दतिया, नई दुनिया। भगदड़ के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मी न केवल जिम्मेदार थे, बल्कि उन्होंने हादसे के बाद भी इंसानियत को शर्मसार करने वाली करतूतों को अंजाम दिया। पुलिस के जवानों ने कई शवों को सिंध नदी में फेंक दिया और मृत महिलाओं की देह से उनके गहने भी उतार लिए।
प्रत्यक्षदर्शी मनोहर सिंह पाल बताते हैं कि भगदड़ में मरने वाले बच्चों के शवों को पुलिसकर्मियों ने पुल से उठाकर नदी में फेंका था। जवानों ने मेरे भतीजे को भी नदी में फेंक दिया था। किसी तरह उसे नदी से निकाल कर लाया गया। कुछ पुलिसकर्मी पुल पर मृत पड़ी महिलाओं के शरीर से जेवर भी नोच रहे थे। इसी तरह भगुवापुरा निवासी भारत लोहपीटा ने मेले में दुकान लगा रखी थी। भगदड़ में उनके 11 वर्षीय बेटे जितेंद्र की मौत हो गई। जितेंद्र के शव को भी पुलिस वालों ने उठाकर नदी में फेंक दिया था।
उमा ने दतिया जाने की अनुमति मांगी
भोपाल। वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि उन्हें घटनास्थल पर जाने की अनुमति दी जाए। आयोग उन्हें अनुमति देने से इन्कार कर चुका है।
Source- News in Hindi
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