कानपुर [प्रवीन शर्मा]। गुजरात के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 19 अक्टूबर को बुद्धा पार्क से हुंकार भरेंगे। लोकसभा चुनाव के लिए 'ऑपरेशन यूपी' का आगाज मोदी कानपुर से ही क्यों कर रहे हैं? यह सवाल उठना जायज है लेकिन कानपुर की सरजमीं पर हुईं ऐतिहासिक रैलियों और उनके परिणाम इस बात की चुगली कर रहे है कि भाजपा 1999 के बाद 2013 में फिर टोटका करना चाहती है।
उस समय अटल बिहारी बाजपेई की रैली के बाद भाजपा केंद्र की सत्ता में आई थी और मोदी फेस वैल्यू हैं। हालांकि इसे पहले इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी इस टोटके पर खरे उतर चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजनीति में परिवर्तन की बयार जब कभी भी चली, उसमें कानपुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। या यूं कहें कि कनपुरियों ने हमेशा चढ़ते सूरज को सलाम किया।
इसके पुख्ता सुबूत भी हैं। वर्ष 1977 के चुनाव में आपातकाल की छाया इस कदर हावी हुई कि कांग्रेस के पास गंवाने को कुछ नहीं बचा, लेकिन 1980 के चुनाव में कांग्रेस फिर से मजबूती के साथ खड़ी हो गई। तब इंदिरा गांधी ने यहां देर रात तक रोड शो किया था और फूलबाग की रैली भी ऐतिहासिक रही थी। इंदिरा फिर से पीएम की कुर्सी पर विराजमान हुई थीं।
इंदिरा जी के निधन के बाद वर्ष 1991 में राजीव गांधी ने फिर रात में रोड शो किया और कांग्रेस फिर केंद्र की सत्ता में काबिज हुई। वर्ष 1998 के चुनाव में भाजपा ने अटल बिहारी बाजपेई को प्रोजेक्ट किया। भाजपा को लेकर देश में एक बूम बनी और तब अटल जी ने फूलबाग मैदान से चुनाव का शंखनाद किया। टोटका इस बार भी काम आया और राजग ने केंद्र की सत्ता संभाली।
Source- News in Hindi
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