Hindi News: नई दिल्ली। दिवाली से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आम आदमी से लेकर उद्यमियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आरबीआई के गर्वनर ने आज मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को बढ़ा दिया। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 0.25 फीसद बढ़ा दिया। अब रेपो रेट 7.50 फीसद से बढ़कर 7.75 फीसद कर दी गई है। इससे होम, ऑटो लोन की ईएमआई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सीआआर को 4 फीसद पर बरकरार रखा गया है। इसके अलावा, एमएफएस को 0.25 फीसद घटा दिया गया है।
जिस दर पर आरबीआइ बैंकों को कम अवधि के कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। यह दर सीधे तौर पर होम, ऑटो, पर्सनल लोन व कॉरपोरेट कर्ज को प्रभावित करती है। वहीं, बैंकों अपनी जमाओं के एक निश्चित अनुपात में अपने पास नकदी रखनी पड़ती है। इसे ही नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) कहा जाता है। इसे बरकरार रखने में आरबीआइ ने बैंकों को कुछ सहूलियत दी है। जरूरी सीआरआर का 99 फीसद तक रोजाना बरकरार रखने की शर्त को घटाकर 95 फीसद कर दिया गया है। इससे बैंकों के पास कर्ज वितरित करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।
साथ ही, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ के तहत बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले आरबीआइ से बहुत ही कम अवधि के लिए कर्ज लेते हैं। एमएसएफ की ब्याज दर को 0.25 फीसद से घटाकर 8.75 फीसद कर दिया गया है। इससे भी बैंकों के पास कर्ज वितरित करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।
Source- News in Hindi
No comments:
Post a Comment