उन्नाव, (अवधेश पाण्डेय)। राजा राव रामबक्श का किला एक हजार टन खजाने के कारण इन दिनों दुनिया की नजरों में है। संत शोभन सरकार ने यहां के डौंडिया खेड़ा स्थित किले के गर्भ में खजाना दबे होने का दावा तो किया है लेकिन उसकी असल कहानी का सीधा रिश्ता किले के मुख्यद्वार के बाहर बाईं ओर स्थित बाबूजी राव शिवाला से भी जुड़ा बताया जाता है। राजा राव रामबक्श सिंह ने पूजा करने के लिए किले के मुख्य द्वार के पास विशाल शिव मंदिर बनवाया था। इसे बाबूजी राव शिवाला के नाम से जाना जाता है।
किले के गुंबद पर त्रिशूल आज भी सुशोभित है। वैसे तो अधिकांश शिव मंदिरों के शिखर पर त्रिशूल होता है, लेकिन इस मंदिर का त्रिशूल इतिहास समेटे है। खजाने का राज भी इससे जुड़ा है। किवदंती भी है कि सूरज की पहली किरण जब त्रिशूल पर पड़ती है तो मंदिर ऊंचा होने के कारण त्रिशूल की छाया किले में बने कुएं के पास पड़ती है। राजा ने खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इसी स्थान को चुना, ताकि कभी स्थान को लेकर किसी तरह की भूल या भ्रम न हो। कोई देखरेख न होने के कारण किले में भारी भरकम बबूल के पेड़ के साथ झाड़ियां उग आई हैं, लेकिन त्रिशूल आज भी खजाने के स्थान की शान से गवाही दे रहा है।
Source- News in Hindi
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