Karvachauth: coldness lapped dedication


 Karvachauth

Hindi News: देहरादून। सुखी दाम्पत्य जीवन की पहली शर्त है पति-पत्‍‌नी के बीच समझदारी और वह कर्मकांड से नहीं, समर्पण से विकसित होती है। समर्पण के लिए दोनों के बीच सहभागिता का होना जरूरी है और ऐसा तभी संभव है, जब मन से मन मिलेंगे। मिलन की इसी घड़ी को कहते हैं करवा चौथ।
कृष्ण पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी को होता है। करवाचौथ पर चंद्रमा को अ‌र्ध्य देने के पीछे मन को मन से जोड़ने का भाव होता है।
रात 8.06 बजे होगा चंद्रोदय
करवाचौथ पर 22 अक्टूबर को उच्च राशि वृषभ का चंद्रमा है। साथ ही अंगारक योग (अंगारक चतुर्थी) भी है। मंगलवार को चतुर्थी आने से यह योग बन रहा है। इस दिन उदयकालीन तिथि तृतीया रहेगी और चंद्रोदय रात 8.06 बजे होगा। उच्च राशि का चंद्रमा और चंद्रोदय के समय लाभ का चौघड़िया भी है। यह सभी योग होने से व्रत का पुण्य और फलदायी रहेगा।
द्रोपदी ने रखा था व्रत- महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को पांडवों की रक्षा और विजय के लिए करवा चौथ व्रत करने की सलाह दी थी। द्रोपदी ने ऐसा ही किया और पांडवों के सिर जीत का सेहरा बंधा। तब से निरंतर कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी को सुहागिनें इस व्रत का पारायण करती आ रही हैं।
भावनाएं सदैव जवान रहें-करवाचौथ पर साज-श्रृंगार का विधान है। इसके पीछे भाव यह है कि विवाहित जीवन की भावनाएं और इच्छाएं सदैव जवान रहें। देखने में आता है कि समय बीतने के साथ वैवाहिक जीवन में नीरवता छाने लगती है। दिन उबाऊ से प्रतीत होने लगते हैं। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं खास साज-श्रृंगार करती हैं। उनके मेंहदी रचे हाथों में समर्पण का ऐसा अहसास होता है, जिसे सामान्य बुद्धि से महसूस नहीं किया जा सकता।
करवाचौथ का पर्व हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी को पड़ता है। चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। वह विघ्नेश्वर हैं और बुद्धि के देवता भी। करवाचौथ इन्हीं विघ्नहर्ता, बुद्धि प्रदाता भगवान गणोश को प्रसन्न करने का दिन है। व्यावहारिक रूप में देखें तो, दाम्पत्य तभी सुखी हो सकता है, जब उसमें कोई विघ्न न आए। इसके लिए पति-पत्‍‌नी के बीच सहभागिता का होना जरूरी है।
पर असल सवाल यह है कि सहभागिता आए कैसे। आचार्य डॉ. सुशांतराज के शब्दों में इसका जवाब है, मन से मन का मिलन। करवाचौथ पर चंद्रमा को अ‌र्ध्य देने के पीछे भी मन को मन से जोड़ने का यही भाव छिपा है। च्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का नियंत्रक माना गया है। मन चंचल है और चंद्रमा शीतल। यह शीतलता ही चंचलता का निग्रह करती है। वैसे भी मन बुद्धि पर हावी रहने की कोशिश करता
Source- News in Hindi 

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