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A unique decision by Lok Adalat on live in


live in relation

Hindi News:खंडवा । मध्य प्रदेश के खंडवा में एक लोक अदालत ने बेहद अनोखा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता व्यक्ति से पत्नी और लिव इन पार्टनर के साथ बराबर वक्त गुजारने को कहा है। इसके तहत अदालत ने कहा कि व्यक्ति को अपनी पत्नी और लिव इन के साथ 15-15 दिन व्यतीत करना चाहिए।
अपने आदेश में जज गंगा चरण दुबे ने शनिवार को कहा कि पत्नी, लिव इन पार्टनर समेत तीनों एक ही छत के नीचे रहें और व्यक्ति आपसी सहमति से 15-15 दिन इन दोनों के साथ समय व्यतीत करे।
ओंकारेश्वर स्थित प्रदेश बिजली विभाग से हाल ही में रिटायर हुए व्यक्ति के घर में तीन कमरे हैं। समझौते के अनुसार, वह बीच वाले कमरे में रहेगा और अगल-बगल के कमरों में उसकी पत्नी और महिला मित्र रहेंगी। साथ ही बीच वाले कमरे में उन दोनों के कमरे के दरवाजे खुलेंगे और उस व्यक्ति को अपनी पत्नी और लिव इन पार्टनर के साथ 15-15 दिन गुजारने होंगे। इसके अलावा व्यक्ति की चल और अचल दोनों संपत्तियों में दोनों का बराबर का हिस्सा भी होगा।
पत्नी ने लोक अदालत में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें उसने यह आरोप लगाया था कि उसका पति अपना ज्यादातर वक्त लिव इन पार्टनर के साथ गुजारता है और पिछले दो साल से वह उनके घर में ही रह रही है।
Source- News in Hindi 
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Suprem Court order BMC to stop work on campa cola society


Campa cola society

Top Hindi News:मुंबई। कैंपा कोला हाउंसिंग कालोनी के निवासियों द्वारा लगातार संघर्ष करने का सफल परिणाम सामने का गया। सोसाइटी केलोगों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बीएमसी की कार्रवाही पर रोक लगा दी है। इसके लिए कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है कि 31 मई 2014 तक कैंपा कोला कालोनी पर कोई कार्रवाही न हो।
इससे पहले सोसाइटी के फ्लैट्स तोड़ने पहुंची बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) टीम ने बुलडोजर से कॉलोनी के कंपाउंड का दरवाजा तोड़ दिया है। इस दौरान वहां पुलिस और सोसाइटी के लोगों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसके अलावा, पुलिस ने गेट पर खड़े होकर विरोध कर रहे सोसाइटी के कुछ लोगों को हिरासत में भी ले लिया है।
गौरतलब है कि मुंबई के कैंपा कोला हाउसिंग कॉलोनी के निवासियों ने मंगलवार को परिसर से बाहर जाने से मना कर दिया था। फ्लैट खाली करने की सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा खत्म होने के बाद पुलिस अधिकरियों की टीम बिल्डिंग को तोड़ने पहुंची थी, लेकिन उसे लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने सोसायटी के मेन गेट पर ताला जड़ दिया था। निवासियों ने रास्ता अवरूद्ध करने के लिए गेट के पास अपनी गाड़ियों को लगा दिया था।
Source- News in Hindi 
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I am being introduced as Dracula : Asaram

 rape case

Hindi News: नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। यौन उत्पीड़न के आरोप में जेल में बंद आसाराम को शुक्रवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से निराशा ही हाथ लगी। आसाराम की ओर से दलील दी गई मीडिया कवरेज में उन्हें बच्चों का रक्त पीने वाले ड्रैकुला के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन अदालत ने मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की उनकी मांग खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम की पीठ ने आसाराम के बारे में मीडिया को खबर चलाने से रोकने का आदेश देने से इन्कार करते हुए कहा कि उन्होंने मीडिया में रिपोर्ट किए गये हर शब्द को देखा है और उन्हें उसमें दखल देने का कोई कारण नजर नहीं आता। पीठ का कहना था कि अदालत मीडिया को क्यों रोके? जब पुलिस और अन्य लोगों से वे सूचनाएं हासिल कर रहे हैं तो हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं।
इससे पहले आसाराम के वकील ने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह उनके बारे में बढ़ा-चढ़ा कर खबरें दिखा रहा है। देश में इतने अखबार और चैनल हैं। वे किस-किस के खिलाफ मामला दाखिल करें, लेकिन पीठ इन दलीलों से प्रभावित नहीं हुई और मामले में दखल देने से इन्कार करते हुए कहा कि उनके पास और भी विकल्प हैं। इससे पहले भी एक बार कोर्ट मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की आसाराम की मांग ठुकरा चुका है
Source- News in Hindi