Hindi News: नई दिल्ली [अजय पांडेय]। कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। जबरदस्त मतदान के चलते दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के करीब बताई जा रही भाजपा और सत्ता से दूर होती बताई गईकांग्रेस के नेताओं की वही हालत है।
वर्ष 2008 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को जीत का पक्का भरोसा हो गया था और पार्टी नेताओं ने इसे सार्वजनिक करने से भी परहेज नहीं किया। लेकिन चुनाव परिणाम बिल्कुल उलट आए थे। लिहाजा, इस बार सूबे के भाजपा नेता जीत के दावे तो कर तो रहे हैं लेकिन अति उत्साह से बचने का पूरा प्रयास भी करते दिख रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेसी खेमा भी वर्ष 2008 के पिछले चुनाव का उदाहरण देता नहीं थक रहा।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिछले चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी की हार के दावे जोर-शोर से किए जा रहे थे लेकिन आखिरकार जनादेश उसी के पक्ष में आया। इसीलिए पार्टी ने जीत की उम्मीद अभी छोड़ी नहीं है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर उनके मंत्री तक यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि सत्ता उनके हाथ से खिसक सकती है। दिलचस्प यह है कि कांग्रेस और भाजपा के धुरंधरों को पसीना छुड़ाने वाली आम आदमी पार्टी के नेता भी नई सरकार के गठन को लेकर खुलकर कुछ बोलने के बदले पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
पहली बार चुनाव मैदान में उतरकर दिल्ली के पूरे चुनावी समीकरण को बदल देने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को लेकर चारों ओर कयास लगाए जा रहे हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इस चुनाव में हुए जोरदार मतदान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। उनके मुताबिक यदि यह सत्ता के खिलाफ मतदान है और लोगों ने कांग्रेस को हटाने के लिए एकमुश्त भाजपा के पक्ष में मतदान किया है, तो पार्टी को 40 से अधिक सीटें मिलना तय है। यदि ऐसा नहीं हुआ है और आम आदमी पार्टी के खाते में भी जोरदार मतदान हुआ है, तो यह देखना होगा कि इसका फायदा किसे मिलता है।
कहा यह भी जा रहा है कि इस चुनाव में सबसे ज्यादा वोट उत्तर-पूर्वी जिले में पड़े हैं। इस इलाके में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा संख्या में है। यदि ऐसे इलाकों में आम आदमी पार्टी को खूब वोट मिला, तो कांग्रेस को नुकसान होगा। यह भी हो सकता है कि यह जोरदार मतदान कांग्रेस के पक्ष में हुआ हो। चुनाव परिणाम का आकलन करने के लिए एग्जिट पोल करने वालों ने चाहे जो फार्मूला अख्तियार किया हो लेकिन शहर की सियासत के जानकारों की मानें, तो यह चुनाव एक ऐसी पहले है जिसे लेकर ठीक-ठीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल काम है।
Source- News in Hindi
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