So is ODI loss a result of these faults by Dhoni and Selectors?



जोहानिसबर्ग और डरबन में विश्व चैंपियन टीम इंडिया का जो हाल हुआ उसने कहीं ना कहीं टीम की पोल खोल कर रख दी। सीरीज भी गई और 141 व 134 रनों से मिली दो करारी हार उस टीम को आइना दिखा गईं जो वनडे रैंकिंग में शीर्ष पर रहकर अपना रुतबा बयां कर रही थी। हम दक्षिण अफ्रीका गए तो राजा बनकर थे लेकिन वापसी में शायद वो ताज होकर भी नदारद दिखे, आखिर ऐसा क्यों हुआ, क्या हैं वो कारण जिनकी वजह से हमें ये हार मिली? क्या इसका कारण सिर्फ खिलाड़ियों का प्रदर्शन मात्र था या फिर चयनकर्ताओं व कप्तान धौनी की कुछ गलतियों का नतीजा था ये? आइए कुछ ऐसी चीजों पर प्रकाश डालते हैं जो शायद चयन पर कहीं ना कहीं सवाल उठाते हैं।
1. गंभीर को नजरअंदाज किया:
गौतम गंभीर ने अपने पिछले पांच प्रथम श्रेणी मैचों में खुद को साबित किया था। पिछले पांच प्रथम श्रेणी मैचों में दिल्ली के इस शानदार बल्लेबाज ने दो शतक (123 और 153), तीन अर्धशतक (नाबाद 51 व 64) और तीन बार 30 पार स्कोर बनाए। उनके पास दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी और उनके घर में भी खेलने का अनुभव था। फिर चाहे वो टेस्ट हो या वनडे, दोनों फॉर्मेट में वो टीम की जान बन सकते थे। प्लेइंग इलेवन में ना रखते, लेकिन अगर उन्हें टीम के साथ ही ले जाया जाता, तो वहां पहुंचकर टॉप ऑर्डर की असफलता देखकर उन्हें मैदान पर मौका तो दिया जा सकता था।
2. वनडे में जहीर क्यों नहीं?:
जहीर खान को घरेलू क्रिकेट व प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए टेस्ट टीम में जगह दी गई है। धौनी व चयनकर्ता जानते थे कि ना इशांत लय में हैं और ना भुवनेश्वर, इसके अलावा उमेश यादव भी अभी-अभी इंजरी के बाद लौटे हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका जैसे कठिन दौरे पर इन सभी को तो मैदान पर उतारना चयनकर्ताओं को सही लगा, लेकिन जहीर को वनडे टीम में क्यों नहीं लिया गया। वो ना सिर्फ टीम के बॉलिंग अटैक में और धार पैदा कर सकते थे बल्कि अपने अनुभव से बाकी के गेंदबाजों और टीम को दिशा भी दिखा सकते थे। हाल में एक निचले क्रम में उन्होंने बल्ले से भी जौहर दिखाया है।
3. क्या चयनकर्ता भूल गए अफ्रीका में इंडिया 'ए' का प्रदर्शन?:
हाल में इंडिया 'ए' ने दक्षिण अफ्रीका दौरा किया था। टीम में युवा खिलाड़ियों को इस लिहाज से भेजा गया था ताकि आगे के दौरे के लिए कुछ नए नाम मिल सकें, लेकिन शायद चयनकर्ता भी उस दौरे पर किए गए प्रदर्शन को भूल गए। युवराज सिंह का हाल का फॉर्म बहुत खराब रहा है इससे सब वाकिफ हैं, ऐसे में अब तक उस खिलाड़ी को बेंच पर क्यों बिठा रखा है जिसने इंडिया-ए की तरफ से दक्षिण अफ्रीका में 4 मैचों में 193 रन बनाए थे, जिसमें 70 का सर्वाधिक स्कोर शामिल था। ये नाम और कोई नहीं बल्कि अंबाती रायुडू हैं। इसके अलावा गेंदबाजी में धौनी व चयनकर्ताओं ने शाहबाज नदीम को दक्षिण अफ्रीका ले जाने के बारे में क्यों नहीं सोचा। इस युवा गेंदबाज ने इंडिया-ए के दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर 5 मैचों में 9 विकेट लिए थे और आइपीएल में भी उन्होंने पिछले कई सालों में ठीक प्रभाव छोड़ा है, फिर भी उन्हें क्यों मौका नहीं मिला।
4. दिनेश कार्तिक के साथ ऐसा बर्ताव क्यों?:
हाल ही में दिनेश कार्तिक ने घरेलू क्रिकेट में कई जानदार पारियां खेलीं, जिसमें एकशतक भी शामिल है। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के इंडिया-ए के दौरे पर ट्राई सीरीज में फाइनल में ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ कार्तिक ही हीरो बने थे। उन्होंने प्रीटोरिया में खेले गए उस मैच में सर्वाधिक 73 रन बनाकर साबित किया था कि वो वहां की पिचों से खौफ नहीं खाते। इसके अलावा उन्हें 67 वनडे मैचों का अनुभव भी है, धौनी की मौजूदगी में विकेटकीपर ना बन पाएं लेकिन वो एक बेहतरीन फील्डर भी हैं। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज करना किस हद तक सही था?

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