Hindi News:नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। डौंड़िया खेड़ा में खुदाई से भले ही करोड़ों लोग एक हजार टन सोना निकलने की उम्मीद पाले हों, लेकिन एएसआइ को अब तक सबसे बड़ास्वर्ण भंडार मात्र 12 किलोग्राम का ही मिला है। अलबत्ता, एएसआइ का यह जरूर मानना है कि डौंड़िया खेड़ा में सोने के भंडार भले न मिले, लेकिन खुदाई से वहां पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं प्रचुर मात्रा में मिल सकती हैं। इसके साथ ही एएसआइ ने खुदाई के लिए सेना के इस्तेमाल से साफ इन्कार कर दिया।
एएसआइ के अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मणि के अनुसार 2001-02 में मुजफ्फरनगर के मांडी स्थित पुरातात्विक स्थल से 12 किलो सोने के गहने मिले थे। किसी भी दूसरे पुरातात्विक स्थल से इससे अधिक मात्रा में सोना अभी तक नहीं मिला है। जाहिर तौर पर डौंड़िया खेड़ा में भी एएसआइ एक हजार टन सोना मिलने की उम्मीद नहीं पाले है, लेकिन ज्यूलॉजिकल सर्वे इंडिया की रिपोर्ट का हवाला देकर एएसआइ के महानिदेशक प्रवीण श्रीवास्तव अब भी खुदाई स्थल के नीचे बड़ी मात्रा में धातु होने का दावा कर रहे हैं। उनके अनुसार खुदाई के बाद ही इस धातु के रहस्य से पर्दा उठ सकता है। उन्होंने डौंड़िया खेड़ा में खुदाई को सही ठहराते हुए कहा कि यह केवल जमीन के भीतर मौजूद 'धातु' की खोज के लिए नहीं हो रही है, बल्कि इस इलाके के पुरातात्विक रहस्य से पर्दा उठाने के लिए जरूरी है। उनके अनुसार एएसआइ के पहले महानिदेशक जनरल कर्निघम ने चौथी और पांचवीं सदी के चीनी यात्रियों फाहियान और ह्वेंन सांग के यात्रा वृतांत का हवाला देते हुए डौंड़िया खेड़ा और संग्रामपुर के इलाके को पुरातात्विक रूप से अहम बताया था। खुदाई के लिए सेना बुलाने की शोभन सरकार की मांग का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं नष्ट हो सकती
Source- News in Hindi
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