Hindi News: राघवेंद्र शुक्ल, मुरादाबाद। तकरीबन दो साल पहले शवों की खरीद फरोख्त को लेकर चर्चा में आए मुरादाबाद में अब पोस्टमार्टम के बाद अज्ञात शवों के लापता होने का सवाल खड़ा हो गया है। इन शवों की अंतिम यात्रा अंतिम संस्कार तक पहुंची की नहीं, यह विधिकरूप से पुलिस भी नहीं बता पा रही है। तब भी जबकि ऐसे मामलों में बकायदा दाह संस्कार की रसीद कटती है। सो, यहां अज्ञात शवों की अंतिम यात्रा भी अज्ञात हो कर रह गई है।
बीते दस सालों में तीन हजार से अधिक अज्ञात लाशें मुरादाबाद में मिल चुकी हैं। इन सभी लाशों का पोस्टमार्टम भी हुआ है, रिपोर्ट दाखिल की गई है, लेकिन अंतिम संस्कार का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यानी, यदि दाह संस्कार किया तो इसकी रसीद कहां है? न एसएसपी ऑफिस के रिकॉर्ड रूम में ये रसीदें हैं और न ही पुलिस लाइन में। सबसे बड़ी बात यह है कि जो थाना पोस्टमार्टम कराता है, वह भी इससे अंजान है।
पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब मंडी चौक के पवन अग्रवाल ने 12 जुलाई 13 को एसएसपी कार्यालय से वर्ष 2000 से 2013 तक थानावार पोस्टमार्टम, चिकित्सकों के नाम तथा दाह संस्कार के बाद उसकी रसीद की जानकारी मांगी। पहले दो बिंदुओं की जानकारी जनपद के 8 थानों ने दी। इन थानों के पास 276 शव के रिकॉर्ड तो हैं, लेकिन अंतिम संस्कार की जानकारी नहीं है। यह अजीबोगरीब हालात तब हैं, जबकि अज्ञात शव के पोस्टमार्टम के लिए शासन स्तर से धन आवंटित होता है। धन पुलिस विभाग संबंधित थानों को देता है, इसके बदले में दाह संस्कार हुआ कि नहीं इसकी जानकारी किसी के भी पास नहीं है। पुलिस लाइन के आरआइ ओपी आर्या कहते हैं कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। हम केवल पोस्टमार्टम के लिए आदेश करते हैं।
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