतिज्ञ पुत्रों को चुनावी समर में पराजय का सामना करना पड़ा है। राजौरी गार्डन के विधायक दयाचंद चंदीला की पत्नी धनवंती चंदीला भी चुनाव नहीं जीत सकीं।
उम्मीदवार-पार्टी-विधानसभा
क्षेत्र-राजनीतिज्ञ से रिश्ता-कितने मतों से हारें
1. अजय मल्होत्रा-भाजपा- ग्रेटर कैलाश- भाजपा नेता प्रोफेसर विजय मल्होत्रा के पुत्र- 13092 (दूसरे स्थान पर)
2. राजीव बब्बर-भाजपा- तिलक नगर-भाजपा नेता ओपी बब्बर के पुत्र- 2088 (दूसरे स्थान पर)
3. जगप्रवेश-कांग्रेस-संगम विहार-कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के पुत्र- 8416 (तीसरे स्थान पर)
4. विनय मिश्रा-कांग्रेस-पालम-कांग्रेस सांसद महाबल मिश्रा के पुत्र- 23302 (चौथे स्थान पर)
5. विपिन शर्मा-कांग्रेस-रोहतास नगर-कांग्रेस के पूर्व विधायक रामबाबू शर्मा के पुत्र- 17760 (तीसरे स्थान पर)
6. धनवती चंदीला-कांग्रेस-राजौरी गार्डन- कांग्रेस के विधायक दयाचंद चंदीला की पत्नी-11008 (दूसरे स्थान पर)
अधिकतम संपत्ति घोषित करने वाले तीन उम्मीदवारों की स्थिति :-
उम्मीदवार-कुल संपत्ति- विधानसभा क्षेत्र- स्थिति
1. मनजिंदर सिंह सिरसा (शिरोमणि अकाली दल)-235.51 करोड़- राजौरी गार्डन-11008 मतों से विजयी
2. सुशील गुप्ता (कांग्रेस)-164.44 करोड़-मोतीनगर-17206 मतों से पराजित(तीसरे स्थान पर)
3. अशोक कुमार जैन (कांग्रेस)-143.69 करोड़- दिल्ली कैंट-14136 मतों से पराजित (तीसरे स्थान पर)
न्यूनतम संपत्ति घोषित करने वाले तीनों मुख्य पार्टियों के उम्मीदवारों की स्थिति :-
1. खुशी राम चुनार (भाजपा)-8.27 लाख-अंबेडकर नगर-11670 मतों से पराजित (दूसरे स्थान पर)
2. रागिनी नायक (कांग्रेस)-31.10 लाख-जनकपुरी-25695 मतों से पराजित (तीसरे स्थान पर)
3. धर्मेद्र सिंह कोली (आप)-20,800-सीमापुरी-11976 मतों से विजयी
Source- News in Hindi

Political parties confuse from delhi poll survey



Hindi News: नई दिल्ली [अजय पांडेय]। कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। जबरदस्त मतदान के चलते दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के करीब बताई जा रही भाजपा और सत्ता से दूर होती बताई गईकांग्रेस के नेताओं की वही हालत है।
वर्ष 2008 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को जीत का पक्का भरोसा हो गया था और पार्टी नेताओं ने इसे सार्वजनिक करने से भी परहेज नहीं किया। लेकिन चुनाव परिणाम बिल्कुल उलट आए थे। लिहाजा, इस बार सूबे के भाजपा नेता जीत के दावे तो कर तो रहे हैं लेकिन अति उत्साह से बचने का पूरा प्रयास भी करते दिख रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेसी खेमा भी वर्ष 2008 के पिछले चुनाव का उदाहरण देता नहीं थक रहा।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिछले चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी की हार के दावे जोर-शोर से किए जा रहे थे लेकिन आखिरकार जनादेश उसी के पक्ष में आया। इसीलिए पार्टी ने जीत की उम्मीद अभी छोड़ी नहीं है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर उनके मंत्री तक यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि सत्ता उनके हाथ से खिसक सकती है। दिलचस्प यह है कि कांग्रेस और भाजपा के धुरंधरों को पसीना छुड़ाने वाली आम आदमी पार्टी के नेता भी नई सरकार के गठन को लेकर खुलकर कुछ बोलने के बदले पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
पहली बार चुनाव मैदान में उतरकर दिल्ली के पूरे चुनावी समीकरण को बदल देने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को लेकर चारों ओर कयास लगाए जा रहे हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इस चुनाव में हुए जोरदार मतदान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। उनके मुताबिक यदि यह सत्ता के खिलाफ मतदान है और लोगों ने कांग्रेस को हटाने के लिए एकमुश्त भाजपा के पक्ष में मतदान किया है, तो पार्टी को 40 से अधिक सीटें मिलना तय है। यदि ऐसा नहीं हुआ है और आम आदमी पार्टी के खाते में भी जोरदार मतदान हुआ है, तो यह देखना होगा कि इसका फायदा किसे मिलता है।
कहा यह भी जा रहा है कि इस चुनाव में सबसे ज्यादा वोट उत्तर-पूर्वी जिले में पड़े हैं। इस इलाके में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा संख्या में है। यदि ऐसे इलाकों में आम आदमी पार्टी को खूब वोट मिला, तो कांग्रेस को नुकसान होगा। यह भी हो सकता है कि यह जोरदार मतदान कांग्रेस के पक्ष में हुआ हो। चुनाव परिणाम का आकलन करने के लिए एग्जिट पोल करने वालों ने चाहे जो फार्मूला अख्तियार किया हो लेकिन शहर की सियासत के जानकारों की मानें, तो यह चुनाव एक ऐसी पहले है जिसे लेकर ठीक-ठीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल काम है।
Source- News in Hindi

Rajasthan assembly elections will decide future of some local leaders


Hindi News: जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के एक दर्जन नेता ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक भविष्य विधानसभा चुनावों के नतीजे तय करेंगे। इन नेताओं ने टिकट वितरण से लेकर चुनाव की पूरी रणनीति बनाने के सभी काम किए थे। कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या ज्यादा है, जबकि भाजपा में उससे थोड़ा कम है।
भाजपा में वसुंधरा राजे इनमें सबसे आगे हैं। प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होने के नाते इन्हीं के नेतृत्व में यहां विधानसभा चुनाव लड़ा गया। यह उनके नेतृत्व में तीसरा चुनाव था। पार्टी ने उन्हें 'फ्रीहैंड' दे रखा था। इस बार भाजपा सत्ता में आती है तो यह साफ हो जाएगा कि केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास किया, वह उस पर खरी उतरी हैं। पार्टी हारती है तो वे प्रदेश की राजनीति से दूर जा सकती हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भाजपा के ऐसे दूसरे नेता हैं जिनकी टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिसे चाहा, उसे पार्टी टिकट दिलवाया। अपने विरोधियों के टिकट भी कटवाए। ऐसे में यदि इनकी कृपा से टिकट पाए भाजपा उम्मीदवार चुनाव हारते हैं तो कटारिया इसके प्रभावों से बच नहीं सकेंगे। प्रदेश से राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव टिकट वितरण से लेकर हर कदम में भूमिका रही है। सुराज संकल्प यात्रा के बाद से वह पार्टी में महत्वपूर्ण हो गए हैं। पार्टी यहां सत्ता में आती है तो यादव का कद बढ़ेगा और हारती है तो काफी आलोचना झेलनी पड़ सकती है।
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन सचिव वी.सतीश और प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह का राजनीतिक कद भी चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगा। इन दोनों की भी चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका रही। दूसरी तरफ कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया। कांग्रेस के चुनाव जीतने की दशा में वह स्वभाविक रूप से तीसरी बार मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। कांग्रेस को यह जीत दिलाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उनका कद पार्टी के दूसरे कई नेताओं के मुकाबले ऊंचा हो जाएगा। लेकिन चुनाव हारने की दशा में उन्हें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी कांग्रेस के ऐसे दूसरे प्रभावी नेता हैं जिनका टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार अभियान में खासा दखल रहा। गहलोत के साथ उन्हें भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शुमार माना जा रहा है। जाहिर है चुनाव नतीजों का इनकी सियासत पर भी खासा प्रभाव पड़ेगा। प्रदेश के संगठनात्मक प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव गुरुदास कामत को चुनावी वर्ष में प्रभार मिला। कम समय में संगठन पर अच्छी पकड़ बनाई। टिकट वितरण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। जीत की स्थिति में बड़ा श्रेय भी मिलेगा, हारने पर उतनी जिम्मेदारी उठानी होगी।
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PM says he is taking Modi very seriously



Top Hindi News: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को चुनौती मानते हुए कहा कि वह उन्हें गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं उन लोगों में से हूं, जो विरोधियों को गंभीरता से लेता हूं। हमारे पास ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं है।'
एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि राजनीतिक दल के रूप में हम विपक्ष की शक्ति को कम करके नहीं आंक सकते। उनसे यह पूछा गया था कि मोदी को लेकर दो कैबिनेट मंत्रियों के विचार अलग-अलग हैं, एक मोदी को गंभीरता से लेने की बात करता है जबकि दूसरा खारिज करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं उन लोगों से हूं जो अपने विरोधियों को अत्यधिक गंभीरता से लेता हूं। ढिलाई के लिए हमारे पास कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों का परिणाम चाहे जो हों, कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरेगी।
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Modi protest against anti communal violence bill


narendra modi

Top Hindi News: नई दिल्ली। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल का विरोध किया है। इस बाबत उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर इस पर व्यापक विचार-विमर्श का अनुरोध किया है।
मोदी ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में कहा है कि सांप्रदायिक हिंसा बिल को गलत इरादे से तैयार किया गया है। इसके मसौदे में बहुत-सी खामियां हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति और राजनीतिक विचारधारा काम कर रही है। मोदी ने बिल को लाने के समय पर भी संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस बिल को लाना संघीय ढांचे का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे कानून बनाना राज्यों की सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि जो कानून राज्यों में लागू होगा, उसे राज्य द्वारा नहीं बनाया जाना चाहिए? मोदी ने कहा कि इस बिल को संसद में लाने से पहले तमाम राज्य सरकारों, राजनीतिक पार्टियों, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा बिल को लागू करने से समाज के टुकड़े होंगे और हिंसा बढ़ेगी।
उधर, केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने मोदी पर बिल को लेकर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि बृहस्पतिवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है और इस बिल को सरकार सत्र में लाना चाहती है।
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assembly election

Hindi News: नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विधानसभा चुनावों के नतीजे भले ही रविवार को घोषित होंगे, लेकिन सटोरियों ने पहले ही चारों बड़े राज्यों में कमल खिला दिया है। सटोरियों का मानना है कि दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। केवल छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस और भाजपा में कड़ी टक्कर है, लेकिन वहां भी पंजे पर कमल भारी है।
सटोरियों के अनुसार, भाजपा दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस से सत्ता छीनने के लिए तैयार है।
दिल्ली की 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 37 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। वहीं, 24 सीटों के साथ कांग्रेस का चौथी बार सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो जाएगा। यही नहीं, 50 सीटें पाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी विधानसभा में खाता जरूर खोल लेगी, लेकिन उसकी सीटों की संख्या छह से आगे नहीं बढ़ पाएगी।
वहीं, 200 विधानसभा सीटों वाले राजस्थान के सीधे मुकाबले में भाजपा 120 सीटों के साथ सत्ता में वापसी करने जा रही है और कांग्रेस को 57 सीटों से ही संतोष करना होगा।
सटोरियों का अनुमान है कि दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने वाली भाजपा छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सरकार बचाने में सफल हो रही है।
230 सीट वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा 132 सीटों के साथ सबसे आगे है। वहीं कांग्रेस की सीटों में इजाफा जरूर होगा, लेकिन वह 81 तक जाकर सिमट जाएगा। केवल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस भाजपा को टक्कर दे रही है, जहां उसे 90 सीट वाली विधानसभा में 42 सीटें मिलेगी। जाहिर है कि वह बहुमत से तीन सीट पीछे रह जाएगी, जबकि भाजपा 47 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है।
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Rahul Gandhi attack on Akhilesh in Aligarh Rally


Rahul Gandhi

राहुल ने अखिलेश को कोसा, अपनी पीठ जमकर थपथपाई -

नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अलीगढ़ की रैली में उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी पर एक तरफ जमकर निशाना साधा तो दूसरी तरफ अपनी पीठ भी खूब थपथपाई। राहुल ने कहा, 'अखिलेश यादव ने वादे किए, लेकिन पूरे नहीं किए।' दूसरी तरफ उन्होंने भूमि अधिग्रहण और भोजन गारंटी बिल के लिए अपनी पार्टी की पीठ थपथपाई।
हैरत की बात ये कि 14 मिनट के चुनावी भाषण में न मोदी का नाम उनकी जुबां पर आया, न भाजपा का। वे किसानों, अल्पसंख्यकों और युवाओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करते रहे कि सिर्फ कांग्रेस ही उनका भला कर सकती है। राहुल ने कहा, भूमि अधिग्रहण बिल में विपक्ष ने अड़ंगा डालने की कोशिश की, लेकिन उनकी सरकार ने आखिरकार इस बिल को पास कराकर ही दम लिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि अलीगढ़ के किसानों को भूमि अधिग्रहण बिल से जितना फायदा होगा, उतना देश में कहीं नहीं होगा। यह बात अलग है कि उन्होंने इसकी वजह नहीं बताई।
राहुल के भाषण के बीच माइक भी गड़बड़ हुआ तो उन्होंने माइक ठीक करने की गुजारिश की। वे बकवास अध्यादेश वाले किस्से का जिक्र करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा, 'गुजरात में एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि आपने अध्यादेश वाली बात सही समय पर नहीं कहा। मैंने पूछा कि मैंने सच कहा था या नहीं? पत्रकार ने कहा-हां।' राहुल ने कहा कि सच बोलने का भी कोई समय होता है?
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