Who were in the convoy without her slippers



Hindi Newsनई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सीमापुरी सीट से जो धर्मेद्र सिंह चुनाव जीते हैं वह मात्र 27 साल के हैं। न नेता रहे हैं और न नेता हैं। राजनीति क्या होती है इसकी जानकारी नहीं है। मगर जनता ने उन्हें सिंहासन पर बैठा दिया है। नंद नगरी चुनाव मतगणना केंद्र पर इस बारे में पता किया गया कि सीमापुरी सीट से कौन जीत रहा है तो कई हट्टे कट्टे लोगों में बैठे एक लड़के की ओर लोगों ने इशारा किया जो हवाई चप्पल पहने बैठा था। आसपास वाले भी प्रत्याशी ही थे सो उन्हें गुस्सा भी आ रहा था। जिस तरीके से दूसरे लोगों ने बताया कि मुझे लगा कि यह प्रत्याशी नहीं किसी प्रत्याशी का पोलिंग एजेंट है। मैंने नजदीक जाकर पूछा कि धर्मेद्र कुमार कौन है तो जवाब मिला कि मैं ही हूं। फिर वह लड़का मतों के जोड़ घटाने में लग गया। हमने पारिवारिक पृष्ठभूमि पूछी तो पता चला कि धर्मेद्र कुमार आम आदमी पार्टी की वही कार्यकर्ता संतोष कोली के छोटे भाई हैं जिनकी कुछ माह पहले गाजियाबाद के वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उस मोटर साइकिल में टक्कर मार दी थी जिस पर वह बैठी थीं। उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार का नंद नगरी में जो काफिला निकला उसमें भी संतोष कोली मौजूद थी। यानी संतोष कोली की हंसते हुए की फोटो कार्यकर्ता हवा में लहरा रहे थे। जो ऐसा लग रहा था कि भाई की जीत पर खुश है। इस काफिला में अनेक ऐसे लोग भी थे जिनके पैर में चप्पल भी नहीं थी मगर जोश था अपने विधायक का स्वागत करने का जो अभी तक नेता भी नहीं बना है।
चुनाव जीतने के बाद धर्मेद्र कुमार ने पूछने पर बताया गया है कि मुझे विधायक के तौर पर 80 हजार वेतन मिलेगा। मैं उसे अपने मां बाप को दे दूंगा और उनसे निवेदन करूंगा कि अब वे सिलाई का काम नहीं करें। मैं यही पैसा उनकी सेवा में लगा दूंगा। धर्मेद्र ने कहा कि मैं राजनीति नहीं जानता हूं। यह चुनाव मैं नहीं मेरी बहन संतोष कोली जीती हैं। लोगों ने उसे वोट दिया है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी बहन मेरे बीच है और मुझे आशीर्वाद दे रही है। मैं प्रयास करूंगा कि एक विधायक के रूप में मैं अपनी बहन के सपने को साकार करूं और इलाके के लोगों की सेवा करूं।

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