नई दिल्ली। विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर, ये दो दोस्त भारतीय खेल इतिहास में ठीक उसी तरह मशहूर हैं जैसा कि कभी शोले फिल्म के जय-वीरू के दोस्ताना किरदार की मिसाल दी जाती थी, लेकिन समय बीता, कोई आगे निकला तो कोई पीछे रह गया और फिर वो फूट पड़ी जिसने फिर उन दोनों खिलाड़ियों को बमुश्किल ही कभी साथ देखा। दोनों के बीच इस शीत युद्ध की शुरुआत कांबली ने ही की थी और आए दिन कुछ ना कुछ बयान देकर सुर्खियों में आने वाले कांबली ने एक बार फिर सचिन को लेकर अपना मुंह खोला और एक बार फिर मास्टर के करोड़ों फैंस की भावनाओं को आहत किया।
सचिन तेंदुलकर ने हाल में जब यह घोषणा की कि वह वेस्टइंडीज के खिलाफ नवंबर अंत में अपने करियर का 200वां टेस्ट खेलते ही सदा के लिए क्रिकेट को अलविदा कह देंगे, तब विश्व क्रिकेट में जैसे भूचाल आ गया। करोड़ों फैंस के चेहरे ऐसे लटक गए मानो उनकी रूह को किसी ने झकझोड़ दिया हो, लेकिन मास्टर के इस फैसले को किसी की भावनाएं नहीं बदल सकीं और अब फैंस व बीसीसीआइ उनको आखिरी विदाई देने में जुटे हैं। ऐसे में जब हर जगह सचिन को अपने-अपने अंदाज में दिग्गज व फैंस पिछले 24 साल के सफर के लिए शुक्रिया कर रहे थे और जब युवराज जैसे टीम के साथी खिलाड़ी उन्हें ड्रेसिंग रूम ना छोड़ने के लिए एक आखिरी बार मनाने की बात कर रहे थे, तभी कांबली ने कुछ ऐसा कह दिया कि सचिन-कांबली की दोस्ती की मिसाल देने वाले भी कांबली से जरूर आहत हो गए होंगे।
खबरों के मुताबिक कांबली ने सचिन के संन्यास को लेकर कहा है कि मास्टर ब्लास्टर ने काफी देर कर दी और उन्हें संन्यास का यह फैसला विश्व कप जीत के बाद ही ले लेना चाहिए था। खबरों के मुताबिक कांबली ने अपने बयान में कहा, 'जो तेंदुलकर आज हम देख रहे हैं वो उससे बिल्कुल मेल नहीं खाता जिसके साथ मैं बड़ा हुआ था। वह उस अंदाज में रन नहीं बना रहा था जैसा कि उससे उम्मीद की जाती है। यह दुखदायी है। उसे 2011 विश्व कप के बाद ही संन्यास ले लेना चाहिए था। अपने बचपन के सपने (विश्व कप जीत) को पूरा करने के बाद वह संन्यास लेने का उनके पास सबसे अच्छा समय था। बेशक उसके संन्यास के इस फैसले ने खेल जगत में भावनाओं का तूफान ला दिया हो, लेकिन यह सही फैसला है। आखिरी दो टेस्ट उसके लिए काफी भावुक सफर होंगे। उम्मीद करता हूं कि वह मैदान पर जाकर एक बड़ी पारी खेलेगा।'
Source- News in Hindi
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