मुंबई। वर्ष 1996-97 में 'रंगीला' बनाने के लिए मैं हैदराबाद से मुंबई आया था। तब इस शहर ने मुझे मुग्ध कर दिया था। मुंबई में मौजूद भिन्नता और कमियां भी अच्छी लग रही थी। तभी मैंने पहली बार अंडरवर्ल्ड शब्द सुना था। उसके पहले 'दीवार' जैसी फिल्म में जरूर अंडरवर्ल्ड से परिचय हुआ था, लेकिन वह मेरे लिए खलनायक ही था। मुंबई आने के बाद रोजाना अंडरवर्ल्ड की खबरें पढ़ने से मेरी रुचि जागी। तभी ख्याल आया कि हमेशा उनकी खबरें हत्या के बाद सुनाई पड़ती हैं। वे अपनी जिंदगी में क्या करते होंगे? इसी ख्याल से मैंने 'सत्या' बनाई थी।
उसके पंद्रह सालों के बाद 'सत्या 2' लेकर आ रहा हूं। इस दरम्यान अंडरवर्ल्ड पर आधारित अनेक फिल्में बनी हैं। हम अंडरवर्ल्ड के सभी पहलुओं से परिचित हुए हैं। पिछले सात-आठ सालों में अंडरवर्ल्ड की खबरें कम हो गई हैं। ऐसा मान लिया गया है कि अब मुंबई में संगठित अंडरवर्ल्ड नहीं है। मेरे विचार में अंडरवर्ल्ड की मुख्य वजह है अमीरी और गरीबी का फर्क। जो अभी तक समाज में मौजूद है। व्यवस्था से नाखुशी अभी तक है। मुझे ऐसा कोई तार्किक कारण नजर नहीं आता कि मैं अंडरवर्ल्ड खत्म होने की बात मान लूं। यह जरूर हुआ है कि अंडरवर्ल्ड के अधिकांश सरगना या तो मारे गए या जेल में हैं या विदेश भाग गए हैं।
किसी भी व्यवसाय में वैक्यूम आने पर कोई उद्यमी प्रवेश करता है। बाजार और मांग का नियम आज भी है, पर उत्पादन बंद हो गया है। ऐसे में नया निर्माता पिछली गलतियों से सीख कर नए तरीके अपना सकता है। मैं अंडरवर्ल्ड की स्टडी अपनी फिल्मों के लिए करता हूं। अगर कोई यही स्टडी अपने नए गैंग की स्थापना के लिए करे तो क्या होगा? यही विचार 'सत्या 2' की जमीन बना।
Source- Entertainment News in Hindi
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