कोलकाता [रवि प्रकाश]। दिल-ए-नादान की अट्ठारह साल पहले की गई नादानी ने एक पुलिस जवान को छह माह के लिए सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जोश में आकर इस पुलिसकर्मी ने ट्यूशन से घर जा रही एक नाबालिग को सरेआम चूम लिया था। इस पर किशोरी के परिजनों ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। करीब दो दशक में कई उतार-चढ़ाव के बाद आखिर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जवान को छह माह कैद की सजा सुनाई।
घटना पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा पर बसे मालदा जिले के चंचल थाना क्षेत्र स्थित गोरखपुर गांव की है। वर्ष 1995 में ट्यूशन पढ़कर घर लौट रही एक नाबालिग लड़की को 16 वर्षीय अजहर अली ने सरेआम चूम लिया था। घटना से नाराज लड़की के घरवालों ने अजहर के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी। पुलिस ने जांच कर जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। इस बीच वर्ष 2000 में अजहर सीमा सुरक्षा बल [बीएसएफ] में भर्ती हो गया। पांच साल बाद उसे कोलकाता आर्म्ड पुलिस में ले लिया गया। इधर, 17 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 22 अगस्त 2012 को अदालत ने उसे छह माह की सजा सुना दी। नौकरी जाने के डर से उसने इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन हाई कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा तो अजहर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने दलील दी कि नादानी में हुए इस अपराध की इतनी बड़ी सजा न दी जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालतों के फैसले को सही मानते हुए छह माह कारावास की सजा बरकरार रखी। साथ ही उसे तीन नवंबर से पहले पुलिस के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया।
Source- News in Hindi
No comments:
Post a Comment