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BJP try to finally invite Yeddyurappa in party



Hindi Newsनई दिल्ली [जाब्यू]। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा की भाजपा में वापसी का आधार और तर्क पूरी तरह तैयार हो गया है। केंद्रीय नेतृत्व में भी सहमति बन गई है। जनवरी के पहले पखवाड़े में कभी भी इसकी घोषणा हो सकती है।
दिल्ली में 'आप' के उदय और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर छिड़ी बहस के बीच येद्दयुरप्पा के मुद्दे पर लगा ब्रेक अब खत्म हो गया है। यह जरूर है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस फैसले में राज्य इकाई को ही आगे रखना चाहता है। लिहाजा इसकी पूरी संभावना है कि राजनीतिक रूप से पार्टी के लिए अहम इस मौके पर केंद्रीय नेतृत्व शायद वहां मौजूद न हो। हां, फैसले के बचाव का आधार तैयार है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले बैठी भाजपा का तर्क है कि येद्दयुरप्पा किसी संवैधानिक पद तो दूर पार्टी में भी किसी अहम पद के दावेदार नहीं हैं। येद्दयुरप्पा सिर्फ पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उनके खिलाफ जांच चल रही है। इतिहास का हवाला देते हुए यह भी याद दिलाने की कोशिश होगी कि भ्रष्टाचार का आरोप लगते ही पार्टी के नेता संवैधानिक पदों से इस्तीफा देते रहे हैं। खुद लालकृष्ण आडवाणी ने भी हवाला मामले में ऐसा ही किया था। वीरभद्र को भी मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की जा रही है। वह कांग्रेस में रहे या न रहें, इसपर भाजपा ने कोई सवाल नहीं उठाया है।
लिहाजा येद्दयुरप्पा के मसले पर किसी को कुछ बोलने का नैतिक हक नहीं है। इसी तर्क पर लालकृष्ण आडवाणी को भी समझाने का प्रयास हुआ। ध्यान रहे कि आडवाणी के दबाव पर ही उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। बाद में येद्दयुरप्पा ने खुद ही पार्टी छोड़ दी थी। अब वह इसी शर्त पर वापसी कर रहे हैं कि उन्हें कोई पद नहीं मिलेगा। लिहाजा औपचारिक घोषणा का रास्ता साफ हो गया है।
Source- News in Hindi




Kejriwal government will face vote of confidence in Delhi Assembly



Hindi Newsनई दिल्ली। दिल्ली में सरकार बनाकर नया इतिहास रचने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार को बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है। कांग्रेस ने एक बार फिर दोहराया है कि वह 'आप' सरकार के समर्थन में वोट देगी। अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है कि सरकार सदन में अपना बहुमत साबित कर देगी। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी ने स्पीकर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। भाजपा अपने सभी 31 विधायकों विश्वास मत के खिलाफ वोट करने के लिए व्हिप जारी किया है।
सूत्रों ने बताया कि 'आप' के विधायक मनीष सिसोदिया आज दोपहर दो बजे सदन में विश्वास प्रस्ताव रखेंगे और इस पर चर्चा के बाद वोटिंग कराई जाएगी। चर्चा में 'आप' के आठ विधायक भाग लेंगे।
उधर, केजरीवाल द्वारा यह कहे जाने पर कि उनके पास वक्त कम बचा है, के अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उन्हें कहीं न कहीं विधानसभा में सरकार की हार का खतरा भी महसूस हो रहा है। आखिर केजरीवाल को इस बात का डर क्यों है, आइए जानते हैं सदन के आंकड़ों के लिहाज से इसका जवाब :-
सदन के आंकड़े
अगर सदन के गणित की बात करें तो अकाली दल के साथ भाजपा के 32 विधायक हैं। इधर आप के 28 विधायक हैं और कांग्रेस के 8 विधायक सरकार को समर्थन कर रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल ने भी आप को समर्थन दिया है। इस प्रकार सदन में सरकार के पक्ष में 37 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 36 विधायकों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस के एक विधायक मतीन अहमद को प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया है। इसके बावजूद सरकार के पक्ष में 36 मत पड़ने चाहिए। यदि ऐसा ही होता है तो सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन कांग्रेस के जयकिशन और आप के दिनेश मोहनिया बुधवार को शपथ लेने सदन में नहीं पहुंचे। जाहिर तौर पर यदि वे बृहस्पतिवार को भी सदन में नहीं पहुंचे तो सत्ता पक्ष की संख्या घटकर 34 रह जाएगी। अगर, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायक भी आप के खिलाफ चले जाते हैं तो सरकार को खतरा है, लेकिन देखने वाली बात यह है कि कांग्रेसी विधायक आलाकमान की ही बात मानेंगे।
उधर, यदि निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन भाजपा के पाले में वोट करते हैं तो विपक्ष के वोट 33 तक पहुंच जाएंगे। ऐसे में यदि सत्ता पक्ष के दो और विधायक सदन की बैठक से अनुपस्थित हो जाते हैं तो सरकार सदन में हार सकती है।
कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने बुधवार को यह बयान दिया कि कांग्रेस तो आप की सरकार को समर्थन देने को तैयार है, लेकिन सत्ताधारी दल को अपने विधायकों की चिंता करनी चाहिए। वर्तमान सियासी माहौल में उनके इस बयान के गंभीर राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार कम वक्त होने की बात कहने से भी अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
Source- News in Hindi

Congress has no other way but to continue the support to Delhi government



Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत का यह बेहद यादगार लम्हा है। बृहस्पतिवार का दिन सूबे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार की किस्मत तय कर देगा। विपक्षी भाजपा चाहती है कि यह सरकार गिर जाए। खुद सत्ताधारी दल के हुक्मरानों को भी (आप के नेता बार-बार कांग्रेस पर आंखें तरेर रहे हैं) सरकार के गिर जाने की परवाह नहीं है। और कांग्रेस की बेबसी देखिए कि वह न चाहते हुए भी इस सरकार को एक प्रकार से अपने कंधों पर ढोने को विवश है। वह बिलकुल नहीं चाहती कि यह सरकार कम से कम इस वक्त गिरे। इस सरकार की जिंदगी वह अपने हिसाब से तय करना चाहती है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को रोजाना 666 लीटर मुफ्त पानी देने का फैसला कर दिया। उन्होंने बिजली की कीमत को आधा करने का वादा भी निभा दिया। निजी बिजली कंपनियों की नाक में नकेल डालने का काम करते हुए उन्होंने इनके खातों की कैग से जांच कराने का आदेश भी जारी कर दिया। राजनीतिक फायदे नुकसान की बात करें तो उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है। उनका यह अनुमान बिलकुल सही लगता है कि यदि अगले कुछ महीनों में दिल्ली विधानसभा के फिर से चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाएगा।
दूसरी ओर सत्ता से चार कदम पीछे रह गई भाजपा भी चुनाव चाहती है। यदि यह सरकार गिर जाती है तो सियासी दृष्टि से भाजपा के रणनीतिकारों का खुश होना लाजिमी है। पार्टी की सोच यह है कि यदि सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आई तो थोड़े दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के भी चुनाव होंगे और पार्टी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की लहर में दिल्ली का चुनाव भी जीत लेगी।
सियासी जानकारों की मानें तो एकमात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो कम से कम इस माहौल में चुनाव बिल्कुल नहीं चाहती। पार्टी के एक विधायक ने कहा कि इस वक्त हमने ऐसा क्या कर दिया है जिसे लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। जाहिर है कि 15 साल की अपनी सत्ता गंवा चुकी पार्टी को फिलहाल चुनाव भारी घाटे का सौदा समझ में आ रहा है। शायद यही वजह है कि वह किसी भी कीमत पर अगले कुछ महीनों तक इस लंगड़ी सरकार की बैसाखी बने रहना चाहती है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि जून-जुलाई की गर्मियों में पानी-बिजली को लेकर मचने वाला हाहाकार केजरीवाल की लोकप्रियता की हवा निकाल देगा और तब हवा कांग्रेस के पक्ष में बहने लगेगी। उस समय न मोदी की लहर का खतरा होगा और न ही केजरीवाल का जादू काम करेगा। अब देखना यह है कि बृहस्पतिवार को सदन में किसकी किस्मत बुलंद होती है।
Source- News in Hindi

Vijendra Gupta gets threat calls from AAP supporters



Hindi Newsनई दिल्ली [जासं]। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को आइएसडी नंबरों से धमकी दी गई है। भाजपा नेता ने इस संबंध में तुगलक रोड थाने में शिकायत दी है। इसके बाद थाना पुलिस व स्पेशल ब्रांच आइएसडी नंबरों की जांच कर रही है।
नई दिल्ली जिले के डीसीपी एसबीएस त्यागी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अभी तक इस संबंध में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। शिकायत में विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि वह मंगलवार शाम को कुछ साथियों के साथ तीस जनवरी मार्ग पर खड़े थे तभी उनके पास आइएसडी नंबर से आए फोन पर किसी ने कहा कि वह आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ क्यों बोलते हैं। वह तुरंत कोई भी विरोधाभासी बयान देना बंद कर दें अन्यथा वह उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर मारेंगे। फोन कटने पर इस व्यक्ति ने तीन मिनट के अंदर दूसरे नंबर से दोबारा फोन कर धमकी देना शुरू कर दिया। फोन करने वाले व्यक्ति ने कहा कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे तो जनवरी में वह उनका हिसाब करेगा।
इसके बाद तीसरे नंबर से फोन आने पर उन्होंने फोन काट दिया। एक बार फिर किसी अन्य नंबर से फोन आने पर उन्होंने इसे रिसीव नहीं किया तब पांचवी बार इस व्यक्ति ने एसएमएस भेजकर कहा कि उन्होंने डर कर फोन क्यों बंद कर लिया। वे फोन क्यों नहीं उठा रहे हैं। इस पर उन्होंने वहीं से पीसीआर को इस संबंध में सूचित कर दिया था। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष नरेश सोलंकी वहां पहुंच गए। उन्होंने थाने जाकर पुलिस को पांचों आइएसडी नंबर व एसएमएस दिखाए। विजेंद्र गुप्ता के अनुसार, फोन करने वाला हिंदी में बोल रहा था।
Source- News in Hindi

Arvind kejriwal will take oath on 28 December



Hindi Newsनई दिल्ली [जासं]। दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईमानदार अफसरों का आह्वान करते हुए कहा है कि वह आगे आएं और हमसे संपर्क करें। हमें ईमानदार लोगों की जरूरत है।
केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मेट्रो सेवा का विस्तार होना चाहिए। 'आप' की सरकार बनने के बाद इस काम में तेजी लाई जाएगी। एक सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस का कोई विधायक उनके संपर्क में नहीं है, बस मेरे विधायक ही मेरे संपर्क में हैं। दूसरी, तरफ आज दोपहर एक बजे केजरीवाल के घर पर आप नेताओं की बैठक होनी है, जिसमें विभागों के बंटवारे पर चर्चा की जाएगी।
वहीं, केजरीवाल मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल होने जा रहे मनीष सिसोदिया ने कहा है कि हम किसी के साथ मिलकर सरकार नहीं बना रहे हैं। हमारी अल्पमत सरकार होगी और हम जनता से पूछकर सरकार बनाने जा रहे हैं। एक सवाल के जवाब में सिसोदिया ने कहा कि तेज चलने वाले बिजली मीटरों की जांच होगी। इसके साथ ही कंपनियों के मुनाफे का ऑडिट कराया जाएगा ताकि बिजली का दाम 50 फीसद कम किए जा सके। पानी के मुद्दे पर सिसोदिया ने फिर स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों को 700 लीटर प्रतिदिन पानी खर्च करने के लिए कोई बिल नहीं देना पड़ेगा।
उधर, शपथ ग्रहण में अन्ना हजारे के आने पर सस्पेंस बरकरार है। अन्ना ने कहा कि मेरी सेहत अभी ठीक नहीं है। मैं केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने से खुश हूं। मेरा आशीर्वाद पहले भी था और आगे भी बना रहेगा। गौरतलब है कि केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए अन्ना हजारे, संतोष हेगड़े और किरण बेदी को निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा समारोह में हिस्सा लेने के लिए किसी व्यक्ति विशेष को पार्टी की ओर से न्योता नहीं भेजा जाएगा। इसमें हर आम आदमी आ सकता है।
गौरतलब है कि केजरीवाल शनिवार, 28 दिसंबर को रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। दोपहर 12 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उपराज्यपाल नजीब जंग केजरीवाल व उनके मंत्रिमंडल में शामिल छह मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। एक जनवरी को विधानसभा सत्र आहूत किया गया है और तीन को केजरीवाल सदन का विश्वास हासिल करेंगे।
इससे पहले, गाजियाबाद के कौशांबी स्थित पार्टी मुख्यालय में बुधवार को हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने मंत्री पद को लेकर पार्टी में किसी प्रकार के मतभेद से इन्कार किया। मंगलवार देर शाम आप विधायक विनोद कुमार बिन्नी की नाराजगी से पार्टी में चिंता पैदा हो गई थी। इसके बाद पूरी रात उनकी मान-मनुहार की गई, तब स्थिति सामान्य हुई और बिन्नी ने कहा, पार्टी जो कहेगी-वह करूंगा। केजरीवाल ने कहा कि आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया है। कांग्रेस का समर्थन 18 सूत्रीय एजेंडे पर है जो उसके पास पत्र की शक्ल में भेजा गया था। केजरीवाल ने संकेत दिया कि पदभार संभालने के फौरन बाद पार्टी के मुख्य वादों को पूरा करने के लिए घोषणाएं की जाएंगी। इन वादों में बिजली के बिलों में कटौती और निजी बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट कराने के निर्देश देना शामिल होगा।
सरकार बनाने के लिए जनमत संग्रह कराने के बाद सोमवार को केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने संस्तुति के लिए पत्र राष्ट्रपति को भेज दिया था। बुधवार सुबह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आप की ओर से सरकार बनाने के लिए दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता केजरीवाल दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री होंगे। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 28 सीटें जीतीं और वह आठ विधायकों वाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है। 70 सदस्यों वाली विधानसभा में 36 सदस्यों के समर्थन वाला यह सबसे बड़ा गठबंधन होगा। वैसे निर्दलीय विधायक शोएब इकबाल ने भी केजरीवाल सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की।
Source- News in Hindi

AAP will form the delhi government


 

Hindi Newsनई दिल्ली। कई दिनों की उठापठक के बाद आम आदमी पार्टी में सरकार बनाने के स्वर उठते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा है कि आज दो बजे पार्टी की अहम बैठक होगी, जिसमें पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहेंगे और उनके सामने हम अपनी स्थिति और कांग्रेस के समर्थन की चिट्ठी को रखकर विचार करेंगे। जानकारी के मुताबिक पार्टी के कई नेता इस पक्ष में हैं कि कांग्रेस से मिले समर्थन के बाद आप को आगे बढ़कर दिल्ली में सरकार बना लेनी चाहिए। उम्मीद है कि इसकी आधिकारिक घोषणा आज ही कर दी जाए। ऐसे में दिल्ली से सियासी संकट का पटाक्षेप होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
दरअसल कांग्रेस द्वारा उसकी मांगों को मान लेने के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब पीछे हटने का कोई चारा नहीं रह गया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह केजरीवाल द्वारा उसे लिखी चिट्ठी में शामिल मुद्दों का समर्थन करने को तैयार है। इसके बाद भी यदि आप सरकार बनाने से पीछे हटती है तो यह आने वाले दिनों में उसके लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।
गौरतलब है कि चुनाव के बाद सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा ने बहुमत न होने की सूरत में सरकार बनाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद ही उप-राज्यपाल ने आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी आप को अपने समर्थन की घोषणा करते हुए एक पत्र उपराज्यपाल को भेज दिया था।
इसके जवाब में केजरीवाल ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही पत्र लिखकर समर्थन की वजह और 18 मुद्दों पर उनके विचार मांगे थे।
Source- News in Hindi
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Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने और पार्टियों का एक-दूसरे को समर्थन न देने की स्थिति के बाद दिल्ली में नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता कायम है। वहीं, भाजपा और 'आप' एक-दूसरे को इस हालात के लिए जिम्मेदार भी ठहरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। इसबीच गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उपराज्यपाल फैसला करने से पहले नई सरकार गठन के लिए सारे विकल्पों को तलाशेंगे।
वास्तविक स्थिति
दरअसल नई सरकार की गठन में आ रही अड़चन और इसके पीछे जो राजनीति दिखाई दे रही है वह यह कि विधानसभा परिणाम के बाद दोनों बड़ी पार्टियां भाजपा और 'आप' एक-दूसरे को इस हालात का जिम्मेदार तो ठहरा ही रहे हैं। साथ ही भाजपा 'आप' को सरकार न चलाने का अनुभव होने की बात कह रही है तो वहीं 'आप' भाजपा को कांग्रेस की तरह ही मान कर समर्थन देने से बच रही है। जबकि कांग्रेस हालात पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। दोनों पार्टी इस बात को लेकर आश्वस्त है कि यदि ऐसे हालात में नई सरकार का गठन नहीं होता है तो आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही फिर से दिल्ली विधानसभा का चुनाव हो ताकि वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार का बना सकें।
भाजपा के दिल्ली में पार्टी प्रभारी नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे पास संख्या नहीं है। हम किसी विधायक को खरीदना नहीं चाहते हैं।' हर्षवर्धन ने कहा कि अगर गतिरोध जारी रहा तो भाजपा नये सिरे से चुनाव में जाने को तरजीह दे सकती है। उधर, अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे और अगर हालात बने तो चुनाव का सामना करना पसंद करेंगे। जहां भाजपा और आप दोनों ने कहा कि वे न तो किसी को समर्थन देंगे और न ही किसी से समर्थन लेंगे। वहीं, निवर्तमान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केजरीवाल के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी न तो किसी से समर्थन लेगी और न ही किसी को समर्थन देगी।
भाजपा की रणनीति
वहीं, भाजपा ने अपनी रणनीति में यह साफ कर दिया है कि वे जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं करेंगे। पार्टी हाईकमानों के अनुसार कांग्रेस इस समय नजरें गड़ाए बैठी है। अगर भाजपा कुछ भी इस तरह की हरकत करती है तो वे भाजपा पर निशाना साधेगी। हां, ये भी साफ कर दिया गया है कि अगर कोई विधायक अपने मन से भाजपा को समर्थन करने आएंगे तो इसमें उन्हें कोई ऐतराज नहीं होगा।
आप की मजबूरी
दूसरी तरफ अगर, आप पर विचार किया जाए तो उनके पास सत्ता चलाने का कोई अनुभव नहीं है। विपक्ष में बैठना और सत्ता चलाना, दोनों बहुत-बहुत अलग है। आप के लिए विरोध करना आसान काम है, जबकि सत्ता चलाना फिलहाल मुश्किल, क्योंकि उसके पास अनुभव की कमी है। ऐसे में भाजपा यह चाहेगी कि आप बाहरी समर्थन ही सही, लेकिन कांग्रेस का साथ लेकर आप सत्ता संभाले, जिससे जनता को उनकी असली ताकत का पता चल सके।
किसे मिलेगा फायदा
अगर दिल्ली में विधानसभा चुनाव दोबारा होता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ही होगी। ऐसे में पूरा समीकरण ही दूसरा रहेगा। आप के लिए दोबारा चुनाव जीतना कतई आसान नहीं होगा। हां, इतना जरूर है कि आप को इस बात का भरोसा है कि उन्हें कुछ अन्य मध्यवर्गीय वोटर ग्रुप जरूर वोट डालेंगे, लेकिन भाजपा के पास भी यह हथियार है कि वे वोटर से यह बात कहकर पूरा समर्थन मांग सकते हैं कि हम मजबूत पार्टी हैं और अगर आपने पहले ही पूरा समर्थन दिया होता तो ऐसी नौबत नहीं आती। हमने सरकार इसलिए नहीं बनाया, क्योंकि हम जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं करना चाहते।
Source- News in Hindi

President's rule likely in Delhi



Delhi election 2013: जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना लगातार प्रबल होती जा रही है। सबसे बड़े दल भाजपा और संख्या बल के लिहाज से दूसरे नंबर पर आई आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार बनाने से प्रत्यक्ष तौर पर इन्कार कर दिया है। आप ने तो दूसरे विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसका परिणाम यह होने जा रहा है कि नए चुने गए विधायक विधानसभा की सदस्यता की शपथ नहीं ले पाएंगे। उन्हें तनख्वाह व भत्ते तक नहीं मिलेंगे। इस बीच, दिल्ली की चौथी विधानसभा को भंग कर दिया गया है।
राजनिवास में हलचल तेज
दिल्ली के ताजा राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर गेंद अब उपराज्यपाल नजीब जंग के पाले में है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो उपराज्यपाल के निर्देश पर सोमवार को दिल्ली सरकार के कानून विभाग के उच्चाधिकारियों तथा दिल्ली विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है।
इसका लब्बोलुआब यह है कि जैसे ही दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव दिल्ली विधानसभा के लिए चुने गए विधायकों के नाम अधिसूचित करेंगे और संबंधित सूची उपराज्यपाल को सौंपेंगे, उसके बाद राजनिवास पांचवीं विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी कर देगा।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, पहले मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई जाती है और मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद उपराज्यपाल विधानसभा की बैठक बुलाते हैं। फिर अस्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होती है और वही अध्यक्ष सभी चुने गए विधायकों को शपथ दिलाते हैं।
सबसे बड़े दल को पहले मौका
कानूनी जानकारों की मानें तो उपराज्यपाल इस बात के लिए बाध्य नहीं हैं कि वे सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दें। अगर उन्हें ऐसा लगता है कि कोई भी दल स्थायी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है तो वह सीधे राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन अब तक परंपरा यही रही है कि सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया जाता है।
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि उपराज्यपाल पहले सबसे बड़े दल, उसके बाद दूसरे सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं। यदि ये दोनों दल सरकार बनाने से इन्कार कर दें, तब उनके सामने विधानसभा को फौरी तौर पर निलंबित अवस्था में रखकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का विकल्प खुला है।
मुश्किल है बहुमत जुटाना
दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन शर्मा कहते हैं कि दिल्ली की ताजा स्थिति दिलचस्प है। अब तक तो यही देखने में आया है कि राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए हर तरीके का प्रयास करते हैं। लेकिन यहां तो कोई सरकार बनाने को तैयार ही नहीं है। दोनों बड़े दल विपक्ष में बैठने की बात कर रहे हैं।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल जंग राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करने से पहले भाजपा व आप के नेताओं से जरूर बातचीत करेंगे और उसके बाद ही आगे कदम उठाएंगे। लेकिन जिस प्रकार भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन व आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार विपक्ष में बैठने की बातें कर रहे हैं, उसे देखते हुए इस बात की संभावना कम है कि नई सरकार आसानी से बन पाएगी।
भाजपा नहीं उठाएगी खतरा
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि कुछ महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 31 सदस्यों वाली भाजपा चार विधायकों की जुगाड़ के लिए कांग्रेस या आप को तोड़ने की कोशिश नहीं करेगी। इसका राजनीतिक गलत राजनीतिक संदेश जा सकता है। वहीं आप किसी भी स्थिति में कांग्रेस या भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार नहीं है, तो कांग्रेस भी बिना मांगे किसी को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं है।
Source- News in Hindi

BJP rejects AAP leader Prashant Bhushan view



Delhi election 2013: नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी [आप] के संयोजक और विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अच्छे लोग अगर अपनी पार्टी छोड़कर आएं तो हम उनका स्वागत करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पार्टी की राय है कि हम न तो किसी का समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। वहीं, उन्होंने प्रशांत भूषण के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह उनका निजी बयान है। इससे पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। गौरतलब है कि प्रशांत भूषण ने भाजपा को समर्थन की पेशकश की बात कही थी।
इससे पूर्व आप के नेता प्रशांत भूषण अपने दिए गए बयान से पलट गए। भाजपा को समर्थन की पेशकश वाले बयान पर अब उनका कहना है कि मेरे बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि हम न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी पार्टी को समर्थन देंगे। इसके पूर्व उन्होंने भाजपा को समर्थन की पेशकश की थी, जिसे पहले उनके ही दल ने और फिर भाजपा ने खारिज कर दिया था। मामला बढ़ता देख प्रशांत भूषण ने भी पलटी मारना ही उचित समझा।
हर्षवर्धन बने विधायक दल के नेताउधर, दूसरी तरफ आज भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधानसभा के लिए डॉ हर्षवर्धन को विधायक दल का नेता चुन लिया है। बैठक में सभी विधायकों सहित पार्टी के नेता विजय गोयल और दिल्ली के प्रभारी नितिन गडकरी भी मौजूद थे।
इससे पहले प्रशांत भूषण के बयान से पल्ला झाड़ते हुए आप ने भी सफाई देते हुए कहा कि उससे उनका कोई लेना देना नहीं है। आप ने उस बयान को प्रशांत भूषण का निजी बयान बताकर खारिज कर दिया। आप ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम है। वह न किसी से समर्थन लेगी न ही देगी।
वहीं, भाजपा भी अपने रुख पर कायम है। दिल्ली में भाजपा के प्रस्तावित सीएम डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि जिस बाबत प्रशांत भूषण ने बयान दिया है वह पहले से ही उनकी पार्टी के एजेंडे में है। लिहाजा वह भूषण के बयान पर कोई विचार करने के मूड में नहीं हैं।
हर्षवर्धन ने कहा कि भाजपा ने शुरू से ही दिल्ली को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने, जनलोकपाल और लोकायुक्त जैसे संवेदनशील मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल किया हुआ है लिहाजा इस पर किसी के कहने से दोबारा विचार नहीं किया जा सकता है। भूषण ने 29 दिसंबर तक जनलोकपाल बिल को पास करवाने की बात दोहराई थी।
दूसरी ओर शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा है कि प्रशांत भूषण की राय से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि पहले आप भाजपा को समर्थन देकर सरकार बनवाए। इसके बाद राज्य में काम-काज को सुचारू तरीके से होने दे। उन्होंने साफ कहा कि शर्तो के आधार पर काम नहीं किया जा सकता है।
Source- News in Hindi

28 faces of aam aadami party, who won in delhi



Delhi election: नई दिल्ली। जुमा-जुमा चार दिन पहले अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी को राजनीति के तपे खिलाड़ियों ने 'नौसिखुआ' कह कर खिल्ली उड़ाई थी। लेकिन आठ दिसंबर की सुबह ईवीएम खुलीं तो राजनीति के बड़े-बड़े सूरमा धूल चाटते नजर आए और पार्टी के अनाम से प्रत्याशी, जिन्हें चार आदमियों की भीड़ में भी उन्हें पहचान पाना मुश्किल होता था, शाम ढलते-ढलते नए सितारे बन चुके थे। दिल्ली विधानसभा के इन 28 नए सदस्यों का संक्षिप्त परिचय आप भी जान लीजिए:
संजीव झा, बुराड़ी:
स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त संजीव झा अपने साथियों के साथ पिछले 12 सालों से दिल्ली के पिछड़े इलाकों से आने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संजीव ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर नवपल्लव नाम से एक संस्था की शुरुआत की और लोगों को शिक्षित करने का काम शुरू किया। संजीव इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
हरीश खन्ना, तिमारपुर:
एमए, पीएचडी कर चुके हरीश समाज सेवा में विशेष रुचि होने के कारण लोगों की मदद करते रहे हैं। हरीश दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ चुनाव (डूटा) के चुनावों में आठ बार विजय हासिल कर चुके हैं और वर्तमान में इसके सचिव हैं। जनलोकपाल आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने वाले हरीश गरीबों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
राखी बिड़ला, मंगोलपुरी:
पत्रकारिता व जनसंचार में एमए की शिक्षा प्राप्त राखी एक निजी समाचार चैनल में पत्रकार हैं। राखी इसके अलावा कुछ सामाजिक संस्थाओं के साथ वाल्मीकि समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए भी काम करती हैं। वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखने वाली राखी के पिता लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, लेकिन जनलोकपाल आंदोलन के दौरान उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया।
राजेश गर्ग, रोहिणी:
अपनी साफ और स्वच्छ छवि के लिए जाने जाने वाले राजेश अंडर ग्रेजुएट हैं और सामाजिक आंदोलनों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। जनलोकपाल आंदोलन के दौरान भी उन्होंने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। समाज के कमजोर वर्ग के लिए काम करने की इच्छा ही उन्हें राजनीति में ले आई।
बंदना कुमारी, शालीमार बाग:
स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त बंदना गरीब महिलाओं के अधिकारों के लिए और उन्हें घरेलू अत्याचारों से बचाने के लिए संघर्ष करती रही हैं। बंदना नई पहल नामक एक सामाजिक संस्था की संयोजक भी हैं जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेहतर काम कर रही है। बंदना जनलोकपाल आंदोलन और उसके बाद हुए सामाजिक आंदोलनों में खासी सक्रिय रहीं।
सत्येंद्र कुमार जैन, शकूर बस्ती:
बैचलर ऑफ आर्किटेक्टचर की शिक्षा प्राप्त सत्येंद्र सीपीडब्ल्यूडी में कार्यरत थे लेकिन अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान सत्येंद्र ने नौकरी छोड़ दी और कंसल्टेंसी शुरू की। जनलोकपाल आंदोलन के दौरान बेहद सक्रिय रहे सत्येंद्र ने सामाजिक मुद्दों पर भी संघर्ष किया है। सत्येंद्र स्पर्श नामक संस्था से जु्ड़े हैं जो मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों के लिए काम करती हैं।
Source- News in Hindi

Who were in the convoy without her slippers



Hindi Newsनई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सीमापुरी सीट से जो धर्मेद्र सिंह चुनाव जीते हैं वह मात्र 27 साल के हैं। न नेता रहे हैं और न नेता हैं। राजनीति क्या होती है इसकी जानकारी नहीं है। मगर जनता ने उन्हें सिंहासन पर बैठा दिया है। नंद नगरी चुनाव मतगणना केंद्र पर इस बारे में पता किया गया कि सीमापुरी सीट से कौन जीत रहा है तो कई हट्टे कट्टे लोगों में बैठे एक लड़के की ओर लोगों ने इशारा किया जो हवाई चप्पल पहने बैठा था। आसपास वाले भी प्रत्याशी ही थे सो उन्हें गुस्सा भी आ रहा था। जिस तरीके से दूसरे लोगों ने बताया कि मुझे लगा कि यह प्रत्याशी नहीं किसी प्रत्याशी का पोलिंग एजेंट है। मैंने नजदीक जाकर पूछा कि धर्मेद्र कुमार कौन है तो जवाब मिला कि मैं ही हूं। फिर वह लड़का मतों के जोड़ घटाने में लग गया। हमने पारिवारिक पृष्ठभूमि पूछी तो पता चला कि धर्मेद्र कुमार आम आदमी पार्टी की वही कार्यकर्ता संतोष कोली के छोटे भाई हैं जिनकी कुछ माह पहले गाजियाबाद के वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उस मोटर साइकिल में टक्कर मार दी थी जिस पर वह बैठी थीं। उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार का नंद नगरी में जो काफिला निकला उसमें भी संतोष कोली मौजूद थी। यानी संतोष कोली की हंसते हुए की फोटो कार्यकर्ता हवा में लहरा रहे थे। जो ऐसा लग रहा था कि भाई की जीत पर खुश है। इस काफिला में अनेक ऐसे लोग भी थे जिनके पैर में चप्पल भी नहीं थी मगर जोश था अपने विधायक का स्वागत करने का जो अभी तक नेता भी नहीं बना है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार ने पूछने पर बताया गया है कि मुझे विधायक के तौर पर 80 हजार वेतन मिलेगा। मैं उसे अपने मां बाप को दे दूंगा और उनसे निवेदन करूंगा कि अब वे सिलाई का काम नहीं करें। मैं यही पैसा उनकी सेवा में लगा दूंगा। धर्मेद्र ने कहा कि मैं राजनीति नहीं जानता हूं। यह चुनाव मैं नहीं मेरी बहन संतोष कोली जीती हैं। लोगों ने उसे वोट दिया है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी बहन मेरे बीच है और मुझे आशीर्वाद दे रही है। मैं प्रयास करूंगा कि एक विधायक के रूप में मैं अपनी बहन के सपने को साकार करूं और इलाके के लोगों की सेवा करूं।

B Town celebrates 'AAP' victory

राजनीति में 'आप' की धमाकेदार एंट्री से बॉलीवुड में जगी उम्मीद


Hindi Newsमुंबई। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। न्यूकमर 'आप' ने सालों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस का अपनी झाड़ू से सफाया कर दिया है। जहां एक तरफ चारों ओर आम जनता अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं आप के पास बधाइयों का तांता लग रहा है। दिग्गज नेताओं के साथ-साथ दिल्ली में केजरीवाल की धमाकेदार एंट्री से बॉलीवुड में खुशी और उम्मीद की लहर फैल गई है। बॉलीवुड ने भी केजरीवाल को उनकी जीत और आने वाली चुनौतियों के लिए जमकर शुभकामनाएं दी हैं।
बॉलीवुड सेलेब्रिटिज के ट्वीट :
-अनुष्का शर्मा ने लिखा कि एक आदमी से क्या बदल सकता है, सारी जिंदगी इसी बात को मानते आए हैं, लेकिन एक इन्सान पूरा सिस्टम बदल सकता है। केजरीवाल ने साबित कर दिया। 'आप' इस नाम में ही एक जादू है, क्रिएटिविटी है, इसके साथ विजन है। जो इतिहास बना सकता है।
-अनुपम खेर ने लिखा कि 'आप' को मुबारकबाद। किरण बेदी, अन्ना हजारे सबकी मुहिम काम कर गई। सबको ढेर सारी शुभकामनाएं।
-दीया मिर्जा ने लिखा कि सबने उन्हें दुत्कार दिया था, लेकिन इन लोगों ने कर दिखाया। अपने आने वाले सफर के लिए तैयार रहिए।
-सोफी चौधरी ने लिखा कि मुबारक हो दिल्ली। दिल्ली के लिए ऐतिहासिक दिन जीत का दिन। 'आप' ने एक मिसाल कायम की है। ये सच में कुछ बदल सकते हैं।
-म्यूजिक कम्पोजर विशाल डडलानी ने लिखा कि 'आप' का प्रदर्शन जबरदस्त था। काश मैं दिल्ली में इस वक्त होता तो साथ में खुशी मनाता। 'आप' ने एक अच्छी शुरुआत की है। मेरा देश जाग रहा है, दिल्ली जाग रही है। अब आप का वक्त आ गया है।
-मधुर भंडारकर ने लिखा कि कभी कभी किसी फिल्म में बड़े स्टार नहीं होते हैं, लेकिन फिल्म का प्रोमो इतना जबरदस्त होता है कि मजा आ जाता है। ठीक उसी तरह 'आप' की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही हुई है। राजनीति में नई इतिहास की दस्तक हो चुकी है। क्या पता कब बाद में आप भी हिट हो जाए।

Aap leaders meet ends, soniya call meets home



Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता से गदगद आप नेताओं की ताजा बैठक खत्म हो गई। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के घर पर चल रही थी। बैठक समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम किसी पार्टी का न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। अगर दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। मनीष ने बताया कि इस मुद्दे पर आप के विधायक दलों की बैठक शाम को 5.30 बजे भी होगी।
यही नहीं, आप ने अरविंद केजरीवाल की पूर्व सहयोगी किरण बेदी का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। किरण बेदी ने सुझाव देते हुए कहा था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आप और भाजपा को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए, क्योंकि अगर दोबारा चुनाव होता है तो वह जनता के साथ अन्याय होगा। सुशासन 'आप' और भाजपा दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन आप ने किरण बेदी के इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 28 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खात में 32 सीटें आई और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें ही मिल सकी।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है। सोनिया गांधी ने यह बैठक विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई है। इस बैठक में आगे हार के कारणों पर चर्चा के अलावा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।
Source- News in Hindi

Aap leaders meet ends, soniya call meets home



Delhi election 2013: नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता से गदगद आप नेताओं की ताजा बैठक खत्म हो गई। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के घर पर चल रही थी। बैठक समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम किसी पार्टी का न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। अगर दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।
मनीष ने बताया कि इस मुद्दे पर आप के विधायक दलों की बैठक शाम को 5.30 बजे भी होगी। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 28 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खात में 32 सीटें आई और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें ही मिल सकी।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है। सोनिया गांधी ने यह बैठक विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई है। इस बैठक में आगे हार के कारणों पर चर्चा के अलावा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।
Source- News in Hindi
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Delhi Assembly Election 2013: The prospect of President rule in Delhi



Delhi election 2013: नई दिल्ली [अजय पांडेय]। दिल्ली में अब किसकी हुकूमत कायम होगी? कांग्रेस का सफाया हो गया लेकिन अवाम ने न तो भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया और न ही आम आदमी पार्टी के पास सरकार बनाने लायक सीटें हैं। ऐसे में निगाहें अब राजनिवास पर टिक गई हैं। उपराज्यपाल नजीब जंग के फैसले पर बहुत कुछ निर्भर करता है। संविधान विशेषज्ञ वर्तमान परिस्थितियों में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना से भी इन्कार नहीं कर रहे। यदि ऐसी नौबत आई तो यह पहला मौका होगा जब केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर उपराज्यपाल सीधे दिल्ली के शासन की बागडोर संभालेंगे। कुछ समय के इंतजार के बाद भी सरकार गठन की सूरत नहीं बनी तो नए सिरे से भी चुनाव कराने पड़ सकते हैं।
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। सबसे बड़े दल के रूप में उभरे भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर कुल 32 सीटें जीती हैं। उसे बहुमत के लिए चार सीटों की दरकार है। आम आदमी पार्टी के पास 28 सीटें हैं, उसे बहुमत के लिए आठ सीटें चाहिए। आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस यदि आम आदमी पार्टी को समर्थन दे दे, तो अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में नई सरकार बन सकती है। वहीं केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में बैठेंगे। जाहिर तौर पर सरकार गठन को लेकर मामला उलझ गया है।
नई सरकार के गठन को लेकर पूछे जाने पर उपराज्यपाल कार्यालय के उच्चाधिकारियों ने बताया कि अभी तो उन्हें दिल्ली चुनाव कार्यालय द्वारा चुने गए विधायकों को लेकर अधिसूचना जारी किए जाने का इंतजार है। आधिकारिक तौर पर उसके बाद ही उपराज्यपाल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। दिल्ली चुनाव कार्यालय के मुताबिक दिल्ली की चुनाव प्रक्रिया 11 दिसंबर तक पूरी की जानी है।
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि परंपरा के अनुसार उपराज्यपाल को सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए। यदि पार्टी सरकार बनाने को तैयार होती है, तो उसे सदन में विश्वास मत हासिल करने का मौका दिया जाना चाहिए। यदि भाजपा सरकार बनाने से इन्कार करती है, तो दूसरे सबसे बड़े दल आम आदमी पार्टी को उपराज्यपाल सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं। कश्यप ने कहा कि उपराज्यपाल सदन को यह संदेश भी दे सकते हैं कि वह अपने नेता का चयन करे, लेकिन सदन का नेता तभी चुना जा सकता है जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हुआ तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर सकते हैं।
दिल्ली के सियासी जानकारों की मानें तो भाजपा के लिए बहुमत जुटाने के रास्ते में कई मुश्किलें हैं। वह एक निर्दलीय विधायक को तो अपने पाले में ला सकती है, लेकिन जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर जीते शोएब इकबाल शायद ही उसके साथ जाएं। इसी प्रकार कांग्रेस को तोड़े बगैर तीन विधायकों का जुगाड़ नहीं हो सकती। यह विकल्प भी कठिन है। यदि भाजपा आम आदमी पार्टी को तोड़ना चाहे तो उसे कम से कम 10 विधायक तोड़ने होंगे, क्योंकि दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी पर भी दल बदल विरोधी कानून लागू होगा।
Source- News in Hindi

See at a glance how many votes won and lost veteran knight



Delhi election 2013: नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भारी मतों से पराजित किया। वहीं भाजपा के मुख्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कृष्णानगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत हासिल की है। वहीं जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल पांचवीं बार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।
नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र-मतों से विजयी
ं1. अरविंद केजरीवाल-आप-नई दिल्ली-25864
2. डॉ. हर्षवर्धन-भाजपा-नई दिल्ली-43150
3. मनीष सिसोदिया-आप-पटपड़गंज-11476
4. हारुन यूसुफ- कांग्रेस-बल्लीमरान-8093
5. अरविंदर सिंह लवली-कांग्रेस-गांधीनगर-16961
6. जगदीश मुखी-भाजपा-जनकपुरी-2644
7. साहिब सिंह चौहान-भाजपा-घोंडा-11932
8. प्रवेश साहिब सिंह-भाजपा-महरौली-4564
9. शोएब इकबाल-जदयू-मटिया महल-2891
10. जय किशन-कांग्रेस-सुल्तानपुर माजरा-1112
हारने वाले दस बड़े दिग्गज :-
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ.योगानंद शास्त्री के साथ-साथ चार मंत्री भी चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के भाई तथा उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर आजाद सिंह भी चुनाव नहीं जीत सकें।
नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र- कितने मत से पराजित
1. शीला दीक्षित-कांग्रेस- नई दिल्ली-25864 (दूसरे स्थान पर)
2. डॉ. योगानंद शास्त्री-कांग्रेस- महरौली-15987 (तीसरे स्थान पर)
3. अशोक वालिया-कांग्रेस-लक्ष्मीनगर-7752 (दूसरे स्थान पर)
4. किरण वालिया-कांग्रेस-मालवीय नगर- 11758 (तीसरे स्थान पर)
5. रमाकांत गोस्वामी-कांग्रेस-राजेंद्र नगर- 14896 (तीसरे स्थान पर)
6. राजकुमार चौहान-कांग्रेस-मंगोलपुरी- 10585 (दूसरे स्थान पर)
7. चौधरी प्रेम सिंह-कांग्रेस-अंबेडकर नगर- 16486 (तीसरे स्थान पर)
8. हरशरण सिंह बल्ली-कांग्रेस-हरिनगर 15801 (तीसरे स्थान पर)
9. आजाद सिंह-भाजपा-मुंडका-7134 (दूसरे स्थान पर)
10. बरखा शुक्ला सिंह-कांग्रेस-आरके पुरम- 8338 (तीसरे स्थान पर)
राजनीतिज्ञ पुत्रों को करना पड़ा हार का सामना:-
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश साहिब सिंह (भाजपा) महरौली
विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। जबकि अन्य राजनीतिज्ञ पुत्रों को चुनावी समर में पराजय का सामना करना पड़ा है। राजौरी गार्डन के विधायक दयाचंद चंदीला की पत्नी धनवंती चंदीला भी चुनाव नहीं जीत सकीं।
उम्मीदवार-पार्टी-विधानसभा
क्षेत्र-राजनीतिज्ञ से रिश्ता-कितने मतों से हारें
1. अजय मल्होत्रा-भाजपा- ग्रेटर कैलाश- भाजपा नेता प्रोफेसर विजय मल्होत्रा के पुत्र- 13092 (दूसरे स्थान पर)
2. राजीव बब्बर-भाजपा- तिलक नगर-भाजपा नेता ओपी बब्बर के पुत्र- 2088 (दूसरे स्थान पर)
3. जगप्रवेश-कांग्रेस-संगम विहार-कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के पुत्र- 8416 (तीसरे स्थान पर)
4. विनय मिश्रा-कांग्रेस-पालम-कांग्रेस सांसद महाबल मिश्रा के पुत्र- 23302 (चौथे स्थान पर)
5. विपिन शर्मा-कांग्रेस-रोहतास नगर-कांग्रेस के पूर्व विधायक रामबाबू शर्मा के पुत्र- 17760 (तीसरे स्थान पर)
6. धनवती चंदीला-कांग्रेस-राजौरी गार्डन- कांग्रेस के विधायक दयाचंद चंदीला की पत्नी-11008 (दूसरे स्थान पर)
अधिकतम संपत्ति घोषित करने वाले तीन उम्मीदवारों की स्थिति :-
उम्मीदवार-कुल संपत्ति- विधानसभा क्षेत्र- स्थिति
1. मनजिंदर सिंह सिरसा (शिरोमणि अकाली दल)-235.51 करोड़- राजौरी गार्डन-11008 मतों से विजयी
2. सुशील गुप्ता (कांग्रेस)-164.44 करोड़-मोतीनगर-17206 मतों से पराजित(तीसरे स्थान पर)
3. अशोक कुमार जैन (कांग्रेस)-143.69 करोड़- दिल्ली कैंट-14136 मतों से पराजित (तीसरे स्थान पर)
न्यूनतम संपत्ति घोषित करने वाले तीनों मुख्य पार्टियों के उम्मीदवारों की स्थिति :-
1. खुशी राम चुनार (भाजपा)-8.27 लाख-अंबेडकर नगर-11670 मतों से पराजित (दूसरे स्थान पर)
2. रागिनी नायक (कांग्रेस)-31.10 लाख-जनकपुरी-25695 मतों से पराजित (तीसरे स्थान पर)
3. धर्मेद्र सिंह कोली (आप)-20,800-सीमापुरी-11976 मतों से विजयी
Source- News in Hindi