Hindi News: बाराबंकी। बाराबंकी जिले की एक पंचायत के फरमान से मोहम्मद इसरार का परिवार दो माह से दाने-दाने को मोहताज है। ईदगाह और कब्रिस्तान के लिए अपनी जमीन न देने पर उसका हुक्का-पानी बंद है। सामाजिक बहिष्कार के साथ उसके बच्चों की दूध, दवा और पढ़ाई पर भी रोक है। ग्रामीणों और रिश्तेदारों को इस परिवार से बात और मदद करने पर भी प्रतिबंध है।
मामला सफदरगंज क्षेत्र के रामपुर कटरा का है। इसरार सब्जी बेचकर अपने और दिवगंत भाई के परिवार का जीवन यापन करता है। इसरार के अनुसार, रामपुर ईदगाह से सटी हुई उसकी 0.114 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन है। इसे उसने भाई के बच्चों के विवाह के लिए रखा है। ग्राम सभा के चौधरी [सरपंच] इस जमीन को ईदगाह और कब्रिस्तान केलिए जबरन लेना चाहते थे। इंकार करने पर एक माह के अंतराल में पांच बार पंचायत की बैठक हुई। गत 22 अक्टूबर को डुग्गी पिटवाकर फरमान जारी कर दिया कि उसके परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया गया है। उससे न कोई बात करेगा, न किसी प्रकार की मदद। दूध देने वाले प्रेमचंद्र को भी रोक दिया गया। मदरसों से बच्चों का नाम काट दिया गया। गांव का कोई डॉक्टर उसे अथवा उसके परिवार को दवा भी नहीं दे सकता। जिस बाजार में वह सब्जी बेचता था उसे वहां दुकान लगाने से भी रोक दिया गया। यही नहीं प्रधान पति और चौधरी के कहने पर गांव के कोटेदार रफीक ने दो माह से राशन भी बंद कर रखा।
भुक्तभोगी इसरार का कहना है कि रचच्यपाल, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग सहित जिलाधिकारी से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं गांव की प्रधान रिजवाना बानो के पति व प्रतिनिधि आदिल ने बताया कि यह सारी देन पंचायत के चौधरियों की है। इसरार ने आवाम से जमीन को लेकर धोखाधड़ी की है जिसके कारण ऐसा हुआ है।
थानाध्यक्ष इंद्रेश यादव ने बताया कि सोमवार को डाक में शिकायती पत्र मिला है, जिसमें दो माह पूर्व से इसरार का समाजिक बहिष्कार किए जाने का पता चला है। एसडीएम सिरौली गौसपुर शशीकांत प्रसाद के अनुसार, जांच में पता चला कि कोटेदार ने दो माह से राशन नहीं दिया था। दो माह का राशन इसरार के घर पहुंचा दिया गया है।
Source- News in Hindi
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