Top Hindi News: जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के एक जज को कठघरे में खड़ा करने वाली महिला वकील कोलकाता की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडिशियल साइंस से ग्रेजुएट करने के बाद एक समाजसेवी संगठन के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने जर्नल ऑफ इंडियन लॉ एंड सोसाइटी के ब्लॉग में अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में लिखते हुए यह भी बयान किया है कि न्यायपालिका में यह समस्या आम है। इसके अलावा उन्होंने एक साक्षात्कार में यह भी कहा है कि इसी जज ने तीन अन्य लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया। इनमें दो लड़कियों से संपर्क कर उन्होंने अपनी बात कहने के लिए प्रेरित किया, लेकिन अपने करियर पर असर पड़ने के भय से वे आगे आने को तैयार नहीं हुई।
पीड़ित महिला वकील के अनुसार वह चार और ऐसी लड़कियों के बारे में जानती हैं जो दूसरे जजों के उत्पीड़न का शिकार बनीं। इनमें से ज्यादातर तब उत्पीड़ित हुई, जब वे जजों के चैंबर में थीं, इसलिए उनके साथ उतना बुरा नहीं हुआ, जितना उनके साथ। पीड़ित महिला वकील ने अपने मामले में जज के नाम का खुलासा न करने और रिपोर्ट दर्ज न कराने के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह उनकी प्रतिष्ठा नहीं गिराना चाहतीं। उन्हें यह भी भरोसा नहीं कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा है कि वह स्वेच्छा से होटल में जज के कमरे में गई थीं। जब बाहर निकलीं तो किसी से कुछ कहा भी नहीं। इसके अलावा कोई गवाह भी नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पीड़ा इसलिए बयान की, क्योंकि वह नहीं चाहतीं कि अन्य महिला वकील ऐसी स्थिति से दो-चार हों।
Source- News in Hindi
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