These are the reasons which thrashed hopes of World Champions Team India



Hindi News नई दिल्ली। कहानी तो जोहानिसबर्ग वनडे में ही पता लग गई थी लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने उस कहानी का अंजाम भी गजब अंदाज में लिखा। जो पहले वनडे में हुआ वही दूसरे मुकाबले में भी, और दोनों में ही टीम इंडिया की हार 'शर्मनाक' ही रही। पिछले एक साल में जिस टीम ने दुनिया भर की टीमों को बिखेर कर रख दिया, महज दो वनडे लगे उसके रुतबे को तार-तार होने में। जोहानिसबर्ग में 141 रनों से हार और डरबन में 134 रनों की हार ने विश्व चैंपियन टीम की बखिया उधेड़ कर रख दी है। आइए जानते हैं कि क्या थे वो कारण जो डरबन में भारतीय टीम को ले डूबे।
1. ये कैसा फैसला?:
कप्तान धौनी ने जोहानिसबर्ग की तरह एक बार फिर टॉस जीता और इस बार भी शायद वो पिच को ठीक से परखने में चूक गए। बल्लेबाजी के लिए माकूल पिच पर टीम इंडिया एक ऐसी टीम के खिलाफ खेल रही थी जिसके गेंदबाजों के सामने लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं होने वाला था, फिर भी भारत ने बल्लेबाजी करने के बजाय मेजबान टीम को रनों का पहाड़ खड़ा करने की छूट दी और दोनों ही वनडे मैचों में नतीजा वही हुआ।
2. क्या स्पिनरों पर भरोसा नहीं धौनी को?:
पिछला एक साल गवाह है कि भारतीय स्पिनर्स ने टीम इंडिया को कई विपरीत परिस्थितियों में जीत दिलाई है। चैंपियंस ट्रॉफी में इंग्लैंड की तेजतर्रार पिचों पर भी हमारे स्पिनर्स ने ही भारत को खिताबी जीत हासिल करने का मौका दिया था। अगर धौनी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लेते तो शायद भारतीय स्पिनर्स के सामने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज दबाव में आ जाते लेकिन लगता है धौनी अपने स्पिनर्स पर से अचानक भरोसा खो बैठे हैं, क्यों? इसका जवाब तो धौनी ही दे पाएंगे।

3. इशांत और उमेश भी फ्लॉप:
टीम इंडिया का पेस अटैक एक बार फिर चूक गया। मोहम्मद शमी एकमात्र ऐसे गेंदबाज रहे जिन्होंने थोड़ा प्रभाव छोड़ा लेकिन शुरुआती ओवरों में वो भी असफल ही दिखे। इशांत और उमेश को धौनी ने भुवनेश्वर कुमार और मोहित शर्मा की जगह सिर्फ इसलिए शामिल किया था ताकि वो अपनी रफ्तार से विरोधी बल्लेबाजों को परेशान कर सकें लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए। इशांत ने बिना किसी सफलता, 7 ओवर में 38 रन दिए जबकि उमेश ने 6 ओवरों में बिना किसी सफलता 45 रन लुटा डाले। भारतीय गेंदबाजों में ना सिर्फ रफ्तार की कमी दिखी बल्कि बाउंसी पिच पर कैसे उछाल का फायदा उठाया जाए इसका अंदाजा शायद अब भी वो लगा नहीं पाए हैं। मोहम्मद शमी ने मैच में एक अच्छी संयमित बाउंसर फेंकी और उस पर उन्हें अमला का विकेट मिल गया, ऐसे में अंदाजा लगाना आसान है कि अगर भारतीय गेंदबाज बाउंस का लगातार फायदा उठाते तो कहानी कुछ और होती।
4. 11 पर भारी ये चार:
भारतीय टीम के सामने पिछले वनडे के मुकाबले इस बार लक्ष्य कम था, लेकिन उस नामुमकिन चीज को शायद टीम इंडिया मुमकिन करने में लगातार असफल ही रही है। वो चीज है, दक्षिण अफ्रीका का पेस अटैक। दक्षिण अफ्रीका ने सिर्फ छह गेंदबाजों का इस्तेमाल किया जिसमें 5 पेसर थे। उनके चार पेसर (डेल स्टेन- 3 विकेट, सोतसोबे- 4 विकेट, मोर्कल- 2 विकेट और फिलेंडर- 1 विकेट) टीम इंडिया के सभी बल्लेबाजों पर भारी पड़े। पिछले मुकाबले की ही तरह उनकी गेंदबाजी में एक बार फिर वही लय, वही आक्रामकता नजर आई। मैच के बाद धौनी ने भी ये माना कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की खास बात ये है कि वो पूरा मैच एक ही लाइन पर गेंद फेंकते रहते हैं और उससे भटकते नहीं, जो कहीं ना कहीं बल्लेबाजों पर प्रभाव डालता है।
5. क्या हुआ इस तिकड़ी को?:
भारतीय पिचों पर टीम इंडिया के ऊपर के तीन शेरों (रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली) ने खूब हुंकार भरी लेकिन दक्षिण अफ्रीका पहुंचकर जैसे इस तिकड़ी की बैटरी पूरी तरह से डिस्चार्ज हो गई। डरबन में रोहित ने जहां 34 मिनट संघर्ष करके किसी तरह आउट होने से पहले 19 रन बनाए, वहीं शिखर और विराट दोनों ही शून्य पर पवेलियन लौट गए। भारतीय टीम पिछले एक साल में काफी हद तक इन तीन धुरंधर बल्लेबाजों पर निर्भर हो गई थी, जो अपने प्रदर्शन से कभी मिडिल ऑर्डर पर दबाव नहीं पड़ने देते थे, लेकिन जैसे ही ये तीन पत्ते बिखरे, मिडिल ऑर्डर भी असमंजस में आ गया, जैसे उनकी दबाव लेने की आदत छूट ही गई थी।

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