नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मुजफ्फरनगर दंगा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हिंदू व मुसलमान का अलग अलग ब्योरा दिए जाने पर बृहस्पतिवार को गहरी आपत्ति उठी। दंगा पीड़ितों को राहत और सुरक्षा की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि राज्य सरकार को हिंदू व मुसलमान के आधार पर आंकड़े पेश करने से रोका जाए। पीठ ने भी इस पर सहमति जताते हुए टिप्पणीं की 'मौत मौत होती है।'
सुप्रीम कोर्ट मुजफ्फरनगर दंगा मामले में सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़ितों को दी जा रही राहत और पुनर्वास के साथ ही दर्ज आपराधिक मामलों का ब्योरा पेश करने को कहा था। जिस पर राज्य सरकार की ओर से बृहस्पतिवार को पेश किए गए आंकड़ों को हिंदू व मुसलमान के आधार पर उल्लेखित किया गया था।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील राजीव धवन व रवि प्रकाश मेहरोत्रा ने दंगे में मरने वाले का ब्योरा देते हुए बताया कि मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और सहारनपुर में कुल 128 मामले दर्ज हुए। इसमें 11 हिंदू घायल हुए और 57 मुसलमान जबकि 16 हिंदुओं की मौत हुई और 46 मुसलमानो की। इसी तरह दर्ज मामलों में अभियुक्तों का विवरण भी हिंदू व मुसलमान के आधार पर अलग-अलग दिया गया। राज्य सरकार ने बताया कि इन पांच जिलों में कुल 876 लोग अभियुक्त हैं जिनमें से अभी तक 243 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 12 लोगों पर रासुका लगाई गई है और 16,112 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लिया गया है। इसके अलावा 5,708 लोगों से अच्छे आचरण का बंधपत्र लिया गया है। सरकार ने बताया है कि कुल 128 एफआइआर के अलावा गत 13 अक्टूबर तक राहत शिविरों में भी 352 एफआइआर और शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
Source- News in Hindi
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