Delhi election 2013: नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव नतीजों पर सहयोगियों की आलोचना के साथ अब कांग्रेस पार्टी में भी चुनावी रणनीति को लेकर रोष और व्यापक बदलाव के स्वर उठने लगे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बाद कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी मध्यप्रदेश में कांग्रेस की हार से जबरदस्त क्षुब्ध हैं। वो इस हार के कारण कांग्रेस नेतृत्व से खासे खफा हैं। वहीं मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह के बायकॉट का एलान कर दिया गया है। सत्यव्रत ने दिग्विजय के बहाने कांग्रेस आलाकमान पर हमला बोला है। साथ ही महिदपुर से पराजित कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना परूलेकर ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इससे पहले सत्यव्रत ने कहा था कि पिछले दो साल से कांग्रेस नेतृत्व से बार-बार कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश की जनता दिग्विजय सिंह को सबसे ज्यादा नापसंद करती है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व उन लोगों की आवाजें सुनता नहीं हैं जो कड़वी बात करते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस को हानि पहुंचाने वाले दिग्विजय सिंह को पूरे चुनाव में सबसे अहम स्थान दिया गया।
चतुर्वेदी ने दिग्विजय पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेशाध्यक्ष भी उनका आदमी, नेता प्रतिपक्ष भी उनका आदमी, वही टिकट बांट रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व आखिर करना क्या चाहता है। जिस आदमी को मध्यप्रदेश के लोग सबसे ज्यादा नापसंद करते हैं, उसे ही सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।' चतुर्वेदी यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व सिर्फ चापलूसों की बात सुनता है। सत्यव्रत कांग्रेस नेतृत्व से भी खासे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग खरी बात करते हैं, पार्टी के फायदे की बात करते हैं, उन्हें सुना ही नहीं जाता है।'
उन्होंने कहा कि आपने सब कर के देख लिया। भूरिया को अध्यक्ष बनाकर देख लिया। मोहन प्रकाश जी को लाकर देख लिया। अब उन्हें हटाकर देख लो। कांग्रेस नेतृत्व को जो समझ आए, वह करे। जब अप्रिय बातों को सुनना ही नहीं है तो क्या करें।' गौरतलब है कि चतुर्वेदी उन नेताओं में से हैं, जिन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार अभियान की कमान सौंपने की वकालत की थी। उन्हें प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह का धुर विरोधी माना जाता है।
Source- News in Hindi
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