He writes with leg not with hand


Handicapped people

Hindi News: मैनपुरी। मजदूर दयाराम जाटव के घर का चिराग अजय आया, मगर खुशियां नहीं लाया। लाड़ले के सभी अंग सामान्य थे, मगर हाथ अधूरे। वक्त गुजरने के साथ-साथ परिवार की मायूसी बढ़ती गई। मजदूर केबेटे का शरीर बढ़ा मगर हाथ छोटे के छोटे रह गए। हाथों की लाचारी से अजय की जंग शुरू हुई तो पैरों ने हाथ का काम करना शुरू कर दिया,सुबह ब्रश थामने से शुरू कर कर स्कूल में कलम थामने तक सब काम पैर से होने लगे।
अब अजय के पैर भी पैर हैं और हाथ भी पैर। मायूसी और मुश्किलों पर जीत की कहानी बेवर ब्लॉक के गांव जिलही बाजपुर में रहने वाले अजय की है। छह साल की उम्र तक अजय दूसरों के सहारे था। मायूसी से घिरे परिवार ने उसे स्कूल में बिठाना शुरू किया है। स्कूल में हाथों से लाचार बच्चे को जिसने देखा, वह तरस खाता नजर आया, मगर यहीं से अजय की असली जंग शुरू हुई।
अजय के मुताबिक हाथों की लाचारी से उसने लड़ना शुरू किया। पैरों की अंगुली में कलम फंसाई और कागज पर लिखने की कोशिश शुरू की। पहले हर बार अंगुलियों से कलम फिसल जाती थी। कई बार लगा कि ऐसा नहीं हो पाएगा, लेकिन उसने हार नहीं मानी और कोशिशें मुकाम पा गईं। आरएस ग्लोबल अकादमी की कक्षा आठ में पढ़ने वाले अजय के पैर हाथों से तेज चलते हैं।
पैरों की अंगुलियों में फंसी कलम कागज पर ऐसे दौड़ती है कि उसके साथी उससे तेज नहीं लिख पाते। अजय बताता है कि अब उसे हाथों की जरुरत महसूस नहीं होती। सुबह ब्रश करना हो या कोई और काम,उसके पैर ही हाथों का काम करते हैं। स्कूल में होने वाली हर प्रतियोगिता में अव्वल रहने वाला अजय उच्च शिक्षा पाकर अफसर बनना चाहता है। मगर मलाल यह है कि उसे सरकार की कोई मदद नहीं मिली।
राजा बन गया राजकिशोर
बेवर विकास खंड के गांव छिनकौरा में दो साल की उम्र पोलियो के वायरस के दंश से राजकिशोर के भविष्य पर अंधेरा छा गया। चलने फिरने से लाचार बच्चे के भविष्य को लेकर परिवार वाले परेशान रहते थे, लेकिन राजकिशोर ने पोलियो से जंग लड़ी और राजा बन गया। ट्राइसाइकल से स्कूल का सफर शुरू करने वाले राजकिशोर ने तालीम को हथियार बनाया और लड़ता चला गया।
गांव के ही प्राथमिक स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाला राजकिशोर अब अंग्रेजी में एमए की डिग्री हासिल कर चुका है। तालीम के सहारे भविष्य बनाने की कोशिश में जुटे राजकिशोर घर के बाहर ही 120 बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ाते हैं। बच्चे राजकिशोर को गुरुजी नाम से बुलाते हैं। राजकिशोर कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाने में बहन सरिता साथ देती है, वह एमए बीएड कर चुकी है। राजकिशोर बताते हैं कि आर्थिक तंगी और सामाजिक उपहास ने आत्मा को झकझोरा। अब वे पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं।
Source- News in Hindi 
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