Top Hindi News: नई दिल्ली। मतदान के अपने अधिकार के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता का ही असर है कि पांचों विधानसभा चुनावों में जबरदस्त चुनाव मतदान हुए। मतदान की इस वृद्धि का असर छह महीने बाद होने वाले लोक सभा चुनाव में भी परिलक्षित होने के आसार हैं। मतदाताओं और मतदान की इस तस्वीर की बदलती प्रवृत्ति और उसके कारणों पर एक नजर :-
दिल्ली :
सीटें-70 मत प्रतिशत
2008- 57.58
2013- 66.00
कारण : नए मतदाताओं और युवाओं की हिस्सेदारी। पहली बार नोटा प्रावधान। चुनाव आयोग, मीडिया और गैरसरकारी संगठनों के जागरुकता कार्यक्रम, सोशल मीडिया का असर।
छत्तीसगढ़ :
सीटें- 90 मत प्रतिशत
2008- 71.06
2013- 77.06
कारण : चुनाव आयोग की प्रभावी पहल। युवाओं, महिलाओं और नए मतदाताओं की बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी, सशस्त्र बलों की दमदार मौजूदगी एवं पार्टियों के सार्थक प्रयास।
मध्य प्रदेश :
सीटें- 230 मत प्रतिशत
2008 69.78
2013 72.52
कारण: वोटरों को जागरूक करने वाले सिस्टमेटिक वोटर एजुकेशन और निर्वाचन सहभागी कार्यक्रमों का दिखा असर। हालांकि उम्मीद से थोड़ा कम मतदान हुआ।
मिजोरम :
सीटें-40 मत प्रतिशत
2008 82.00
2013 81.29
कारण : उच्च साक्षरता दर एक बड़ा कारक। चुनावों को त्योहार की तरह लिया गया। कई गैर सरकारी संगठनों की अपील और पहल का मतदाताओं में दिखा सकारात्मक असर।
राजस्थान :
सीटें: 200 मत प्रतिशत
2008 67.15
2013 75.20
कारण : महिलाओं और युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी रही। वोट डालने संबंधी चुनाव आयोग के अभियान का उत्साहजनक नतीजा निकला। (मतदान 199 सीटों पर)
Source- News in Hindi
No comments:
Post a Comment