Asaram also exploits marrade womans


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 शाहजहांपुर [जागरण संवाददाता]। नाबालिग से रेप के आरोप में फंसे आसाराम के कृत्यों की फेहरिस्त में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आसाराम का 'शिकार' सिर्फ नाबालिग लड़कियां और युवतियां ही नहीं, बल्कि सुंदर विवाहिताएं भी थीं। खासकर वे जिनका अपने पति से अक्सर विवाद रहता था। आसाराम ऐसी महिलाओं को फंसाने के लिए त्रिकाल संध्या और ध्यान योग शिविर का सहारा लेते थे।
आसाराम को लेकर यह नया खुलासा किया है शाहजहांपुर निवासी उनके ही तीन पूर्व साधकों ने। आसाराम से दीक्षा लेकर 14 पूनम दर्शन और ध्यान योग शिविर करने वाले ये साधक सात साल से अपनी पत्नी से अलग हैं। अपने अलगाव के लिए वह आसाराम को ही दोषी मानते हैं। उन्होंने बताया कि त्रिकाल संध्या और गुरु को ही सर्वस्व मानने के मंत्र ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
विरोध को दी जाती गो हत्या की संज्ञापूर्व साधकों ने बताया कि आसाराम के क्रिया-कलापों का जब कोई साधक या उनके घर वाले विरोध करते तो इसे गोहत्या का पाप करार दिया जाता था। उन्होंने भी जब आसाराम की बुराई शुरू कर दी तो उनकी पत्‍‌नी ने भी गोहत्या का पाप बताते हुए उनसे पूरी तरह संबंध तोड़ लिए और अलग रहने लगी।
त्रिकाल पूजासाधकों ने बताया कि आसाराम त्रिकाल पूजा सुबह, दोपहर और शाम को कराते थे। इसके लिए खासकर उन महिलाओं को प्रेरित किया जाता था, जिनका पतियों से कुछ मनमुटाव रहता था। त्रिकाल पूजा दंपतियों के बीच फूट की पहली कड़ी होती थी। विवाद बढ़ने पर उसे वैराग्य की संज्ञा दी जाती थी। पूजा के दौरान पति का स्पर्श भी महापाप बताकर उन्हें लगातार अलग रहने को प्रेरित किया जाता था। एक माह, पांच साल और 17 साल की यह साधना होती थी।
ध्यान योग शिविर त्रिकाल पूजा के बाद पति से अलग होने वाली महिलाओं के लिए ध्यान योग शिविर में बुलाया जाता था। वे 15 दिन तक बापू की ध्यान कुटिया में रहती थीं। वहां आसाराम के अलावा किसी को जाने की अनुमति नहीं होती थी। यहां मोक्ष दिलाने के बहाने उनका शारीरिक शोषण होता था।
Source- News in Hindi

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