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Kallis would be biggest challenge for Team India in South Africa


Jaques Kallis
Hindi News(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। एक समय था जब टीम इंडिया में सचिन तेंदुलकर की हुंकार टीम के बाकी 10 खिलाड़ियों के बराबर होती थी, वो पिच पर शून्य बनाएं या शतक, ये मायने कम रखता था, और उनका ड्रेसिंग रूम में मौजूद रहना ज्यादा प्रभाव डालता था। ये प्रभाव सात समंदर पार जाता था, विरोधी टीम के रोंगटे खड़े करता था और काफी हद तक 'सचिन फीवर' हर विरोधी गेंदबाज के चेहरे से पसीने के रूप में रिसता नजर आता था। अब टीम इंडिया सचिन तेंदुलकर के दौर से बाहर कदम रख चुकी है। टीम में ना तो लक्ष्मण हैं, ना द्रविड़, ना गांगुली और ना सहवाग। टीम में युवा जोश उछाल मार रहा है और धौनी उनके दम पर दक्षिण अफ्रीका फतह करने निकल पड़े हैं। फर्क बस इतना है कि इस बार हमारे पास सचिन नहीं है, लेकिन उनके पास है और उनका सचिन टीम इंडिया को हर क्षेत्र में भारी पड़ सकता है। नाम है..जैक्स कालिस।
उम्र- 38 साल
अनुभव- तकरीबन 20 साल
164 टेस्ट मैचों में 13,140 रन
323 वनडे मैचों में 11,554 रन
टेस्ट में 55.44 का औसत (सचिन से ज्यादा)
वनडे में 45.13 का औसत (सचिन से ज्यादा)
टेस्ट में 44 शतक
वनडे में 17 शतक
टेस्ट में गेंदबाजी- 288 विकेट
वनडे में गेंदबाजी- 272 विकेट
टेस्ट वनडे और टी20 मिलाकर 512 मैचों में 332 कैच (विश्व में चौथा सर्वश्रेष्ठ)
लंबे आराम के बावजूद पिछले 5 मैचों में दो अर्धशतक व दो 40 पार स्कोर
ये आंकड़े उस ऑलराउंडर के हैं जो हमेशा अपनी शर्तो पर खेला, लेकिन जब खेला जमकर खेला। सचिन के आंकड़े और वो खुद भी, बेशक महान थे, लेकिन हकीकत यही है कि सिर्फ बल्लेबाजी में उनके रिकॉर्ड सीना तानते थे। जबकि कालिस ने अपने विशाल करियर में इस खेल के हर क्षेत्र में महारथ हासिल की है। सचिन की ही तरह वो भी विवादों से दूर और स्वभाव से शांत रहे और मौजूदा क्रिकेट में सचिन, लारा, पोंटिंग, पॉलक, द्रविड़ के दौर के वो आखिरी खिलाड़ी हैं। हर पिच से वाकिफ हैं, और हर प्रकार के खिलाड़ी से। खेलने की भूख भी अभी खत्म नहीं हुई है और हाल में अगला विश्व कप भी खेलने की इच्छा जता चुके हैं।
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When ms dhoni named gautam gambhir


MS Dhoni
Hindi Newsमुंबई। भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा है कि विदेशी परिस्थितियों और वह भी सचिन तेंदुलकर के बिना खेलना उनकी टीम के लिए बड़ी चुनौती होगी, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि पहले वनडे मैच खेलने से बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए अच्छी तरह से तैयार हो जाएंगे, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर रवाना होने से पहले जो सबसे चौंकाने वाली बात धौनी ने की, वो थी गौतम गंभीर का नाम लेना, धौनी ने गौतम को भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी क्रम का तीसरा विकल्प बताया जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होना लाजमी हैं, क्योंकि गंभीर का नाम टेस्ट टीम में शामिल ही नहीं किया गया।
भारतीय कप्तान से पूछा गया कि टेस्ट मैचों में तीसरे सलामी बल्लेबाज की भूमिका कौन निभाएगा क्योंकि टीम में शिखर धवन और मुरली विजय के रूप में दो ही विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज है। धौनी ने इस सवाल पर गौतम गंभीर का नाम लेकर सभी को हैरान कर दिया जो कि क्7 सदस्यीय टीम का हिस्सा नहीं हैं। धौनी ने कहा, 'गौतम निश्चित तौर पर हमारे तीसरे ओपनर हैं, जिस पर हम विचार कर रहे हैं। अभी विजय और शिखर हमारे लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहे है। इसलिए अभी तीसरे ओपनर गौतम हैं।' बाद में उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि मैं जानता हूं (गंभीर टीम का हिस्सा नहीं है), लेकिन वह तीसरे ओपनर हैं? जो भी हो धौनी के बयान से साफ हो गया कि गंभीर अब भी कम से कम टेस्ट मैचों के लिए टीम की योजना का हिस्सा हैं, लेकिन इसने भारतीय क्रिकेट की चयन प्रक्रिया व कप्तान के तौर पर चयन पैनल का हिस्सा बनने व चयनकर्ताओं से मतभेद की खबर को भी हवा देने का काम किया है।
इसके अलावा धौनी ने टीम की रवानगी से पहले पिछले महीने संन्यास लेने वाले तेंदुलकर की अनुपस्थिति के बारे में कहा, 'यदि आप देखें तो हर समय नई शुरूआत होती है।' उन्होंने कहा कि उनके बल्लेबाजों को छोटे प्रारूप में खेलने का काफी अनुभव है और पहले वनडे खेलने से टेस्ट मैचों के लिए उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। धौनी ने कहा, 'इनमें से अधिकतर को टेस्ट मैचों में न सही वनडे में खेलने का काफी अनुभव है। यह उन सभी के लिए नई चुनौती है और यहां उन्हें नई सीख मिलेगी। जब भी आप विदेशी दौरे पर जाते हैं तो वह चुनौती होती है। उसमें आपको गेंद की लंबाई और विकेट की उछाल से सामंजस्य बिठाना पड़ता है।'
धौनी से पूछा गया कि टेस्ट टीम में नंबर चार पर तेंदुलकर की जगह कौन लेगा, उन्होंने कहा कि इस पर अभी फैसला नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'कोई भी किसी की जगह नहीं ले सकता। यदि संभव होता तो हम नंबर चार हटा देते और क्, ख्, फ्, भ्, म् और क्ख् तक बल्लेबाजी करने की कोशिश करते।' वहीं, गेंदबाजी पर उन्होंने कहा कि स्लॉग ओवरों में गेंदबाजी भारत के लिए चिंता का विषय है, लेकिन धौनी को दक्षिण अफ्रीका में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'भिन्न परिस्थितियों में आंकड़े भी बदल जाते हैं। वहां तेज गेंदबाजों को तेजी और उछाल मिलेगी। हम यॉर्कर के अलावा बाउंसर का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए देखना हैं कि क्या होता है।' धौनी ने कहा कि क्रिकेट प्रेमियों को अच्छी क्रिकेट देखने को मिलेगी क्योंकि दुनिया की चोटी की दो टीमें आमने-सामने होंगी। उन्होंने कहा, 'दोनों टीमें रैंकिंग में अच्छी स्थिति में हैं। वनडे में हम शीर्ष पर हैं और टेस्ट मैचों में वे नंबर एक हैं। यह आकर्षक और रोमांचक सीरीज होगी। जल्द से जल्द परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना महत्वपूर्ण है।'
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Analysis of selected Indian ODI team against West Indies


Mohit Sharma

Hindi News: (शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली।ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुछ ही दिनों पहले खेली गई वनडे सीरीज में भारतीय टीम ने कई इतिहास रचे, वो एक ऐसी सीरीज रही जिसने युवा भारतीय बल्लेबाजी क्रम की ताकत को दुनिया के सामने रखा और हर बड़ा स्कोर भी छोटा सा लगने लगा लेकिन ठीक उसके उलट गेंदबाजों ने बेहद निराश किया। बल्लेबाजों ने गेंदबाजों के खराब प्रदर्शन को काफी हद तक छुपा तो लिया लेकिन ऐसी गेंदबाजी को कोई नजरअंदाज भी करता तो कैसे। शायद तभी जब वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के लिए टीम चुनी गई तो इस सेलेक्शन में भी चयनकर्ताओं ने गेंदबाजों पर नजरें ज्यादा दौड़ाईं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया गया जिसमें इशांत शर्मा और विनय कुमार की छुंट्टी कर दी गई है। जबकि धवल कुलकर्णी को पहला मौका देने का फैसला किया गया और एक बार फिर हरियाणा के तेज गेंदबाज मोहित शर्मा को नीली जर्सी पहनने का मौका मिलेगा। आखिर क्या हैं इस टीम की खूबियां और कमजोरियां, आइए जानते हैं।
1. खामियां:
इस टीम में सबसे बड़ी कमजोरी जो नजर आ रही है वो है टीम का मिडिल ऑर्डर। ऑस्ट्रेलिया सीरीज के दौरान एक बात जो सबसे अहम रही वह यह थी कि जो ऐतिहासिक जीतें हमनें हासिल कीं वह सभी ऊपर के 3-4 बल्लेबाजों की ही देन थी। मध्यक्रम में युवराज सिंह और सुरेश रैना, दोनों हैं तो धाकड़ बल्लेबाज लेकिन फिलहाल इनका बल्ला बिल्कुल फुस्स हुआ सा लगता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में युवराज सिंह ने अपने करियर में एक वनडे सीरीज का सबसे खराब प्रदर्शन किया। उन्होंने चार पारियों में महज 19 रन ही बनाए और उनका सर्वाधिक स्कोर 12 रन रहा। इसके अलावा सुरेश रैना भी उनके स्तर के मुताबिक मुताबिक प्रदर्शन करते नजर नहीं आए। वहीं, टीम की एक दूसरी कमजोरी होगी अनुभवी गेंदबाज की कमी। जहीर खान का टीम से बाहर रहना और अब इशांत शर्मा के खराब फॉर्म के बाद उनको भी बाहर कर देने से गेंदबाजी लाइन अप में कोई ऐसा गेंदबाज बाकी नहीं रह गया जो आगे से लीड कर सके। धवल कुलकर्णी जहां इस सीरीज में डेब्यू करेंगे, वहीं, भुवनेश्वर कुमार, मोहित शर्मा, जयदेव उनादकट और मोहम्मद शमी जैसे तेज गेंदबाजों पर जिम्मेदारी होगी कि वह अपने कप्तान का काम आसान करें, वो भी सिर्फ अपने थोड़े-बहुत हासिल किए हुए अनुभव से।
2. खूबियां:
बेशक इस टीम में कुछ छोटी-मोटी खामियां हैं लेकिन इस टीम की खूबियां व ताकत इतनी मजबूत है कि वे कमजोरियों को छुपाने व वेस्टइंडीज को बैकफुट पर ढकेलने का काम बखूबी कर सकती हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने दो बार 350 से ऊपर के विशाल लक्ष्य को हासिल करके दिखा दिया कि उनके बल्लेबाजी क्रम के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। ऊपर के तीन बल्लेबाज (शिखर धवन, रोहित शर्मा और विराट कोहली) इन दिनों गजब के फॉर्म में हैं और इन्हें रोकना किसी भी टीम, किसी भी गेंदबाज के बस की बात नजर नहीं आ रही। इसके अलावा अब अंतरराष्ट्रीय टीम में रवींद्र जडेजा की वापसी भी हो जाएगी, जिनको कुछ दिन का आराम दिया गया था। जडेजा की मौजूदगी टीम व कप्तान को एक ऐसा ट्रंप कार्ड देता है जो जरूरत के समय हमेशा काम आता नजर आया है। इसके अलावा कोलकाता टेस्ट में अश्विन ने अपना जो ऑलराउंडर रूप दिखाया, वो वेस्टइंडीज के गेंदबाजों व बल्लेबाजों में खौफ पैदा करने के लिए काफी होगा, और फिलहाल वह विश्व ऑलराउंडर रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंचने का रुतबा भी हासिल कर चुके हैं। इसके अलावा थोड़ी बहुत जो कसर बाकी रहेगी वो मोहम्मद शमी पूरा कर सकते हैं, जिन्होंने कोलकाता टेस्ट में 9 विकेट लेकर अपने करियर का शानदार आगाज किया। उनके फॉर्म से वेस्टइंडीज वाकिफ है और टीम इंडिया के लिए यह गेंदबाज एक मजबूत कड़ी साबित हो सकता है। उधर, दूसरी तरफ हरियाणा की तरफ से रणजी खेल रहे मोहित शर्मा ने पिछले दो रणजी मैचों में सात विकेट झटके हैं जिसमें लाहिली में खेला गया सचिन तेंदुलकर का आखिरी रणजी मैच का खास विकेट भी शामिल रहा। इसी मैच में धवल कुलकर्णी ने भी 3 विकेट झटके थे।

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Kohli becomes number-one ranked ODI batsman


Virat Kohli

Hindi News: मैचों की सीरीज में शानदार बल्लेबाजी का ईनाम भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली को आइसीसी बल्लेबाजी रैंकिंग में नंबर-1 के रूप में मिला है। वहीं गेंदबाजी में सईद अजमल ने रविंद्र जडेजा और सुनील नरेन को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर काबिज हो गए हैं।
बल्लेबाजी रैंकिंग की बात करें तो भारत के खिलाफ सात वनडे मैचों की सीरीज में कंगारू कप्तान जार्ज बैली शानदार प्रदर्शन की वजह से नंबर तीन स्थान पर काबिज हो गए हैं। बैली ने इस सीरीज में 95.60 की औसत से 478 रन बनाए हैं। गेंदबाजी में दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज ने 6 स्थान की छलांग लगाते हुए सातवें नंबर पर पहुंच गए हैं।
भारतीय सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा को भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करने का फायदा मिला है। भारत-आस्ट्रेलिया के खिलाफ द्विपीक्षीय वनडे सीरीज में 478 रन बनाने वाले रोहित शर्मा ने आइसीसी बैटिंग रैंकिंग में दस स्थानों की छलांग लगाकर 15वें नंबर पर पहुंच गए हैं। यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग है। वहीं भारतीय बल्लेबाज शिखर धवन 12 स्थान की छलंाग लगाते हुए 11वें स्थान पर पहुंच गए हैं। बल्लेबाजी रैंकिंग में महेंद्र सिंह धौनी नंबर 6 पर और सुरेश रैना 19वें नबंर पर काबिज हैं। भारत के शीर्ष 20 बल्लेबाजों में भारत के चार बल्लेबाज हैं। भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली ने हाशिम अमला को पछाड़ कर बल्लेबाजी में शीर्ष पर काबिज हुए हैं।
Source- News in Hindi 
 
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India vs Australia Series - I feel good chasing targets: Kohli


 India vs Australia Series

Hindi News: बेंगलूर। विराट कोहली ने शुक्रवार को इशारा किया कि अगर भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शनिवार को होने वाले सीरीज के अंतिम और निर्णायक वनडे में टॉस जीतता है तो उनकी टीम लक्ष्य देने की जगह उसका पीछा करने को तरजीह देगी।
कोहली ने मैच की पूर्वसंध्या पर कहा, 'निजी तौर पर मुझे लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छा लगता है क्योंकि आपको पता होता है कि आपको क्या हासिल करना है। हम बेहतर योजना बना सकते हैं और आकलन कर सकते हैं कि विभिन्न हालात में कैसे खेलें। आकलन करके खेलने में मुझे अच्छा लगता है, किस गेंदबाज को निशाना बनाना है और किस गेंद को हिट करना है। पहले बल्लेबाजी करते हुए हमें बल्लेबाजी हालात का आकलन करना होता है और बड़ा स्कोर बनाने के लिए बड़ी साझेदारी महत्वपूर्ण होती है। पहले बल्लेबाजी करो या बाद में टीम के लिए साझेदारी काफी अहम होती है।'
कोहली ने कहा कि दोनों टीमों के बीच यह सीरीज रोमांचक रही है विशेषकर जिस तरह से भारत ने मुश्किल हालात में वापसी की। कोहली ने कहा, 'निजी तौर पर मेरी फॉर्म मेरे लिएच्अच्छी रही है। उम्मीद करता हूं कि अंतिम मैच में मैं एक बार फिरच्अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगा। अब तक सीरीज में कड़ा मुकाबला देखने को मिला है और इसे जीतने के लिए हमें अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाना होगा।'
Source- News in Hindi 

Another memorable inning of Virat Kohli


 Virat Kohli

News in Hindi(शिवम् अवस्थी) नई दिल्ली। टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज विराट कोहली ने एक बार फिर वह कमाल कर दिखाया जो शायद पिछले कुछ सालों से वह लगातार करते आ रहे हैं। हर अगले मैच में वो सुर्खियां बटोरते हैं और भविष्य के कप्तान होने का दावा बार-बार ठोंकने से नहीं चूकते। जयपुर में कंगारुओं के खिलाफ सबसे तेज भारतीय शतक लगाकर उन्होंने टीम इंडिया को जहां सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका निभाई वहीं, नागपुर वनडे में भी कुछ ऐसे ही उन्होंने धूम मचाई।
नागपुर वनडे में दिल्ली के इस दिलेर ने किसी भी भारतीय द्वारा तीसरा सबसे तेज शतक जड़ा। इससे पहले जयपुर में उन्होंने जहां 52 गेंदों में शतक जड़ा था, वहीं नागपुर में उन्होने 61 गेंदों में यह कमाल किया। दोनों ही मौकों पर भारत ने अपने वनडे इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी व दूसरे नंबर की सबसे बड़ी जीत हासिल की। यह कोहली के वनडे करियर का 17वां शतक था।
नागपुर वनडे में उन्होंने किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा, फिर चाहे वो तेज गेंदबाज हो या फिर स्पिनर। जो भी उनके सामने आया ढहता चला गया। एक नजर डालते हैं कि उन्होंने किस गेंदबाज को कितना परेशान किया।
मिचेल जॉनसन की 16 गेंदों पर 24 रन
क्लिंट मैके की 7 गेंदों पर 11 रन
जेम्स फॉकनर की 17 गेंदों पर 34 रन
डोहर्टी की 6 गेंदों पर 17 रन
वॉटसन की 8 गेंदों पर 17 रन
मैक्सवेल की 5 गेंदों पर 7 रन
फिंच की 7 गेंदों पर 5 रन
विराट ने हर तरह से कंगारुओं की क्लास लगाई। जब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी, तब वो भी इतनी तेज रफ्तार से आगे नहीं बढ़े थे जिस रफ्तार से कोहली के रिकॉर्डो की ट्रेन दौड़ लगा रही है। विराट के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन से यह साफ हो जाता है कि मुमकिन है कि हमें नया सचिन मिल चुका है। सचिन के तमाम रिकॉर्डों से तो दुनिया वाकिफ है ही, लेकिन अगर विराट के कुछ ताजा रिकॉर्डो को देखें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उनका फॉर्म, उनका प्रदर्शन किसी भी लिहाज से सचिन के शुरुआती दिनों से कम नहीं है, बल्कि या यह कहें कि ज्यादा ही है.एक नजर विराट के पांच साल (2008 से अब तक) के छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर में हासिल किए अब तक के कुछ खास आंकड़ों पर, अब फैसला आप करें..

Kohli, Dhawan centuries help India to another stunning chase


 MS Dhoni
News in Hindiनागपुर। चमत्कार रोज-रोज नहीं हुआ करते। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बुधवार को जब कप्तान जॉर्ज बेली (156) और शेन वॉटसन (102) के शतकों की मदद से भारत के समक्ष 350 का विशाल लक्ष्य रखने के बाद शायद यह ख्याल उसके मन में जरूर आया होगा। लेकिन सीरीज के दूसरे वनडे में 359 रन के लक्ष्य को भेदने वाली टीम इंडिया ने एक बार फिर तीन गेंद और छह विकेट शेष रहते चमात्कारिक जीत हासिल कर मेहमान टीम को अपना सिर पीटने पर मजबूर कर दिया।

विराट कोहली (115) एक बार फिर लक्ष्य हासिल करने में हीरो साबित हुए। उन्होंने 61 गेंद पर भारत की तरफ से तीसरा सबसे तेज और करियर का 17वां शतक ठोका। भारतीय क्रिकेट में नई सनसनी बन कर उभरे शिखर धवन ने भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना शानदार रिकॉर्ड जारी रखा और करियर का चौथा शतक जड़ते हुए भारत की वनडे में दूसरी सबसे बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई।
सात मैचों की सीरीज में यह दूसरी बार है जब भारत ने 350 से ज्यादा का लक्ष्य हासिल किया है। इससे पहले दूसरे वनडे मैच में भारत ने 359 रन का लक्ष्य हासिल करते हुए वनडे क्रिकेट में अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली और अब दो नवंबर को बेंगलूर में खेले जाने वाले सीरीज के अंतिम मैच से सीरीज विजेता का फैसला होगा।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को रोहित शर्मा और शिखर धवन की सलामी जोड़ी ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने 29.3 ओवर में 178 रन की साझेदारी करके टीम को मजबूत आधार दिया। रोहित 79 रन पर आउट हो जाने के बाद कोहली ने तेजी से रन बनाने का जिम्मा संभाला। शिखर के साथ मिलकर उन्होंने टीम को तेजी से लक्ष्य की तरफ धकेला। इस बीच शतक लगाने के बाद धवन फॉकनर की गेंद पर बोल्ड हो गए। उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके लगाए। दूसरे छोर पर खड़े कोहली लगातार रन बटोरते रहे।
जॉनसन ने 43वें ओवर में रैना और युवराज को पवेलियन भेजकर मैच का रुख बदलने की कोशिश की। पूरी पारी के दौरान यही एक इकलौता ऐसा वक्त था, जब लगा भारत मैच हार भी सकता है। भारत को एक समय जीत के लिए 27 गेंदों में 48 रन की दरकार थी, लेकिन आक्रामक कोहली ने अपना फोकस बनाए रखा और नाबाद रहते हुए विपक्षी टीम के मंसूबों पर पानी फेर दिया। उन्होंने 66 गेंद की अपनी पारी में 18 चौके और एक छक्का लगाया।
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