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68 per cent voting recorded in first phase of C'garh polls


Chhattisgarh Election
Top Hindi News:नई दुनिया ब्यूरो, रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहले चरण की अट्ठारह सीटों पर सोमवार को नक्सली उत्पात व दहशत के बीच अड़सठ फीसद मतदान हुआ। बस्तर संभाग की 12 व राजनांदगांव जिले की छह सीटों पर वोट पड़े। इसके साथ ही 143 उम्मीदवारों की किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में फीड हो गई। देर शाम दंतेवाड़ा में बूथ से लौट रही पोलिंग पार्टी पर नक्सलियों ने हमला कर दिया, जिसमें एक सीआरपीएफ जवान की मौत हो गई। कांकेर में भी प्रेशर बम से विस्फोट कर पोलिंग पार्टी को उड़ाने की कोशिश की गई, जिसमें एक जवान जख्मी हो गया।
कांकेर के अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के दो बूथों चितरम व छोटे पखांजूर में नक्सली उत्पात के कारण पोलिंग पार्टी नहीं पहुंच पाई। इस वजह से यहां मतदान स्थगित करना पड़ा। चितरम बूथ की पोलिंग व पुलिस पार्टी पर नदी पार करने के समय नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बस्तर के कोलेंगे और बीजापुर के मनकेली बूथों पर भी नक्सलियों ने गोलीबारी की। सुरक्षा बल के जवानों की जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली भाग निकले। नारायणपुर और दंतेवाड़ा में कुछ स्थानों से टिफिन बम मिले। नुकनपाल में दस किलो इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) बरामद किया गया।। नारायणपुर के सुलेंगी गांव में भी सुरक्षा बल पर नक्सलियों ने गोलीबारी की।
राजनांदगांव जिले से मुख्यमंत्री रमन सिंह के अलावा तीन मंत्री लता उसेंडी, केदार कश्यप और विक्रम उसेंडी भी चुनाव मैदान में थे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार कुजूर ने बताया कि कोंटा, दंतवाड़ा और बीजापुर विधानसभा क्षेत्र के करीब एक दर्जन बूथों में शून्य मतदान की जानकारी प्राप्त हुई है। नक्सलियों के भय से कोई यहां वोट देने नहीं पहुंचा। बस्तर संभाग में सुबह मतदाताओं में वोट डालने के लिए उत्साह कम देखा गया, लेकिन नौ बजे के बाद भीड़ बढ़ने लगी। महिला मतदाताओं ने जमकर उत्साह दिखाया। यहां करीब 50 फीसद मतदान हुआ। बीजापुर में इस बार भी सबसे कम 24 फीसद वोटिंग हुई। राजनांदगांव की छह विधानसभा सीटों में शुरुआत से ही केंद्रों में मतदाताओं की लंबी कतार लग गई। यहां सबसे ज्यादा 82 फीसद से अधिक वोट पड़े।
दरभा घाटी में जीता लोकतंत्र
रायपुर। नक्सली हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या के बाद सुर्खियों में आई दरभा घाटी में लोकतंत्र की जीत हुई है। घाटी के मतदाताओं ने 80 फीसद तक मतदान कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को चौंका दिया। दरभा घाटी के 25 मतदान केंद्र जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में और 34 मतदान केंद्र चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र में हैं।
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Dispute in congress on modi


narendra modi

Hindi News:जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस का असमंजस सतह पर आ गया है। पार्टी में खास मुकाम रखने वाले सरकार के मंत्री मोदी पर आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस कोर ग्रुप के सदस्य और वित्त मंत्री पी चिदंबरम मोदी को अगले आम चुनाव के लिए बड़ी चुनौती मान रहे हैं तो गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान ने भी चिदंबरम के बयान को काटते हुए कहा कि मोदी को मसीहा के तौर पर पेश किया जा रहा है, जो वे हैं नहीं।
सूत्रों के मुताबिक पीएम पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद मोदी को लेकर देश में बन रहे माहौल के चलते अंदरूनी तौर पर कांग्रेस भी उन्हें चुनौती मान रही है, लेकिन वह इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती। चिदंबरम के उन्हें चुनौती मानने और एक पार्टी के तौर पर नजरअंदाज न करने की नसीहत से कांग्रेस का यह असमंजस सामने आ गया है। इतना ही नहीं, वित्त मंत्री के यह कहने से कि भाजपा नेताओं को एकजुट करने में मोदी कामयाब रहे हैं, कांग्रेस मोदी की इस तारीफ से खुद को असहज महसूस कर रही है। लिहाजा, सोमवार को पार्टी ने चिदंबरम के बयान से नुकसान की भरपाई की भरपूर कोशिश की।
पत्रकारों से रू-ब-रू शिंदे ने स्पष्ट लफ्जों में कहा, 'कांग्रेस के लिए मोदी कोई चुनौती नहीं है।' यह कहने पर कि चिदंबरम ने तो उन्हें चुनौती माना है, शिंदे ने कहा, 'मैं दूसरों के बारे में नहीं कह सकता, लेकिन अपनी और पार्टी की तरफ से यह बात कह रहा हूं।' इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा, कांग्रेस बहुत बड़ी और पुरानी पार्टी है। 120 साल की इस पार्टी के सामने बहुत बड़ी-बड़ी चुनौतियां आती रही हैं। वह हर बार उनसे पार पाती रही है। 2004 में राजग का 'इंडिया शाइनिंग' भी बड़ी चुनौती थी, फिर भी कांग्रेस जीती और नौ साल से सरकार में है।
मोदी पर कांग्रेस की इस दुविधा ने पार्टी में पहली बार खुली बहस का रूप नहीं लिया है। इससे पहले गत जून में केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने भी प्रबंधन क्षमता और विचारधारा को लेकर मोदी को कांग्रेस के लिए चुनौती माना था। जिसे पार्टी महासचिव शकील अहमद ने खारिज किया था। वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तो जयराम को गुजरात जाकर भाजपा में शामिल होने की नसीहत तक दे दी दी थी। पिछले दिनों कानून मंत्री कपिल सिब्बल भी मोदी को राहुल गांधी के बजाय उनसे बहस की चुनौती दे चुके हैं।
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Congress leader will not attend Opinion Poll



Hindi News: नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने पिछले दिनों निर्वाचन आयोग से मांग की थी कि जनमत सर्वेक्षण पर बैन लगनी चाहिए। जनमत सर्वेक्षण पर बैन लगाने को लेकर चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से राय मांगी थी। इस मसले पर एक राय नहीं बन पाने के कारण चुनाव आयोग ने कोई निर्देश जारी नहीं किया। चुनाव आयोग से कोई निर्देश पारित नहीं होने पर अंत में हारकर कांग्रेस पार्टी ने फैसला लिया है कि जनमत सर्वेक्षण की चर्चा में पार्टी का कोई भी नेता शामिल नहीं होगा।
इससे पहले ओपिनियन पोल [जनमत सर्वेक्षण] पर प्रतिबंध लगाने संबंधी चुनाव आयोग के प्रस्ताव को भाजपा ने खारिज कर दिया। उसका कहना है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन होगा।
भाजपा ने आयोग के भेजे जवाब में कहा है कि ओपीनियन पोल पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग ने जो आधार दिए हैं वे संविधान के अनुच्छेद 19 [2] में निहित तत्वों में शामिल नहीं हैं। भाजपा का कहना है कि ओपीनियन पोल एक्जिट पोल से अलग हैं। ओपीनियन पोल में जहां ऐसे लोगों के विचार लिए जाते हैं जो मतदान कर सकते हैं और नहीं भी। जबकि एक्जिट पोल में सिर्फ मतदान में शामिल लोगों की राय ली जाती है। इसी वजह से मतदान के दौरान एक्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाया गया।
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Intense power struggle between BJP and SP


 Narendra Modi

Hindi News: लखनऊ [राज बहादुर सिंह]। बीते महीने भाजपा, कांग्रेस और सपा के बीच त्रिकोणीय रैली युद्ध के बाद नवंबर में यह जंग द्विपक्षीय रहेगी। ऐसे संकेत हैं कि अक्टूबर में रैली युद्ध की शुरुआत करने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नवंबर में सूबाई रैली जंग से दूर रहेंगे और जोर आजमाइश भाजपा व सपा के बीच सिमट जाएगी।
सूत्रों के अनुसार पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव की व्यस्तता के चलते कांग्रेस नवंबर में राहुल गांधी की रैलियां उत्तर प्रदेश में नहीं करने पर विचार कर रही है। राहुल ने दस अक्टूबर को अलीगढ़, रामपुर के अलावा 30 अक्टूबर को हमीरपुर और सलेमपुर में भी रैलियों को संबोधित किया था। पार्टी ने उनकी रैली को धन्यवाद रैली की संज्ञा देते हुए इस बात की भरसक कोशिश की थी कि इसकी तुलना भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अथवा सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की रैलियों से न की जाए। इसके पीछे पार्टी का तर्क था कि राहुल की रैलियां चुनावी नहीं अपितु खाद्य सुरक्षा बिल पारित कराने पर धन्यवाद देने के मकसद से आयोजित की गई थी।
बहरहाल, बात जब बंद कमरों से निकल कर बाहर खुले मैदान में आ जाए तो ऐसे तर्क गले नहीं उतरते और कांग्रेस के न चाहने पर भी राहुल की रैलियों की तुलना भाजपा और सपा की रैलियों से हुई और तुलना के निष्कर्ष कांग्रेस के लिए तसल्लीबख्श नहीं रहे। रामपुर और सलेमपुर में तो गनीमत रही, लेकिन अलीगढ़ और हमीरपुर की रैलियों ने निराश किया। आठ नवंबर को नरेन्द्र मोदी बहराइच में रैली कर रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने कानपुर और झांसी में रैलियां की थी और जनता की भागीदारी के लिहाज से दोनों ही बेहद कामयाब रहीं। इसी तरह सपा की आजमगढ़ रैली भी हिट रही। अब 21 नवंबर को नरेंद्र मोदी आगरा और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव बरेली में अपने-अपने दलों की रैली के मुख्य आकर्षण होंगे।
Source- News in Hindi 
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