Hindi News: उचकागांव/गोपालगंज [जासं]। गरीबी दूर करने के लिए गुजरात में रोजी-रोटी को जाना मीरगंज के हकीम टोला के युवक हनीफ को महंगा पड़ा। गुजरात में बिना कसूर 13 साल जेल में बंद होने के बाद छूटकर हनीफ घर पहुंचा तो उसकी आपबीती सुन पूरा गांव रो पड़ा।
मीरगंज थाना की सवरेजी पंचायत के हकीम टोला निवासी मरियम खातून का पुत्र हनीफ मियां 15 साल पूर्व गुजरात के अहमदाबाद नगर में कमाने गया था। अहमदाबाद में मजदूरी करने के बाद हनीफ दो वर्षो तक घर रुपये भेजता रहा। लेकिन वर्ष 2000 में गुजरात में हुए गोधरा कांड के बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला।
परिवार और गांव वालों ने उसे मरा हुआ मान लिया। पंद्रह साल पूर्व अपने घर से निकला हनीफ जब रविवार को अचानक घर पहुंचा तो परिजनों के साथ ही गांव के लोग चकित हो गए। उसने अपनी आपबीती सुनाई तो पूरा गांव रो पड़ा।
हनीफ ने बताया कि गोधरा कांड के आरोप में गुजरात पुलिस ने उसे जेल में डाल दिया था। वहां 13 साल तक विचाराधीन कैदी के रूप में बंद रहा। उसके साथ गिरफ्तार स्थानीय साथी चार-पांच वर्ष में जेल से छूट गये। लेकिन उसका अपने घर से कोई संपर्क नहीं होने के कारण वह 13 वर्षो से विचाराधीन कैदी के रूप में अहमदाबाद जेल में बंद रहा। जुलाई माह में उसे बेकसूर मानते हुए जेल से छोड़ा गया। पैसा नहीं था तो दो माह मजदूरी करके पैसा इकट्ठा किया और उसके बाद वह घर पहुंच सका।
Source- News in Hindi
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