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Kejriwal government will face vote of confidence in Delhi Assembly



Hindi Newsनई दिल्ली। दिल्ली में सरकार बनाकर नया इतिहास रचने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार को बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है। कांग्रेस ने एक बार फिर दोहराया है कि वह 'आप' सरकार के समर्थन में वोट देगी। अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है कि सरकार सदन में अपना बहुमत साबित कर देगी। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी ने स्पीकर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। भाजपा अपने सभी 31 विधायकों विश्वास मत के खिलाफ वोट करने के लिए व्हिप जारी किया है।
सूत्रों ने बताया कि 'आप' के विधायक मनीष सिसोदिया आज दोपहर दो बजे सदन में विश्वास प्रस्ताव रखेंगे और इस पर चर्चा के बाद वोटिंग कराई जाएगी। चर्चा में 'आप' के आठ विधायक भाग लेंगे।
उधर, केजरीवाल द्वारा यह कहे जाने पर कि उनके पास वक्त कम बचा है, के अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उन्हें कहीं न कहीं विधानसभा में सरकार की हार का खतरा भी महसूस हो रहा है। आखिर केजरीवाल को इस बात का डर क्यों है, आइए जानते हैं सदन के आंकड़ों के लिहाज से इसका जवाब :-
सदन के आंकड़े
अगर सदन के गणित की बात करें तो अकाली दल के साथ भाजपा के 32 विधायक हैं। इधर आप के 28 विधायक हैं और कांग्रेस के 8 विधायक सरकार को समर्थन कर रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल ने भी आप को समर्थन दिया है। इस प्रकार सदन में सरकार के पक्ष में 37 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 36 विधायकों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस के एक विधायक मतीन अहमद को प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया है। इसके बावजूद सरकार के पक्ष में 36 मत पड़ने चाहिए। यदि ऐसा ही होता है तो सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन कांग्रेस के जयकिशन और आप के दिनेश मोहनिया बुधवार को शपथ लेने सदन में नहीं पहुंचे। जाहिर तौर पर यदि वे बृहस्पतिवार को भी सदन में नहीं पहुंचे तो सत्ता पक्ष की संख्या घटकर 34 रह जाएगी। अगर, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायक भी आप के खिलाफ चले जाते हैं तो सरकार को खतरा है, लेकिन देखने वाली बात यह है कि कांग्रेसी विधायक आलाकमान की ही बात मानेंगे।
उधर, यदि निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन भाजपा के पाले में वोट करते हैं तो विपक्ष के वोट 33 तक पहुंच जाएंगे। ऐसे में यदि सत्ता पक्ष के दो और विधायक सदन की बैठक से अनुपस्थित हो जाते हैं तो सरकार सदन में हार सकती है।
कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने बुधवार को यह बयान दिया कि कांग्रेस तो आप की सरकार को समर्थन देने को तैयार है, लेकिन सत्ताधारी दल को अपने विधायकों की चिंता करनी चाहिए। वर्तमान सियासी माहौल में उनके इस बयान के गंभीर राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार कम वक्त होने की बात कहने से भी अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
Source- News in Hindi

Congress has no other way but to continue the support to Delhi government



Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत का यह बेहद यादगार लम्हा है। बृहस्पतिवार का दिन सूबे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार की किस्मत तय कर देगा। विपक्षी भाजपा चाहती है कि यह सरकार गिर जाए। खुद सत्ताधारी दल के हुक्मरानों को भी (आप के नेता बार-बार कांग्रेस पर आंखें तरेर रहे हैं) सरकार के गिर जाने की परवाह नहीं है। और कांग्रेस की बेबसी देखिए कि वह न चाहते हुए भी इस सरकार को एक प्रकार से अपने कंधों पर ढोने को विवश है। वह बिलकुल नहीं चाहती कि यह सरकार कम से कम इस वक्त गिरे। इस सरकार की जिंदगी वह अपने हिसाब से तय करना चाहती है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को रोजाना 666 लीटर मुफ्त पानी देने का फैसला कर दिया। उन्होंने बिजली की कीमत को आधा करने का वादा भी निभा दिया। निजी बिजली कंपनियों की नाक में नकेल डालने का काम करते हुए उन्होंने इनके खातों की कैग से जांच कराने का आदेश भी जारी कर दिया। राजनीतिक फायदे नुकसान की बात करें तो उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है। उनका यह अनुमान बिलकुल सही लगता है कि यदि अगले कुछ महीनों में दिल्ली विधानसभा के फिर से चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाएगा।
दूसरी ओर सत्ता से चार कदम पीछे रह गई भाजपा भी चुनाव चाहती है। यदि यह सरकार गिर जाती है तो सियासी दृष्टि से भाजपा के रणनीतिकारों का खुश होना लाजिमी है। पार्टी की सोच यह है कि यदि सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आई तो थोड़े दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के भी चुनाव होंगे और पार्टी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की लहर में दिल्ली का चुनाव भी जीत लेगी।
सियासी जानकारों की मानें तो एकमात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो कम से कम इस माहौल में चुनाव बिल्कुल नहीं चाहती। पार्टी के एक विधायक ने कहा कि इस वक्त हमने ऐसा क्या कर दिया है जिसे लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। जाहिर है कि 15 साल की अपनी सत्ता गंवा चुकी पार्टी को फिलहाल चुनाव भारी घाटे का सौदा समझ में आ रहा है। शायद यही वजह है कि वह किसी भी कीमत पर अगले कुछ महीनों तक इस लंगड़ी सरकार की बैसाखी बने रहना चाहती है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि जून-जुलाई की गर्मियों में पानी-बिजली को लेकर मचने वाला हाहाकार केजरीवाल की लोकप्रियता की हवा निकाल देगा और तब हवा कांग्रेस के पक्ष में बहने लगेगी। उस समय न मोदी की लहर का खतरा होगा और न ही केजरीवाल का जादू काम करेगा। अब देखना यह है कि बृहस्पतिवार को सदन में किसकी किस्मत बुलंद होती है।
Source- News in Hindi

Arvind kejriwal will take oath on 28 December



Hindi Newsनई दिल्ली [जासं]। दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईमानदार अफसरों का आह्वान करते हुए कहा है कि वह आगे आएं और हमसे संपर्क करें। हमें ईमानदार लोगों की जरूरत है।
केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मेट्रो सेवा का विस्तार होना चाहिए। 'आप' की सरकार बनने के बाद इस काम में तेजी लाई जाएगी। एक सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस का कोई विधायक उनके संपर्क में नहीं है, बस मेरे विधायक ही मेरे संपर्क में हैं। दूसरी, तरफ आज दोपहर एक बजे केजरीवाल के घर पर आप नेताओं की बैठक होनी है, जिसमें विभागों के बंटवारे पर चर्चा की जाएगी।
वहीं, केजरीवाल मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल होने जा रहे मनीष सिसोदिया ने कहा है कि हम किसी के साथ मिलकर सरकार नहीं बना रहे हैं। हमारी अल्पमत सरकार होगी और हम जनता से पूछकर सरकार बनाने जा रहे हैं। एक सवाल के जवाब में सिसोदिया ने कहा कि तेज चलने वाले बिजली मीटरों की जांच होगी। इसके साथ ही कंपनियों के मुनाफे का ऑडिट कराया जाएगा ताकि बिजली का दाम 50 फीसद कम किए जा सके। पानी के मुद्दे पर सिसोदिया ने फिर स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों को 700 लीटर प्रतिदिन पानी खर्च करने के लिए कोई बिल नहीं देना पड़ेगा।
उधर, शपथ ग्रहण में अन्ना हजारे के आने पर सस्पेंस बरकरार है। अन्ना ने कहा कि मेरी सेहत अभी ठीक नहीं है। मैं केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने से खुश हूं। मेरा आशीर्वाद पहले भी था और आगे भी बना रहेगा। गौरतलब है कि केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए अन्ना हजारे, संतोष हेगड़े और किरण बेदी को निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा समारोह में हिस्सा लेने के लिए किसी व्यक्ति विशेष को पार्टी की ओर से न्योता नहीं भेजा जाएगा। इसमें हर आम आदमी आ सकता है।
गौरतलब है कि केजरीवाल शनिवार, 28 दिसंबर को रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। दोपहर 12 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उपराज्यपाल नजीब जंग केजरीवाल व उनके मंत्रिमंडल में शामिल छह मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। एक जनवरी को विधानसभा सत्र आहूत किया गया है और तीन को केजरीवाल सदन का विश्वास हासिल करेंगे।
इससे पहले, गाजियाबाद के कौशांबी स्थित पार्टी मुख्यालय में बुधवार को हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने मंत्री पद को लेकर पार्टी में किसी प्रकार के मतभेद से इन्कार किया। मंगलवार देर शाम आप विधायक विनोद कुमार बिन्नी की नाराजगी से पार्टी में चिंता पैदा हो गई थी। इसके बाद पूरी रात उनकी मान-मनुहार की गई, तब स्थिति सामान्य हुई और बिन्नी ने कहा, पार्टी जो कहेगी-वह करूंगा। केजरीवाल ने कहा कि आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया है। कांग्रेस का समर्थन 18 सूत्रीय एजेंडे पर है जो उसके पास पत्र की शक्ल में भेजा गया था। केजरीवाल ने संकेत दिया कि पदभार संभालने के फौरन बाद पार्टी के मुख्य वादों को पूरा करने के लिए घोषणाएं की जाएंगी। इन वादों में बिजली के बिलों में कटौती और निजी बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट कराने के निर्देश देना शामिल होगा।
सरकार बनाने के लिए जनमत संग्रह कराने के बाद सोमवार को केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने संस्तुति के लिए पत्र राष्ट्रपति को भेज दिया था। बुधवार सुबह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आप की ओर से सरकार बनाने के लिए दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता केजरीवाल दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री होंगे। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 28 सीटें जीतीं और वह आठ विधायकों वाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है। 70 सदस्यों वाली विधानसभा में 36 सदस्यों के समर्थन वाला यह सबसे बड़ा गठबंधन होगा। वैसे निर्दलीय विधायक शोएब इकबाल ने भी केजरीवाल सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की।
Source- News in Hindi

Delhi: Kejriwal says BJP, Cong should form govt



Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने और पार्टियों का एक-दूसरे को समर्थन न देने की स्थिति के बाद दिल्ली में नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता कायम है। वहीं, भाजपा और 'आप' एक-दूसरे को इस हालात के लिए जिम्मेदार भी ठहरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। इसबीच गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उपराज्यपाल फैसला करने से पहले नई सरकार गठन के लिए सारे विकल्पों को तलाशेंगे।
वास्तविक स्थिति
दरअसल नई सरकार की गठन में आ रही अड़चन और इसके पीछे जो राजनीति दिखाई दे रही है वह यह कि विधानसभा परिणाम के बाद दोनों बड़ी पार्टियां भाजपा और 'आप' एक-दूसरे को इस हालात का जिम्मेदार तो ठहरा ही रहे हैं। साथ ही भाजपा 'आप' को सरकार न चलाने का अनुभव होने की बात कह रही है तो वहीं 'आप' भाजपा को कांग्रेस की तरह ही मान कर समर्थन देने से बच रही है। जबकि कांग्रेस हालात पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। दोनों पार्टी इस बात को लेकर आश्वस्त है कि यदि ऐसे हालात में नई सरकार का गठन नहीं होता है तो आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही फिर से दिल्ली विधानसभा का चुनाव हो ताकि वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार का बना सकें।
भाजपा के दिल्ली में पार्टी प्रभारी नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे पास संख्या नहीं है। हम किसी विधायक को खरीदना नहीं चाहते हैं।' हर्षवर्धन ने कहा कि अगर गतिरोध जारी रहा तो भाजपा नये सिरे से चुनाव में जाने को तरजीह दे सकती है। उधर, अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे और अगर हालात बने तो चुनाव का सामना करना पसंद करेंगे। जहां भाजपा और आप दोनों ने कहा कि वे न तो किसी को समर्थन देंगे और न ही किसी से समर्थन लेंगे। वहीं, निवर्तमान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केजरीवाल के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी न तो किसी से समर्थन लेगी और न ही किसी को समर्थन देगी।
भाजपा की रणनीति
वहीं, भाजपा ने अपनी रणनीति में यह साफ कर दिया है कि वे जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं करेंगे। पार्टी हाईकमानों के अनुसार कांग्रेस इस समय नजरें गड़ाए बैठी है। अगर भाजपा कुछ भी इस तरह की हरकत करती है तो वे भाजपा पर निशाना साधेगी। हां, ये भी साफ कर दिया गया है कि अगर कोई विधायक अपने मन से भाजपा को समर्थन करने आएंगे तो इसमें उन्हें कोई ऐतराज नहीं होगा।
आप की मजबूरी
दूसरी तरफ अगर, आप पर विचार किया जाए तो उनके पास सत्ता चलाने का कोई अनुभव नहीं है। विपक्ष में बैठना और सत्ता चलाना, दोनों बहुत-बहुत अलग है। आप के लिए विरोध करना आसान काम है, जबकि सत्ता चलाना फिलहाल मुश्किल, क्योंकि उसके पास अनुभव की कमी है। ऐसे में भाजपा यह चाहेगी कि आप बाहरी समर्थन ही सही, लेकिन कांग्रेस का साथ लेकर आप सत्ता संभाले, जिससे जनता को उनकी असली ताकत का पता चल सके।
किसे मिलेगा फायदा
अगर दिल्ली में विधानसभा चुनाव दोबारा होता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ही होगी। ऐसे में पूरा समीकरण ही दूसरा रहेगा। आप के लिए दोबारा चुनाव जीतना कतई आसान नहीं होगा। हां, इतना जरूर है कि आप को इस बात का भरोसा है कि उन्हें कुछ अन्य मध्यवर्गीय वोटर ग्रुप जरूर वोट डालेंगे, लेकिन भाजपा के पास भी यह हथियार है कि वे वोटर से यह बात कहकर पूरा समर्थन मांग सकते हैं कि हम मजबूत पार्टी हैं और अगर आपने पहले ही पूरा समर्थन दिया होता तो ऐसी नौबत नहीं आती। हमने सरकार इसलिए नहीं बनाया, क्योंकि हम जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं करना चाहते।
Source- News in Hindi

BJP rejects AAP leader Prashant Bhushan view



Delhi election 2013: नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी [आप] के संयोजक और विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अच्छे लोग अगर अपनी पार्टी छोड़कर आएं तो हम उनका स्वागत करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पार्टी की राय है कि हम न तो किसी का समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। वहीं, उन्होंने प्रशांत भूषण के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह उनका निजी बयान है। इससे पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। गौरतलब है कि प्रशांत भूषण ने भाजपा को समर्थन की पेशकश की बात कही थी।
इससे पूर्व आप के नेता प्रशांत भूषण अपने दिए गए बयान से पलट गए। भाजपा को समर्थन की पेशकश वाले बयान पर अब उनका कहना है कि मेरे बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि हम न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी पार्टी को समर्थन देंगे। इसके पूर्व उन्होंने भाजपा को समर्थन की पेशकश की थी, जिसे पहले उनके ही दल ने और फिर भाजपा ने खारिज कर दिया था। मामला बढ़ता देख प्रशांत भूषण ने भी पलटी मारना ही उचित समझा।
हर्षवर्धन बने विधायक दल के नेताउधर, दूसरी तरफ आज भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधानसभा के लिए डॉ हर्षवर्धन को विधायक दल का नेता चुन लिया है। बैठक में सभी विधायकों सहित पार्टी के नेता विजय गोयल और दिल्ली के प्रभारी नितिन गडकरी भी मौजूद थे।
इससे पहले प्रशांत भूषण के बयान से पल्ला झाड़ते हुए आप ने भी सफाई देते हुए कहा कि उससे उनका कोई लेना देना नहीं है। आप ने उस बयान को प्रशांत भूषण का निजी बयान बताकर खारिज कर दिया। आप ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम है। वह न किसी से समर्थन लेगी न ही देगी।
वहीं, भाजपा भी अपने रुख पर कायम है। दिल्ली में भाजपा के प्रस्तावित सीएम डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि जिस बाबत प्रशांत भूषण ने बयान दिया है वह पहले से ही उनकी पार्टी के एजेंडे में है। लिहाजा वह भूषण के बयान पर कोई विचार करने के मूड में नहीं हैं।
हर्षवर्धन ने कहा कि भाजपा ने शुरू से ही दिल्ली को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने, जनलोकपाल और लोकायुक्त जैसे संवेदनशील मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल किया हुआ है लिहाजा इस पर किसी के कहने से दोबारा विचार नहीं किया जा सकता है। भूषण ने 29 दिसंबर तक जनलोकपाल बिल को पास करवाने की बात दोहराई थी।
दूसरी ओर शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा है कि प्रशांत भूषण की राय से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि पहले आप भाजपा को समर्थन देकर सरकार बनवाए। इसके बाद राज्य में काम-काज को सुचारू तरीके से होने दे। उन्होंने साफ कहा कि शर्तो के आधार पर काम नहीं किया जा सकता है।
Source- News in Hindi

B Town celebrates 'AAP' victory

राजनीति में 'आप' की धमाकेदार एंट्री से बॉलीवुड में जगी उम्मीद


Hindi Newsमुंबई। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। न्यूकमर 'आप' ने सालों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस का अपनी झाड़ू से सफाया कर दिया है। जहां एक तरफ चारों ओर आम जनता अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं आप के पास बधाइयों का तांता लग रहा है। दिग्गज नेताओं के साथ-साथ दिल्ली में केजरीवाल की धमाकेदार एंट्री से बॉलीवुड में खुशी और उम्मीद की लहर फैल गई है। बॉलीवुड ने भी केजरीवाल को उनकी जीत और आने वाली चुनौतियों के लिए जमकर शुभकामनाएं दी हैं।
बॉलीवुड सेलेब्रिटिज के ट्वीट :
-अनुष्का शर्मा ने लिखा कि एक आदमी से क्या बदल सकता है, सारी जिंदगी इसी बात को मानते आए हैं, लेकिन एक इन्सान पूरा सिस्टम बदल सकता है। केजरीवाल ने साबित कर दिया। 'आप' इस नाम में ही एक जादू है, क्रिएटिविटी है, इसके साथ विजन है। जो इतिहास बना सकता है।
-अनुपम खेर ने लिखा कि 'आप' को मुबारकबाद। किरण बेदी, अन्ना हजारे सबकी मुहिम काम कर गई। सबको ढेर सारी शुभकामनाएं।
-दीया मिर्जा ने लिखा कि सबने उन्हें दुत्कार दिया था, लेकिन इन लोगों ने कर दिखाया। अपने आने वाले सफर के लिए तैयार रहिए।
-सोफी चौधरी ने लिखा कि मुबारक हो दिल्ली। दिल्ली के लिए ऐतिहासिक दिन जीत का दिन। 'आप' ने एक मिसाल कायम की है। ये सच में कुछ बदल सकते हैं।
-म्यूजिक कम्पोजर विशाल डडलानी ने लिखा कि 'आप' का प्रदर्शन जबरदस्त था। काश मैं दिल्ली में इस वक्त होता तो साथ में खुशी मनाता। 'आप' ने एक अच्छी शुरुआत की है। मेरा देश जाग रहा है, दिल्ली जाग रही है। अब आप का वक्त आ गया है।
-मधुर भंडारकर ने लिखा कि कभी कभी किसी फिल्म में बड़े स्टार नहीं होते हैं, लेकिन फिल्म का प्रोमो इतना जबरदस्त होता है कि मजा आ जाता है। ठीक उसी तरह 'आप' की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही हुई है। राजनीति में नई इतिहास की दस्तक हो चुकी है। क्या पता कब बाद में आप भी हिट हो जाए।

Anna attacks Kejriwal again


Top Hindi Newsनई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। पुराने सहयोगी अरविंद केजरीवाल के अनुभवों को देख अन्ना हजारे अब अपनी कोर टीम बनाने में बहुत संयम बरत रहे हैं। अपने पहले ही चुनाव में केजरीवाल भले ही दिल्ली में प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हों, पुराने चेले को लेकर अन्ना की खटास और शंकाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं।
अगले हफ्ते से महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगण सिद्धि में शुरू हो रहे आमरण अनशन का एलान करने के लिए अन्ना बृहस्पतिवार को राजधानी में थे। उन्होंने कहा कि लोकपाल विधेयक पारित करने को लेकर प्रधानमंत्री और संसद के वादे झूठे साबित हुए हैं। इसलिए वे आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हुए हैं। सरकारी लोकपाल पर विचार करने के लिए उनकी टीम जरूर बैठ कर विचार करेगी। लेकिन, उन्होंने माना कि इसके लिए उन्होंने कोई कोर कमेटी नहीं बनाई है। उन्होंने कहा, 'इस बार टीम अन्ना जल्दबाजी में नहीं बनाऊंगा।'
किरण बेदी समेत पहले के अन्य सहयोगियों को लेकर कोर कमेटी बनाने के अपने प्रस्ताव के बारे में उन्होंने कहा कि पहली बैठक में ही खींचतान शुरू हो गई थी, इसलिए कोर कमेटी का गठन नहीं किया। अन्ना अब अपना आंदोलन जनतंत्र मोर्चा के नाम से चलाएंगे। लेकिन, इसमें अपने अलावा अन्य प्रमुख लोगों के बारे में वे कुछ नहीं बता सके।
अन्ना बार-बार यह तो कहते रहे कि वे अरविंद के बारे में बोलकर अनावश्यक विवाद नहीं खड़ा करना चाहते। लेकिन, यह कहने से भी नहीं बचे कि 'अन्ना एसएमएस कार्ड' को लेकर अरविंद ने उनकी इजाजत नहीं ली थी। उन्होंने कहा, इस कार्ड का नाम अरविंद को अपने नाम पर रखना चाहिए था।
अक्सर साथ दिखने वाले पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह भी अन्ना की इस प्रेस कांफ्रेंस में नहीं थे। जनरल सिंह के नरेंद्र मोदी के साथ जनसभा को संबोधित करने के बारे में पूछे जाने पर अन्ना ने कहा कि इस बारे में उन्होंने जनरल से बात की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे भाजपा के साथ नहीं जाएंगे।
Source- News in Hindi

Delhi police recovered alcohol in last night


Delhi election

Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव से एक दिन पूर्व राजधानी में अलग-अलग जगहों से पुलिस ने भारी मात्र में शराब की खेप पकड़ी है। नबी करीम व सराय रोहिल्ला में जहां 3600 बोतलें शराब पकड़ी गई। वहीं बदरपुर में भी पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर सेंट्रो कार व विक्रम ऑटो में रखे 50 कार्टून शराब बरामद की है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी हुई है कि चुनाव से पहले यह खेप किस मकसद से लाई गई थी। गिरफ्तार आरोपियों के नाम लक्ष्मण, राजू और जुलाद्दीन हैं।
पुलिस के मुताबिक, सोमवार देर शाम सराय रोहिल्ला थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दयाबस्ती में एक घर पर छापा मारकर छत से भारी मात्र में शराब की बोतलें बरामद की। शराब की बोतलें बोरे व बक्से में रखी हुई थी। इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। वहीं सराय रोहिल्ला में भी जखीरा पुल के समीप एक मकान पर छापेमारी कर पुलिस ने भारी मात्रा में शराब बरामद की।
तीसरे मामले में नबी करीम थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक फैक्ट्री से भारी संख्या में अच्छे ब्रांड की 1000 बोतलें बरामद की। इस मामले में पुलिस ने विजय कुमार, फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार किया है। वह एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ बताया जाता है। उधर, बदरपुर थाना पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान ओखला टैंक रेलवे लाइन के पास से सेंट्रो कार में रखे 25 कार्टून शराब बरामद की।
Source- News in Hindi 
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AAP claims to win 38-50 seats in Delhi elections


delhi election

Hindi News:जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुल मतों में से 35.6 फीसद मत मिलने का दावा किया है। नवंबर में पार्टी द्वारा दो चरणों में कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है।
सर्वे में आप के बाद भाजपा के खाते में 26.6 व कांग्रेस को 25.8 फीसद मत मिलने की बात कही गई है।
आप व सिसरो एसोसिएट्स द्वारा कराए गए सर्वे के नतीजे को लेकर पार्टी नेता व चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में उतरने के फैसले के बाद जनाधार टटोलने के लिए पार्टी ने फरवरी में पहला सर्वे कराया था।
उस दौरान अगर चुनाव होता तो आप के खाते में 8.4 फीसद मत आते। लेकिन नवंबर में दो चरणों में कराए गए पांचवे सर्वे में पार्टी की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। पहला चरण का सर्वे 35 विधानसभा सीटों से 3,247 लोगों के बीच कराया गया। जबकि 30 नवंबर को दूसरे चरण के सर्वे में 17 विधानसभा सीटों के लिए एक दिन में 1,643 लोगों के बीच सर्वे किया गया। साथ ही, सर्वे की सैंपलिंग रेंडम की गई।
दूसरे ओपिनियन पोल से पार्टी के सर्वे की तुलना करते हुए योगेंद्र यादव ने माना कि नई पार्टी के मजबूती से उभरने पर पारंपरिक ओपिनियन पोल सटीक नहीं होते। हर चरण की तरह इस बार भी सर्वे की सारी डिटेल व रॉ डाटा वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 1983 में आंध्र प्रदेश व 1987 में हरियाणा के चुनाव इस तरह की राजनीति के गवाह रहे हैं। इसमें तेलगू देशम व इंडियन नेशनल लोकदल ने चुनाव पूर्व के सारे आकलनों को झुठला दिया था। उन्होंने कहा कि इस बार दिल्ली में भी इसी तरह की साइलेंट वेब चल रही है। इससे पहली चीज यह होने जा रही है कि रिकार्ड तोड़ मतदान होगा। वहीं, चुनाव बाद आने वाले एक्जिट पोल के आंकड़े व ओपिनियन पोल में काफी फर्क होगा।
Source- News in Hindi 
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