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17 parties together against communalism, says Nitish at convention on Third Front


Delhi

Hindi News:जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आम चुनाव से पहले मोदी बनाम राहुल के सीधे मुकाबले के माहौल के बीच तीसरी ताकत ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवा दी है। वाम दलों के न्योते पर बुधवार को सपा, जदयू, अन्नाद्रमुक, बीजद, जद (एस), झाविमो और अगप सहित 17 छोटी-बड़ी पार्टियां एक मंच पर आ खड़ी हुर्ई। केंद्र के सत्तारूढ़ मोर्चे में शामिल राकांपा ने भी इसमें खुल कर शिरकत की। हालांकि, सम्मेलन में शामिल पार्टियों ने किसी चुनाव पूर्व गठबंधन से इन्कार किया है, लेकिन मोदी की लोकप्रियता को लेकर अब इन पार्टियों में एकजुटता पर नए सिरे से कसमसाहट भी साफ दिखाई दी।
सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुटता के नाम पर बुलाए गए इस सम्मेलन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार ने इस जुटान को चुनावी एकजुटता में भी बदलने की खुली वकालत की। उन्होंने कहा, 'सवाल पूछा जा रहा है कि क्या यह सम्मलेन एक नए मोर्चे के गठन के लिए है। यह सही है कि अभी ऐसी कोई बात नहीं है। लेकिन फासीवादी और सांप्रदायिक ताकतों के बढ़ते खतरे को देखते हुए जितना अधिक से अधिक हो सके लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होना होगा।'
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने भी कहा कि जितने दलों के नेता यहां मौजूद हैं, अगर सभी इकट्ठा हो जाएं तो सांप्रदायिक ताकतें देश में कहीं सिर नहीं उठा पाएंगी। यह प्रयोग हम यूपी में कर चुके हैं। यूपी में हमने जब-जब सख्ती की, सांप्रदायिक ताकतों को मुंह की खानी पड़ी।' उन्होंने भरोसा भी दिलाया कि ये सभी दल जहां भी एक साथ खड़े होंगे, वे उनका साथ देंगे।
हालांकि शुरुआत में इस सम्मेलन को गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा दलों की एकजुटता बढ़ाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन आखिरकार यह पूरी तरह से भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुटता के रूप में बनकर रह गया। किसी भी दल ने केंद्र की सत्तारुढ़ सरकार के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला। यहां तक कि उत्तर प्रदेश में इतने बड़े दंगों के बावजूद सपा के मुखिया मुलायम ही सम्मेलन के सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभरते नजर आए।
Source- News in Hindi 

JDU leader Shivanand Tiwari praises Modi, attacks Nitish


 JDU

Hindi Newsजागरण न्यूज नेटवर्क, बिहारशरीफ। जदयू के राजगीर चिंतन शिविर में मंगलवार को वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी पार्टी के लिए चिंता का सबब बन गए। उन्होंने मुखर होकर न केवल नरेंद्र मोदी की तारीफ की बल्कि नीतीश कुमार को आगाह भी कर दिया कि नमो को हल्के में लिया तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
तिवारी ने कहा, मैं नरेंद्र मोदी का विरोधी हूं, लेकिन संघर्ष क्षमता को देखकर उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकता। जिस तरह से मोदी आगे बढ़ रहे है उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। नीतीश, लालू की तरह तिवारी को भी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की उपज माना जाता है। शिविर में ही बिहार के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा, अफसर कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। वे बेहिचक अपनी बात कहेंगे। इसके लिए वे बर्खास्त होने को भी तैयार हैं। पार्टी मंच से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को उनके प्रहारों का जवाब दिया।
नमो के करारे राजनीतिक हमले और पटना में हुए सिलसिलेवार धमाकों से पैदा हालात की तपिश झेल रहे नीतीश कुमार को मंगलवार को भी राहत नहीं मिल सकी। इस बार पार्टी नेता शिवानंद तिवारी ने सामने खड़े होकर मोदी की तारीफ की और उन्हें खरी-खरी सुनाई। तिवारी ने कहा, एक चाय बेचने वाला आज जिस मुकाम पर है, उसे देखकर उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर उन्मुख होकर उन्होंने कहा- आप चाटुकारों से घिर गए हैं। मुझे अच्छी तरह से मालूम है जदयू और बिहार सरकार कैसे चल रही है। अब हम शांत नहीं बैठेंगे। चाहे इसके लिए मुझे कोई कुछ कहे। हमारी हमेशा उपेक्षा होती रही है- मुझे कुछ भी कहने नहीं दिया जाता। उपेक्षा सहने की एक सीमा होती है। सत्तर साल की उम्र में वह किसी के आगे माथा नहीं टेक सकते।
मंच से मोदी की तारीफ और नीतीश पर हमला करने के चलते शिविर में उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई लेकिन शिवानंद रुके नहीं-बोलते रहे। वह जिस समय बोल रहे थे-उसी समय वरिष्ठ पार्टी नेता रामसुंदर दास अचानक बीमार हो गए। नीतीश कुमार उन्हें लेकर अस्पताल चले गए। कुछ देर बाद जब नीतीश वापस लौटे तब शिवानंद का भाषण अंतिम दौर में था, इसलिए महज कुछ ही मिनट नीतीश को जली-कटी सुननी पड़ी।
Source- News in Hindi

Modi Vs Nitish Kumar, War of words begain


 Narendra Modi

Hindi Newsपटना। भाजपा और जदयू के दिग्गज नेताओं ने बिहार की भूमि पर वाक युद्ध छेड़ा। एक के बाद एक वाक्यों के बाण चलाए जा रहे थे। भाजपा की ओर से नरेंद्र मोदी और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार से एक-दूसरे के खिलाफ आलोचनाओं की झड़ी लगा दी। आइये हम भी देखें इन दोनों ने बिहार के इतिहास और स्थानीय लोगों पर कैसे खेली राजनीति।
नरेंद्र मोदी
- बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है। . गुप्तकाल में चंद्रगुप्त की राजनीति से भारत का साम्राज्य निर्मित हुआ।
- ज्ञान युग का सूत्रपात करने वाले नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय .।
- बिहार में हुंकार रैली। हुंकार किसका ., हुंकार किसका? यह हुंकार करोड़ों-करोड़ गरीबों का है।
- सीता माता की धरती है यह। सीता माता का अपहरण हुआ था। वानर उन्हें खोजने निकले। उपाय नहीं सूझ रहा था। हनुमान की नजर जामवंत पर पड़ी। बोले-'पवन तनय बल पवन समाना,. का चुप साध रहा बलवाना।'
- . सिकंदर भी गंगा तट (पाटलिपुत्र) पर हारा।
- जो जेपी को छोड़ सकता है, वह बीजेपी को छोड़ सकता है।
- लोग खुद को लोहिया का शिष्य कहते हैं। लोहिया ने गैर कांग्रेसवाद का नारा दिया था। लेकिन लोहिया के चेले ने लोहिया की पीठ में खंजर भोंक कांग्रेस की गोद में जा बैठे हैं। लोहिया-जेपी की आत्मा इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
- एक कथा सुनोगे। (उन्होंने भोज के दो मौकों के हवाले नीतीश को हिप्पोक्रेट यानी ढोंगी करार दिया।)
- बिहार के सीएम, मेरे मित्र गुजरात आए थे। एक शादी में। हम भी थे। मित्र मेहमान थे। हमने उन्हें भांति -भांति के पकवान खिलाये। अतिथि देवो भव: का भारतीय संस्कार निभाया। मगर मेरे मित्र ने तो हमें भोज का निमंत्रण देकर उसे रद्द कर दिया।
- पीएम की मीटिंग थी। लंच भी था। एक टेबल पर चार-पांच सीएम बैठ कर खाते हैं। मैंने देखा मेरे मित्र (नीतीश) खाना नहीं खा रहे हैं। इधर-उधर देख रहे हैं। मैंने मित्र से कहा-कोई कैमरा वाला नहीं है, खा लो। हिप्पोक्रेसी (ढोंग) की भी हद होती है।
Source- News in Hindi